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भान्सा ही नहीं औषधि और पेयजल पर भी प्रभाव

समाचार सारांश

  • ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से विश्वव्यापी पेट्रोलियम आपूर्ति में बाधा आई है जिससे नेपाल में डीजल और पेट्रोल की कीमत चार बार बढ़ी है।
  • ईंधन की कीमत वृद्धि से औषधि उत्पादन, खाद्य पदार्थों की कीमत और आधारभूत संरचना निर्माण पर असर पड़ा है, जबकि उद्योगों ने 40 प्रतिशत तक उत्पादन कम किया है।
  • सरकार ने ईंधन पर कर में छूट दी है फिर भी सात प्रकार के कर और शुल्क कीमतों को उच्च बनाए हुए हैं और आयल निगम घाटे में चल रहा है।

24 वैशाख, काठमांडू। काठमांडू से लगभग 4 हजार किलोमीटर दूर स्थित ईरान और उससे तीन गुना दूर अमेरिका के बीच तनाव के कारण विश्वव्यापी पेट्रोलियम आपूर्ति में व्यवधान आया है। पेट्रोलियम आयात में इस बाधा से सामान्यतः रसोई और परिवहन क्षेत्र प्रभावित होते हैं, लेकिन इस बार विवाद लंबा चलने के कारण पेयजल, औषधि, उद्योग, रोजगार तथा सड़क और आधारभूत संरचना निर्माण क्षेत्रों पर भी प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है।

ईंधन की कीमत चार बार बढ़ी, भारत से नेपाल में 59 रुपये अधिक

अमेरिका और ईरान के बीच हर्मुज जलमार्ग पर लगभग दो महीने लंबी नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 60 प्रतिशत बढ़ गई है। इसका प्रभाव नेपाल में भी पड़ा है।

डेढ़ महीने में नेपाल में चार बार डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं। डीजल की कीमत चैत 1 को 142 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 152 रुपये और चैत 11 को 167 रुपये हो गई थी। फिर यह 182 और 207 रुपये प्रति लीटर तक पहुंची। वैशाख 2 को डीजल की कीमत 30 रुपये बढ़कर 237 रुपये हो गई थी, जो अब कुछ कम होकर 225 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

पेट्रोल की कीमत भी संघर्ष से पहले 172 रुपये थी जो अब बढ़कर 219 रुपये पहुंच गई है, इसमें कुछ कटौती करते हुए 17 वैशाख को 2 रुपये प्रति लीटर कम किया गया है।

नेपाल में पेट्रोल की कीमत भारत के सीमा वाला बाजार सिंहावली में 97 रुपए (जिसका मूल्य 155 रुपये के बराबर है) जबकि नेपालगंज में 214 रुपये है। अर्थात नेपाल में भारत की तुलना में पेट्रोल 59 रुपये महंगा है। कीमत में यह भिन्नता मुख्य रूप से सरकार द्वारा लगाए गए विभिन्न करों और शुल्कों की वजह से है।

सरकार ने चैत के तीसरे सप्ताह में सीमा शुल्क और आधारभूत संरचना विकास कर में 50 प्रतिशत छूट दी है, फिर भी सात प्रकार के कर, शुल्क और सीमा शुल्क सेवा शुल्क मूल्य वृद्धि का कारण बने हुए हैं। इसकी वजह से आयल निगम घाटे में है।

नेपाल आयल निगम के महाप्रबंधक चंडिका प्रसाद भट्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य बढ़ा है परन्तु नेपाल में नियंत्रण का प्रयास कर निगम की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है।

अंदरूनी हवाई ईंधन और रसोई गैस की कीमतें भी अब बढ़ चुकी हैं। आंतरिक हवाई ईंधन की कीमत लगभग दोगुनी होकर 269 रुपये पहुंच चुकी है। खाना पकाने वाले एलपीजी की कीमत एक सिलेंडर पर 150 रुपये बढ़कर 2160 रुपये और आधे सिलेंडर की कीमत 1080 रुपये हो गई है।

इसी बीच, परिवहन व्यवसायी बढ़ती ईंधन कीमत को कारण बताते हुए सार्वजनिक परिवहन किराए बढ़ा चुके हैं। वैशाख 16 को दूसरी बार किराया बढ़ाया गया है। आर्थिक चुनौतियों ने व्यवसायी और उपभोक्ताओं के बीच संघर्ष बढ़ा दिया है।

ईरान में तनाव से गैस की कमी भी हो रही है। सरकार आधे सिलेंडर गैस बेच रही है, जबकि व्यवसायी पूरा सिलेंडर बिकवाने की मांग कर रहे हैं। इस कारण आधे सिलेंडर में गैस भरने से कई सिलेंडर बिक्री और गैस उपभोक्ताओं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही, जिससे टिकटक चलाना मुश्किल हो गया है।

औषधि उत्पादन पर भी ईंधन की कमी का असर पड़ा है। औषधि निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल के आयात में समस्या आ रही है। प्लास्टिक और कागज सामग्री के दाम बढ़ने से उत्पादन में संकट उत्पन्न हो गया है। कुछ औषधि उद्योगों के पास तीन से चार महीने का भंडार है, पर अब कमी शुरू हो गई है।

खाद्यान्न की कीमतें भी बहुत बढ़ चुकी हैं। मकई, गेहूं, दाल, तेल और चीनी के दाम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खाद्य पैकेजिंग और परिवहन लागत बढ़ने के कारण उपभोक्ता दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी खरीद रहे हैं।

पानी शोधन उद्योगों ने भी मूल्य वृद्धि का दबाव सरकार पर डाला है। बोतलबंद उद्योग संघ के महासचिव के अनुसार पानी की कीमत बढ़ाने के लिए समिति बनाकर अध्ययन कराया जा रहा है।

उद्योग क्षेत्रों में प्लास्टिक के कच्चे पदार्थ की कमी से उत्पादन में 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है। उपभोग की वस्तुओं के उत्पादन में समस्या के कारण लगभग 50 हजार रोजगार खोने का खतरा बढ़ गया है। फुटवियर समेत निर्यात उद्योग भी संकट का सामना कर रहे हैं।

सड़क और आधारभूत संरचना निर्माण में बिटुमिन, सीमेंट और डंडे की कीमत बढ़ने से काम धीमा हो गया है। मुख्य राजमार्गों पर कालापन कार्य ठप पड़ा है। उद्योगी तत्काल मूल्य समायोजन या निर्माण अवकाश देने का विकल्प चाहते हैं।

कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरक की कमी का खतरा भी दिख रहा है। नेपाल में प्रतिदिन 8 लाख मैट्रिक टन उर्वरक की जरूरत है, लेकिन आयात में पश्चिम एशियाई तनाव के कारण समस्या आ रही है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति और कीमतों में वृद्धि से खाद्य संकट बढ़ने की चेतावनी दी है। संघर्ष के कारण विश्वभर करीब 32 करोड़ लोग भुखमरी के खतरे में हैं। विशेषकर कमजोर व गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

ईरान में अब युद्धविराम हुआ है, पर तनाव कम नहीं हुआ है। हर्मुज जलमार्ग से पेट्रोलियम ढुलाई में बाधा से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसलिए नेपाल में ईंधन कमी और कीमतों में वृद्धि सामान्य बात है। लेकिन पेयजल और खाद्य पदार्थों की कीमतों में मनमानी वृद्धि तथा सरकारी संस्थानों की चुप्पी चिंताजनक विषय बन गई है।