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‘कालापानी’ की स्थिति और धारणा: ‘तीन गाँव भारत में हैं, लिम्पियाधुरा की कहानी क्या होगी?’

छाङ्गरू

तस्बिर स्रोत, vyansmun.gov.np

काठमांडू में कहीं-कहीं कालापानी विषय काफी विवादास्पद होता जा रहा है। बहसें व्यापक हैं। लेकिन दार्चुला के व्यास गाउँपालिका के वडा नं १ के अंतर्गत आने वाले कालापानी क्षेत्र के स्थानीय लोगों को ऐसी बहसों पर ज्यादा भरोसा नहीं है।

संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित होने के बाद लिम्पियाधुरा भी नेपाल के नक्शे में सम्मिलित किया गया है।

गाउँपालिका के उपाध्यक्ष विनोदसिंह कुँवर के अनुसार गाँवपालिका वही नक्शा ‘प्रयोग’ करती है, उन्होंने क्षेत्र का अलग कोई नक्शा नहीं बनाया है।

“हमारे वडा नं १ के तीन गांव कुटी, नावी, गुन्जी अभी भी भारत में हैं,” नक्शे के संदर्भ में उपाध्यक्ष कुँवर कहते हैं, “छाङ्गरू और तिङ्कर दो गांव नेपाल में ही हैं।”

वे दोनों गांव के निवासी सर्दियों के मौसम में छह महीने तक सदरमुकाम खलंग में रहते हैं। सदरमुकाम आने-जाने के लिए उनके पास भारतीय भूभाग का उपयोग के अलावा कोई विकल्प नहीं है।