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रासायनिक खाद कारखाना खोलने या जैविक खाद को प्राथमिकता देने पर चर्चा

२३ वैशाख, काठमाडौं। संसद में लगातार उठ रहा एक अहम मुद्दा है – किसानों को समय पर और आसानी से खाद प्राप्त नहीं हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए देश में खाद कारखाना खोलने का विषय राजनीतिक एजेंडा पर पिछले चार दशक से बना हुआ है। लेकिन अब तक कोई खाद कारखाना नहीं खुल सका है और किसानों को आसानी से खाद भी नहीं मिल पा रहा है। २१ फागुन को हुए चुनाव के बाद गठित प्रतिनिधि सभा के कृषि, सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति के अध्यक्ष के चुनाव के बाद हुई पहली बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया। सिंहदरबार स्थित समिति कक्ष में बुधवार को हुई बैठक में सांसदों ने रासायनिक खाद कारखाना खोलने या जैविक खाद को प्राथमिकता देने पर चर्चा की।

एमाले सांसद लक्ष्मीप्रसाद पोखरेल के अनुसार २०१५ साल से ही संसद में खाद की कमी का विषय उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में बजट में भी यह विषय आया है। राजनीतिक प्रतिबद्धता भी है, अब इसे निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा। सरकार को नेपाल में ही खाद कारखाना खोलने का निर्णय लेना चाहिए।’ उनके पूर्व वक्ता, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद राजीव खत्री ने कहा कि रासायनिक खाद की खरीद के साथ-साथ जैविक खाद के उत्पादन पर भी जोर देना चाहिए। उनके अनुसार यदि जैविक खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता तो किसानों को रासायनिक खाद के लिए रात-दिन जागरूक होने और पुलिस लाठी खाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

रास्वपाकी सांसद समिना मियाँ ने रासायनिक खाद के इस्तेमाल से उत्पादित कृषि उपज के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को बताते हुए सरकार से नागरिकों के स्वास्थ्य को नुकसान न पहुँचाने वाली कृषि उत्पादन नीति लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘सभी प्रकार की क्रांति हो गई, लेकिन कृषि क्रांति नहीं हुई।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जैविक खाद को प्राथमिकता देने से प्राकृतिसम्पन्न खाद मृदा की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है।’ रास्वपाकी सांसद पुनमकुमारी अग्रवाल ने उत्पादन वृद्धि के अलावा मृदा संरक्षण पर भी सरकार का ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

रास्वपाकी अन्य सांसद आशिका तामांग ने तत्काल रासायनिक खाद के वितरण को सुगम बनाने तथा दीर्घकालीन रूप से जैविक खाद को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा, ‘यह आश्चर्य की बात है कि देश में खाद कारखाना तक नहीं है। जब रासायनिक खाद न हो, तो हर पालिका में जैविक खाद के लिए कोल्ड स्टोरेज होना आवश्यक है।’ उन्होंने खाद वितरण में भेदभाव की भी सरकार को सूचित किया। उन्होंने कहा, ‘वास्तविक किसानों के पास एक बोरा खाद तक नहीं है, जबकि पहुंच रखने वाले व्यक्तियों के पास पाँच बोरा तक है।’

रासायनिक खाद कारखाना खोलने या विकल्प खोजने की बहस के दौरान रास्वपाकी सांसद सुजाता तामांग ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में इस विषय पर स्पष्ट नीति आने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, ‘खाद के विषय में आगामी बजट में क्या किया जा सकता है, इस पर चर्चा करनी चाहिए।’

सालों से जारी बहस में, एमाले सांसद लक्ष्मीप्रसाद पोखरेल ने कहा कि नेपाल में ही रासायनिक खाद कारखाना खोलने का सपना वर्षों से है लेकिन पूर्णता प्राप्त नहीं कर पाया है। कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय के अनुसार नेपाल में विं.सं. २००७ से रासायनिक खाद का उपयोग शुरू हुआ।

उससे पहले नेपाल पूरी तरह जैविक कृषि आधारित था। शुरुआत में भारत से अमोनियम सल्फेट लाया जाता था, और बाद में नेशनल ट्रेडिंग लिमिटेड के माध्यम से रूस से रासायनिक खाद का आयात आरंभ हुआ। उस समय रासायनिक खाद की खपत बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम और प्रचार-प्रसार किए गए। खाद के आयात को सुगम बनाने के लिए २०२२ साल में कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कृषि सामग्री कंपनी लिमिटेड की स्थापना हुई, जो आज तक सक्रिय है। २०३० साल से नेपाल सरकार रासायनिक खाद पर किसानों को अनुदान दे रही है। वर्तमान में नेपाल में मुख्यत: यूरिया, डीएपी, पोटाश, अमोनियम सल्फेट, सिंगल सुपर फॉस्फेट और अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट का आयात हो रहा है।

खाद खपत में वृद्धि के कारण, नेपाल में ही खाद कारखाना खोलने का विषय २०४० साल में सम्भाव्यता अध्ययन के तहत रखा गया था। यह अध्ययन जापान सहयोग नियोग (जाइका) द्वारा किया गया था लेकिन वह केवल अध्ययन तक सीमित रहा। आर्थिक वर्ष २०७३/०७४ में सरकार की नीति एवं कार्यक्रम में यह विषय शामिल किया गया था। तत्कालीन अर्थमंत्री विष्णु पौडेल ने नेपाल में रासायनिक खाद कारखाना खोलने की नीति बनाई थी। इसके बाद और अध्ययन हुए। तत्कालीन कृषि मंत्रालय ने निवेश बोर्ड को कारखाना संबंधी अध्ययन की जिम्मेवारी दी। भारत के डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ कर्नाटक के द्वारा की गई सम्भाव्यता अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि नेपाल में प्राकृतिक गैस के अलावा अन्य ऊर्जा स्रोतों से तत्काल खाद कारखाना चलाना असम्भव है।

२०८० जेठ में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ के भारत दौरे के दौरान उच्चस्तरीय बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। १८ जेठ २०८० को आयोजित संयुक्त पत्रकार सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, ‘नेपाल में रासायनिक खाद कारखाना खोलने में आवश्यक सहयोग के लिए भारत तैयार है।’ हालांकि, नेपाल में खाद कारखाना खोलने का मुद्दा ठोस रूप से आगे नहीं बढ़ पाया। उस समय राजनीतिक दल इस मुद्दे को लगातार उठा रहे थे।

गत २१ फागुन के चुनाव से पहले रास्वपाले १०० बिंदु वाली प्रतिज्ञापत्र जारी की थी, जिसमें बिंदु संख्या ४३ में खाद कारखाना खोलने का उल्लेख है। इसमें कहा गया है, ‘रासायनिक खाद और कृषि यांत्रिकीकरण में प्राथमिकता के साथ निवेश बढ़ाकर कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी करेंगे। कृषि उत्पादन वृद्धि की व्यवस्था नेपाल सरकार करेगी।’ रास्वपा ऊर्जा आधारित बड़े उद्योगों जैसे स्टील, सीमेंट, जड़ी-बूटी प्रसंस्करण, डेटा सर्वर स्टेशन और रासायनिक खाद उद्योग को आकर्षित करने का वादा करती रही है।

इन चुनावी वादों के साथ रास्वपा २१ फागुन के चुनाव में भारी बहुमत लेकर विजयी हुई। रास्वपा के नेतृत्व में शक्तिशाली एकल सरकार बनने के बाद भी संसद की समिति में खाद कारखाने के मुद्दे को पुनः उठाया गया है। इसके बावजूद, सरकार ने इस विषय पर अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।