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सरकार का सूक्ष्म निगरानी: ट्रेड यूनियन के नाम पर गतिविधि करने वाले कर्मचारियों पर संभावित कार्रवाई

सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से निजामती कर्मचारियों के ट्रेड यूनियन को समाप्त कर दिया है, लेकिन कर्मचारी संगठन अपनी संगठित गतिविधियाँ जारी रखे हुए हैं। केंद्रीय मंत्रालय, संघीय मामलों और सामान्य प्रशासन ने इन गतिविधियों पर नोटिस जारी किया है और आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। छह कर्मचारी संगठनों ने ट्रेड यूनियन पुनर्स्थापित करने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है तथा सरकार के फैसले को वापस न लेने पर चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन करने की बात कही है। २२ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने अध्यादेश के जरिए निजामती कर्मचारियों के ट्रेड यूनियन को खत्म कर दिया है, लेकिन संगठन अपनी संयुक्त गतिविधियाँ बंद नहीं कर रहे हैं।

संघीय मामलों और सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने इन गतिविधियों पर ध्यान देते हुए नोटिस जारी किया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा संशोधित ऐन के तहत अध्यादेश जारी किए जाने के बाद से कर्मचारी ट्रेड यूनियन की व्यवस्था गत रविवार से समाप्त हो चुकी है। कर्मचारी ऐन में संशोधन के बाद कोई भी कर्मचारी संगठन नहीं रहेगा, हालांकि राजनीतिक कर्मचारी संगठन सोमवार को संयुक्त बयान जारी कर विरोध दर्ज करा चुके हैं।

सरकारी कर्मचारियों द्वारा संगठन के रूप में बयान जारी करने के बाद मंत्रालय ने इस मामले में गंभीरता दिखाई है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘निजामती ऐन २०४९ के अनुसार कर्मचारी ट्रेड यूनियन की अनुमति नहीं है, इसे अध्यादेश के जरिए समाप्त किया जा चुका है। कर्मचारियों को नागरिकों को सेवा प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न होना चाहिए। यदि इस तरह की गतिविधियाँ जारी रहीं, तो मंत्रालय आवश्यक कार्रवाई करेगा।’ अध्यादेश के तहत सभी प्रकार के कर्मचारी संगठन समाप्त किए गए हैं, इसलिए फिर भी कर्मचारी नाम पर जारी किए गए विज्ञप्ति पर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, उन्हें सचेत किया जाएगा और आवश्यक अन्य कदम उठाए जाएंगे, ऐसा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया।

नेपाल निजामती कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष भवानी न्यौपाने दाहाल, नेपाल निजामती कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष उत्तमकुमार कटुवाल, नेपाल राष्ट्रीय निजामती संगठन के अध्यक्ष अम्बादत्त भट्ट, एकीकृत सरकारी कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष यामबहादुर खत्री, नेपाल मधेसी निजामती कर्मचारी मंच के कार्यवाहक अध्यक्ष विजयकुमार यादव और स्वतंत्र राष्ट्रसेवक कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष सीता गुरुङ ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर ट्रेड यूनियन व्यवस्था बनाए रखने की मांग की थी। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंगलवार सुबह जारी अपने बयान में ट्रेड यूनियन समाप्ति को पार्टी के खिलाफ लड़ाई नहीं बताया था।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि विद्यार्थी संगठन और कर्मचारी ट्रेड यूनियन की समाप्ति के विरोध के बीच सरकार अपने निर्णय प्रणाली को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा था, ‘यह किसी पार्टी के खिलाफ लड़ाई नहीं है। यह प्रणाली को बचाने का प्रयास है। यह भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है। यह देश को दलगत कब्जे से मुक्त कर संस्थागत मार्ग पर ले जाने का प्रयास है। शिक्षालय और कर्मचारीतंत्र को दलगत संक्रमण से मुक्त करने का प्रयास है।’ सोमवार को छह कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई थी, जिसमें कहा गया था कि ट्रेड यूनियन की व्यवस्था बनाए नहीं रखी गई तो आंदोलन को बाध्य होना पड़ेगा। कर्मचारी संगठनों द्वारा सरकार के खिलाफ आंदोलन की धमकी पर मंत्रालय ने इसे गंभीरता से लिया है। मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा, ‘कर्मचारी संगठनों के नाम पर हो रही गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इन गतिविधियों पर मंत्रालय एक चरण की चर्चा कर चुका है।’ चूंकि कर्मचारी ट्रेड यूनियन समाप्त करने की व्यवस्था हो चुकी है, इसलिए किसी भी कर्मचारी के नाम पर संगठित गतिविधि करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, मंत्रालय ने जानकारी दी है। छह कर्मचारी संगठनों ने ट्रेड यूनियन समाप्ति का निर्णय वापस न लेने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है। उन संगठनों ने सरकारी निर्णय का विरोध करते हुए ट्रेड यूनियन के अधिकार पुनर्स्थापित करने के लिए विज्ञप्ति जारी की है। सरकार उनकी मांगों की उपेक्षा करती है तो वे कानूनी लड़ाई और सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से चरणबद्ध आंदोलन करने को मजबूर होंगे, विज्ञप्ति में कहा गया है।