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एमआरपी विवाद: समाधान कब होगा?

सरकार ने सीमा शुल्क स्थल पर आयातित वस्तुओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को अनिवार्य करने के फैसले को सख्ती से लागू किया है, जिसके बाद प्रमुख व्यापारिक सीमाओं पर मालवाहक वाहन रुकने लगे हैं। एमआरपी लागू होने के बाद व्यवसायी वस्तुएं आयात नहीं कर रहे हैं, जिससे बाजार में दैनिक उपभोग्य वस्तुओं की कमी और महंगाई बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। व्यवसायियों के विरोध को उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता ‘बदमाशी’ करार दे रहे हैं, जबकि सरकार इस नियम को दृढ़ता से लागू करने की बात कह रही है। २० वैशाख, काठमांडू।

सरकार ने सीमा शुल्क स्थल पर आयातित वस्तुओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को अनिवार्य करने के निर्णय को कड़ाई से लागू किया है, जिससे देश के प्रमुख व्यापारिक सीमाओं पर असमंजस और गतिरोध उत्पन्न हो गया है। वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने उपभोक्ता ठगी रोकने के लिए यह व्यवस्था आगे बढ़ाई है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में व्यावहारिक जटिलताओं के कारण वीरगंज, भैरहवा, नेपालगंज, रसुवा और मेची सीमा शुल्क स्थलों पर मालवाहक वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। सीमा शुल्क से एमआरपी उल्लेख किए बिना सामान रिलीज नहीं हो रहा है, इसलिए व्यवसायी वस्तुएं आयात नहीं कर रहे हैं।

वीरगंज, भैरहवा और रसुवागढी सहित मुख्य सीमाओं से होने वाले आयात में मंदी के कारण बाजार में दैनिक उपभोग्य वस्तुओं की कमी और महंगाई बढ़ने की संभावना नजर आ रही है। हालांकि, सीमा शुल्क प्रशासन के अनुसार औद्योगिक कच्चे माल और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की आपूर्ति पूर्ण रूप से बंद नहीं हुई है। व्यवसायी इसे कार्यान्वयन के लिए अव्यावहारिक नीति बता रहे हैं।

सीमा शुल्क कार्यालय के सूचना अधिकारी उदयसिंह विष्ट के अनुसार, वर्तमान में लगभग १४०० से १५०० के बीच मालवाहक वाहन सीमा शुल्क क्षेत्र में रुक गए हैं। १६ वैशाख को लगभग १२०० वाहन रुके थे, जो अब रोजाना करीब १०० की दर से बढ़ रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए विभाग द्वारा मंत्रालय से पत्रचार किया गया है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक संकेत या निकास नहीं मिला है।