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एटलान्टिक महासागर में संचालित पानी जहाज पर 3 यात्रियों की मृत्यु, 1 में दुर्लभ हान्ता वायरस संक्रमण पुष्टि

२१ वैशाख, काठमांडू । एटलान्टिक महासागर में संचालित एक पानी जहाज पर तीन यात्रियों की मृत्यु हो गई है। इनमें से कम से कम एक व्यक्ति में चूहों से संचारित दुर्लभ रोग ‘हान्ता वायरस’ संक्रमण की पुष्टि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, अर्जेंटीना के उशुआया से केप वर्डे की ओर जा रहे एमवी होन्डियस क्रूज जहाज में हान्ता वायरस के संभावित प्रकोप की जांच जारी है। शनिवार को जारी बयान में डब्लूएचओ ने कहा कि एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और कम से कम पांच अन्य यात्रियों में संक्रमण का संदेह है।
‘छ प्रभावितों में से तीन की मृत्यु हो चुकी है जबकि एक दक्षिण अफ्रीका के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में उपचाराधीन है,’ बयान में उल्लेख है। डब्लूएचओ के अनुसार, और परीक्षण तथा महामारी संबंधी जांच जारी है। यात्रियों और चालक दल को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं और सहायता दी जा रही है तथा वायरस के जीन अनुक्रमण का कार्य भी जारी है।
साथ ही, लक्षण दिखा रहे अन्य दो यात्रियों को बचाने के लिए देशों के बीच समन्वय किया जा रहा है। हान्ता वायरस संक्रमित चूहों के मल-मूत्र से मनुष्यों में संक्रमण फैलने वाला दुर्लभ रोग है। यह गंभीर स्थिति में रक्तस्रावी बुखार (हेमोरजिक फिवर) रोग का कारण बन सकता है और जानलेवा भी हो सकता है।
दंपती की मौत के विषय में दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को पहले ही ‘गंभीर तीव्र श्वसन संबंधी बीमारी’ के प्रकोप की सूचना दी थी और कम से कम दो मौतों की पुष्टि की थी। तीसरा संक्रमित जोहान्सबर्ग के आईसीयू में इलाजरत है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जोहान्सबर्ग में इलाजरत मरीज में हान्ता वायरस की पुष्टि हुई है।
सबसे पहले लक्षण दिखाने वाले ७० वर्षीय पुरुष की जहाज पर ही मृत्यु हुई। उनका शव वर्तमान में दक्षिण अटलांटिक में ब्रिटिश क्षेत्र सेंट हेलेना द्वीप पर रखा गया है। उनकी ६९ वर्षीय पत्नी भी बीमार पड़ने के बाद दक्षिण अफ्रीका लायी गईं, जहां उनका जोहान्सबर्ग स्थित अस्पताल में निधन हो गया। मृतकों की राष्ट्रीयता अब तक पुष्ट नहीं हो सकी है, परन्तु आईसीयू में इलाजरत मरीज ६९ वर्षीय ब्रिटिश नागरिक बताया गया है।