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कञ्चनपुर में लगभग 60 हजार भूमिहीन और अव्यवस्थित बसोबासियों की समस्या

एआई की सहायता से तैयार की गई अव्यवस्थित बस्ती की तस्वीर। 26 वैशाख, काठमांडू। कञ्चनपुर में लगभग 60 हजार भूमिहीन दलित–सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासी हैं। भूमि समस्या समाधान आयोग के आंकड़ों के अनुसार कञ्चनपुर के नौ पालिकाओं में भूमिहीन दलित-सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासियों की संख्या 58,635 तक प्रमाणित हुई है। सरकार द्वारा विघटित आयोग के जिला अध्यक्ष नेत्रप्रकाश पन्त ने बताया कि 74,604 आवेदन में से 58,635 लोगों को प्रमाणित किया गया है। प्रमाणित लोगों में 2,729 भूमिहीन दलित, 2,400 भूमिहीन सुकुमवासी और 53,506 अव्यवस्थित बसोबासी शामिल हैं। पन्त के अनुसार आयोग में कृष्णपुर नगरपालिका से सबसे अधिक 17,693 आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि शुक्लाफाँटा नगरपालिका से 11,863 भूमिहीन दलित-सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासियों ने आयोग में आवेदन दिया है। सबसे कम आवेदन दोधारा–चाँदनी नगरपालिका से 3,997 दर्ज हुए हैं। आयोग के निवर्तमान अध्यक्ष पन्त ने बताया कि लालझाड़ी गाउँपालिका में सबसे कम भूमिहीन दलित और सुकुमवासी हैं। वहाँ 22 भूमिहीन दलित और 90 भूमिहीन सुकुमवासी सहित आवेदन दर्ज हुए हैं। साथ ही 4,469 अव्यवस्थित बसोबासियों ने भी आवेदन किया है। पुनर्वास नगरपालिका से सबसे अधिक भूमिहीन दलित और सुकुमवासियों ने आयोग में आवेदन दिया है। उन्होंने पुनर्वास से 771 भूमिहीन दलित और 867 सुकुमवासियों द्वारा भूमि के लिए आवेदन किए जाने की जानकारी दी। इस पालिका में 6,760 अव्यवस्थित बसोबासी पाए गए हैं।

  • भीमदत्त नगरपालिका: 992 भूमिहीन दलित, 991 भूमिहीन सुकुमवासी, 6,283 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 8,196
  • वेदकोट नगरपालिका: 308 भूमिहीन दलित, 205 भूमिहीन सुकुमवासी, 9,021 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 9,534
  • कृष्णपुर नगरपालिका: 105 भूमिहीन दलित, 1,110 भूमिहीन सुकुमवासी, 16,478 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 17,693
  • शुक्लाफाँटा नगरपालिका: 193 भूमिहीन दलित, 154 भूमिहीन सुकुमवासी, 11,489 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 11,836
  • दोधारा चांदनी नगरपालिका: 176 भूमिहीन दलित, 260 भूमिहीन सुकुमवासी, 3,561 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 3,997
  • बेलौरी नगरपालिका: 118 भूमिहीन दलित, 188 भूमिहीन सुकुमवासी, 5,300 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 5,606
  • पुनर्वास नगरपालिका: 771 भूमिहीन दलित, 875 भूमिहीन सुकुमवासी, 6,760 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 8,406
  • बेलडाँडी गाउँपालिका: 157 भूमिहीन दलित, 195 भूमिहीन सुकुमवासी, 4,403 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 4,755
  • लालझाड़ी गाउँपालिका: 22 भूमिहीन दलित, 90 भूमिहीन सुकुमवासी, 4,469 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 4,581
  • कुल जम्मा: 2,772 भूमिहीन दलित, 4,068 भूमिहीन सुकुमवासी, 67,764 अव्यवस्थित बसोबासी, कुल 74,604

आयोग के निवर्तमान अध्यक्ष पन्त ने बताया कि भूमि वर्गीकरण और हस्तांतरण में अस्पष्टता, वन क्षेत्र से संबंधित कानूनी जटिलताएं भूमिहीन दलित–सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासियों को भूमि प्रमाणपत्र वितरण में नीतिगत और कानूनी चुनौती देती हैं। उन्होंने कहा कि बहु निकायों के बीच समन्वय का अभाव, प्रक्रियाओं की जटिलता और समय की भारी मांग प्रशासनिक चुनौतियां हैं। पन्त का कहना है कि आयोग को राजनीतिक परिवर्तन से प्रभावित न किए जाने वाला ढांचा स्थापित कर, निश्चित कार्यकाल और निरंतरता पसंद कर भूमिसम्बंधी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

कञ्चनपुर में भूमिहीन दलित और सुकुमवासी को भूमि उपलब्ध कराने तथा अव्यवस्थित बसोबासियों के प्रबंधन में अपेक्षित परिणाम हासिल न करने का मुख्य कारण केवल संसाधनों की कमी ही नहीं, बल्कि सदस्य सचिव की निष्क्रियता, प्रशासनिक व तकनीकी सहयोग की कमी, और नीतिगत तथा कानूनी उलझनें भी हैं। उन्होंने कहा, ‘उत्तरदायित्व से भरी कर्मचारी प्रणाली, स्पष्ट नीति और प्रभावी कार्यान्वयन तंत्र का अभाव भूमि समस्या का दीर्घकालीन समाधान असंभव बनाता है। यदि ये सुधार हों तो दीर्घकालीन समाधान सम्भव है।’

उन्होने बताया कि 15 महीनों के कार्यकाल में वे लगभग 45 दिन ही प्रभावी कार्य कर पाए लेकिन आयोग ने 96 लालपुर्जा वितरण, 496 प्रमाणपत्र और नकाशा कार्य पूरा किया। उन्होंने कहा, ‘हमने सात स्थानीय तहों में पहचान और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी की, लेकिन शेष दो स्थानीय तहों में भदौ 23-24 की आगजनी के कारण दूसरे बार कार्य करना पड़ा। अधिकांश वड़ों में काम पूरा हो चुका था, कुछ में जारी था।’

पन्त का विश्वास है कि यदि स्थिर और अवरोध रहित वातावरण प्राप्त हो तो आयोग मासिक 5-7 हजार लालपुर्जा वितरण करने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा, ‘लेकिन भदौ 23 से निरंतर उत्पन्न हुए अवरोधों ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया, यह सबको ज्ञात है।’