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नेपाली कांग्रेस ने भारत-चीन के बीच लिपुलेक मार्ग से मानसरोवर यात्रा संचालन की सहमति पर आपत्ति जताई

नेपाली कांग्रेस ने भारत और चीन के बीच लिपुलेक होते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालन करने की सहमति पर आपत्ति व्यक्त की है। कांग्रेस ने लिपुलेक, लिम्पियाधुर और कालापानी क्षेत्रों को नेपाली भूमि के रूप में स्पष्ट रूप से दावा करते हुए सरकार के कूटनीतिक नोट को सकारात्मक रूप से ग्रहण किया है। पार्टी ने सीमा विवाद को कूटनीतिक और राजनीतिक तरीके से ही सुलझाने पर बल देते हुए राजनीतिक दलों के बीच मतभेद न होने की आवश्यकता जताई है। २१ वैशाख, काठमाडौं।

लिपुलेक मार्ग से भारत और चीन द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालन की सहमति पर नेपाली कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। आज केंद्रीय कार्यसम्पादन समिति की बैठक में भारत-चीन सहमति के प्रति असंतोष व्यक्त करते हुए सरकार द्वारा भेजे गए कूटनीतिक नोट को सकारात्मक रूप में लिए जाने की बात कही गई। सहमहामन्त्री उदय शमशेर जबराले बैठक के पश्चात कहा, ‘नेपाली भूमि लिपुलेक मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालन विषय पर भारत और चीन के बीच बनी सहमति ने नेपाली कांग्रेस का गंभीर ध्यान आकर्षित किया है।’

उन्होंने याद दिलाया कि नेपाली कांग्रेस ने इस विषय पर स्पष्ट दृष्टिकोण जताया है और यह भी स्मरण किया कि वर्ष २०७२ में तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशील कोइरालाले कूटनीतिक नोट भेजकर इस मामले पर ध्यानाकर्षण कराया था। कांग्रेस ने सीमा विवाद को केवल कूटनीतिक एवं राजनीतिक मार्ग से ही सुलझाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। ‘हमें इसे कूटनीतिक माध्यम से ही समाधान करना होगा,’ उन्होंने कहा।

कांग्रेस का निष्कर्ष है कि राजनीतिक दलों को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विषय में विभाजन नहीं करना चाहिए। ‘अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में दलगत विभाजन नहीं होना चाहिए। हम अंतरराष्ट्रीय मामलों में सरकार के साथ खड़े रहेंगे,’ उन्होंने कहा, ‘सरकार को भी इस विषय पर सभी राजनीतिक दलों से संवाद स्थापित करना चाहिए।’