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गरीबों के लिए जोखिम बढ़ा, कर्ज लेकर भी राहत देने का सुझाव सरकार को

एशियाई विकास बैंक ने पश्चिम एशिया के संघर्ष से गरीब और जोखिम में रहने वाली आबादी पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की बात कही है। एडीबी ने पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है। एडीबी ने सभी को अनुदान न देते हुए गरीबों को लक्षित नकद सहायता देने के लिए सरकारों को सलाह दी है। 24 वैशाख, समरकंद (उज़बेकिस्तान)।

पश्चिम एशिया में जारी संकट को दीर्घकालीन बताया गया है, जिसमें गरीब और जोखिम में रहने वाले परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, यह जानकारी एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने दी है। उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 59वें वार्षिक सम्मेलन में एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. अल्बर्ट एफ. पार्क ने कहा कि पश्चिम एशिया का युद्ध केवल अस्थायी झटका नहीं, बल्कि संघर्ष की लंबी श्रृंखला (स्थायी परिवर्तन) की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इससे ईंधन के साथ-साथ रासायनिक उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, जिससे गरीब और वंचित परिवार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

ऐसे हालात में सरकार को गरीब और जोखिम में रहने वाले परिवारों को लक्षित कर विशेष सहायता देनी चाहिए, उनके विचार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में ऐसी कोई राहत नहीं दी गई है और नेपाल में ईंधन का मूल्य दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा, “सबसे जोखिम में रहने वाले समूहों के लिए काम करना सरकार की जिम्मेदारी है। यह समय आवश्यक जरूरतमंदों को राहत देने में चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सबसे कमजोर आबादी को मदद के लिए सरकार को संसाधनों का उपयोग करना होगा।”

पश्चिम एशिया के संघर्ष की वजह से एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर में पुनः कटौती की गई है। एडीबी ने नए परिदृश्य के रूप में 2026 और 2027 दोनों वर्षों में ईंधन आपूर्ति में लगातार बाधाएं आने और कच्चे तेल के दाम 2026 में 96 डॉलर प्रति बैरल तथा 2027 में 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। इससे बाजार में ईंधन की कमी बढ़ी है और स्पॉट मूल्य तथा फ्यूचर्स मूल्य के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।

एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. पार्क के अनुसार, युद्धविराम होने के बावजूद होर्मुज जलसंधि से होने वाली आपूर्ति पहले जैसी सामान्य स्थिति में वापस नहीं आई है। खासतौर पर कच्चे तेल, एलपीजी, एलएनजी और कंटेनर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। एडीबी ने दक्षिण एशिया के लिए भी एक चिंताजनक स्थिति प्रस्तुत की है। दक्षिण एशियाई देशों द्वारा उपयोग किए जाने वाले रासायनिक उर्वरकों का 35 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता रहा है।

नेपाल में असार महीने से शुरू होने वाली धान की कटिबद्ध रोपाई के लिए आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं है। नेपाल ने भारत से रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, लेकिन भारत में भी समस्याएं होने के कारण इन उर्वरकों की उपलब्धता निश्चित नहीं है। इससे खाद्य सुरक्षा पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है।