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चावल में विषाक्त पदार्थों के अत्यधिक उपयोग के मामले को उपभोक्ता अदालत ने दर्ज करने से इनकार किया

उपभोक्ता अदालत ने चावल में विषाक्त पदार्थों के अत्यधिक उपयोग के आरोप वाली याचिका को दर्ज करने से इनकार किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुप्रसाद तिमिल्सिनाले विषाक्त पदार्थों के परीक्षण के बाद ही मापदंडों के अनुसार चावल की आयात एवं वितरण की अनुमति देने की मांग की थी। प्रोग्रेसिव सस्टेनेबल डेवलपर्स के अध्ययन में चावल में ८३ प्रतिशत विषाक्त पदार्थों के अवशेष पाए गए थे। २२ वैशाख, काठमांडू।

उपभोक्ता अदालत ने चावल सहित अन्य खाद्य सामग्रियों में विषाक्त पदार्थों के अत्यधिक उपयोग के आधार पर दायर याचिका को अस्वीकार कर दिया है। उपभोक्ता अदालत के स्रेस्तेदार शिशिर लामिछाने ने दो दिन पहले प्रकरण में याचिका दायर न करने का आदेश दिया था। यह याचिका दैनिक उपयोग में आने वाले चावल और अन्य खाद्य पदार्थों में विषाक्त पदार्थों के व्यापक उपयोग के आरोप पर आधारित थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुप्रसाद तिमिल्सिनाले उपभोक्ता हित संरक्षण मंच की ओर से यह याचिका दायर की थी। उन्होंने नेपाल में आयात किए जाने वाले चावल में विषाक्त पदार्थों के अत्यधिक उपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि विषाक्त पदार्थों के परीक्षण पूर्ण होने के बाद ही चावल के आयात एवं वितरण की अनुमति मिलनी चाहिए। पिछले वर्ष प्रोग्रेसिव सस्टेनेबल डेवलपर्स के अध्ययन में खाद्य सामग्रियों में विषाक्त पदार्थ पाए गए थे।

उपभोक्ता अदालत में प्रस्तुत आवेदन में उल्लेख है कि लंबे समय तक विषाक्त पदार्थों के सेवन से कैंसर जैसे गंभीर रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। यह मामला उपभोक्ता अदालत के गठन के बाद दर्ज की गई पहली सामूहिक याचिका भी है। सेवा प्रदाताओं की लापरवाही और नियामक संस्थाओं की कमजोर निगरानी के कारण चावल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहा है, इसलिए कार्रवाई की मांग की गई है।