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भाषा संरक्षण के लिए निवेश को प्रभावी बनाने पर मंत्री श्रेष्ठ का बल

२२ वैशाख, काठमाडौं। बागमती प्रदेश के संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री सुरेश श्रेष्ठ ने भाषा संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार द्वारा किए गए निवेश की प्रभावशीलता दिखाने की आवश्यकता जताई है। भाषा दिवस के अवसर पर आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश में बोली जाने वाली भाषाओं के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन निवेश का उचित परिणाम अभी तक सामने नहीं आया है। उन्होंने प्रदेश सरकार की तरफ से भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जाने की बात कही।

मंत्री श्रेष्ठ ने कहा कि भाषा संवर्धन कार्यक्रमों को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि वास्तविक उपलब्धि पाने के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य निवेश करता रहेगा, लेकिन यदि नई पीढ़ी अपनी भाषा नहीं सीखेगी तो वह निवेश बर्बाद होगा। उन्होंने घर-घर, मोहल्ले-टोल और विद्यालय स्तर पर भाषा शिक्षा पर ज़ोर देने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

मंत्री ने बताया कि मंत्रालय द्वारा किए गए निवेश के आधार पर कितने लोगों ने भाषा और लिपि सीख ली इसका आंकड़ा संकलन और मूल्यांकन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बागमती प्रदेश में नेवा और तामांग भाषाओं को सरकारी भाषा के रूप में स्थापित किया गया है, लेकिन भाषा संबंधी नियमावली को अंतिम रूप देने में कुछ देरी हुई है। वे बताते हैं कि भाषा दिवस के अवसर पर २४ वैशाख को नियमावली जारी करने की योजना थी, लेकिन लगातार लंबी छुट्टियों के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका।

फिर भी उन्होंने शीघ्र ही नियमावली जारी करने का संकल्प व्यक्त किया। मंत्री श्रेष्ठ ने यह भी कहा कि बागमती प्रदेश में अपना प्रज्ञा प्रतिष्ठान स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश सरकार भाषा संवर्धन के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है और आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ में अतिरिक्त बजट आवंटन पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘भाषाओं के लिए बागमती प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपये निवेश किए हैं। इस निवेश से क्या उपलब्धि हुई, हम कितना काम कर पाए? नेवा देय दबुः और तामांग घेदुङ ने अपनी प्रदेश में भाषाओं को चलाने और उन्हें सरकारी भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए काफी संघर्ष किया है। बागमती प्रदेश सरकार भाषा संवर्धन और संस्कृति संरक्षण के लिए मंत्रालय की पूरी शक्ति लगा रही है।’