इरान को परमाणु हथियार हासिल करने की किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी: ट्रम्प

२० वैशाख, काठमाडौं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रम्प के अनुसार, यदि इरान को परमाणु हथियार मिलते हैं, तो यह पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा होगा, और इसीलिए अमेरिका को इरान के खिलाफ युद्ध करना पड़ सकता है। शनिवार को फ्लोरिडा में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रम्प ने कहा, ‘अगर हमने ऐसा नहीं किया होता तो उनके पास परमाणु हथियार होते और इज़राइल, पश्चिम एशिया तथा यूरोप तबाह हो जाते। हम मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्तियों के हाथों परमाणु हथियार जाने बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते।’ उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने मध्य पूर्व को एक बड़ी परमाणु आपदा से बचाया है।
इसी बीच, ट्रम्प ने इरान के युद्ध रोकने के उद्देश्य से भेजे गए नए प्रस्ताव को फिर से अस्वीकार किया है। इससे पहले 26 और 27 अप्रेल को इरान द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को ट्रम्प पहले ही खारिज कर चुके हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, इरान के नए प्रस्ताव में परमाणु मुद्दे का कोई उल्लेख न होने के कारण ट्रम्प असंतुष्ट हैं। दूसरी ओर, इरान ने होर्मुज जलसंधि को तुरंत खोलने और परमाणु मामले को बाद में वार्ता के लिए स्थगित करने की मांग की है, जबकि ट्रम्प दोनों को एक साथ पूरा करने पर जोर दे रहे हैं।
उन्होंने पहले ही इरान से कहा है कि वार्ता की मेज पर आने से पहले उसे संशोधित यूरेनियम वापस करना होगा। अमेरिका में विवाद तब बढ़ गया जब ट्रम्प ने कहा कि युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की अनुमति जरूरी नहीं है। 1973 के ‘वार पावर्स’ कानून के तहत किसी राष्ट्रपति को युद्ध शुरू करने के 60 दिनों के भीतर संसद से अनुमति लेनी होती है, नहीं तो 1 मई तक सैन्य कार्रवाई रोकनी होती है। लेकिन ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि युद्धविराम के बाद यह 60 दिन की सीमा ठप है। ट्रम्प ने इरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए संसद से अनुमति न लेने की बात कही है और जो लोग अनुमति मांगते हैं उन्हें ‘देशभक्त नहीं’ बताया है।
व्हाइट हाउस ने अमेरिकी संसद को औपचारिक रूप से सूचना दी है कि इरान के साथ युद्ध समाप्त हो चुका है। हालांकि वहां अमेरिकी सेना की उपस्थिति जारी है, लेकिन इस युद्ध के जारी रहने का कोई संकेत नहीं है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलसंधि के पारगमन के दौरान कर न देने पर किसी भी कंपनी को, जो इरान को धन हस्तांतरित करती है, प्रतिबंध लगाया जा सकता है। चाहे वह राशी चैरिटी के नाम पर ही क्यों न दी जाए, उस पर भी कार्रवाई होगी। होर्मुज जलसंधि में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है। पहले जहां रोजाना लगभग 130 जहाज गुजरते थे, वहां अब रोजाना दस से कम जहाज ही चलते हैं।
पेंटागन के अनुमान के अनुसार अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी के कारण इरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर (करीब 456 अरब भारतीय रुपए) का नुकसान हुआ है। अमेरिकी सेन्ट्रल कमांडर ने राष्ट्रपति ट्रम्प को इरान के खिलाफ संभावित हमलों के वैकल्पिक योजनाओं की जानकारी दी है। अमेरिका ने पश्चिम एशिया के सहयोगियों (इजराइल, कतार, कुवैत, यूएई) को 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदे की मंजूरी दी है। इरान में खबरें आ रही हैं कि राष्ट्रपति और संसद के सभापति विदेश मंत्री अब्बास अराघची को हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी अड्डों को भारी नुकसान: सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इरान के हमलों से मध्य पूर्व के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को अभूतपूर्व क्षति हुई है। इरान ने कुवैत के कैंप ब्यूरीन सहित आठ देशों के कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों में बोइंग E-3 सेंट्री विमान से लेकर महत्वपूर्ण रडार सिस्टम तक को नष्ट कर दिया गया है, जिसकी कीमत लगभग 50 करोड़ डॉलर है।





