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पूर्व गृहमंत्री लेखक एवं सचिव दुवाड़ी पर मामला न चलने का फैसला

समाचार समीक्षा के बाद प्रस्तुत। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अध्यागमन भ्रष्टाचार मामले में तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक और गृहसचिव गोकर्णमणि दुवाड़ी के खिलाफ मामला न चलने के लिए अख्तियार ने फाइल बंद कर दी है। अख्तियार ने सहसचिव तिर्थराज भट्टराई के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला चलाया, लेकिन लेखक और दुवाड़ी के विरुद्ध कोई सबूत न मिलने की जानकारी दी है। २०७४ साल में विशेष अदालत ने विभिन्न घटनाक्रमों में अलग-अलग आरोपपत्र लाने के निर्देश दिए थे, जिसके आधार पर अख्तियार ने कुछ मामलों को समाप्त किया है। २७ वैशाख, काठमांडू। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अध्यागमन भ्रष्टाचार प्रकरण में नामजद तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक और गृहसचिव गोकर्णमणि दुवाड़ी समेत अन्य के खिलाफ मामला न चलने का निर्णय लिया गया है। अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने जांच के दौरान बताया कि उनके खिलाफ “कोई भी प्रमाण नहीं मिला” और विशेष अदालत को सूचनापत्र भेजने के बाद फाइल बंद की गई। अख्तियार के एक जांच अधिकारी ने कहा, “तत्कालीन प्रमुख अध्यागमन अधिकारी तिर्थराज भट्टराई के खिलाफ जितने भी मामले दर्ज हुए, वे वहीं सीमित हैं। उससे ऊपर जाकर जांच में कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए मामला न चलने के निष्कर्ष के साथ जांच पूरी हुई।” ७ जेठ २०८२ को अध्यागमन सहसचिव तिर्थराज भट्टराई की गिरफ्तारी के बाद वीजिट वीजा प्रकरण सामने आया था। विमानस्थल में कर्मचारी बनवाकर लाभ उठाने के आरोप में तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक, गृहसचिव गोकर्णमणि दुवाड़ी, सहसचिव (जो बाद में काठमांडू के प्रमुख जिला अधिकारी बने) छविराज रिजाल सहित कई नामजद थे। अख्तियार ने २१ मंसिर २०८२ को सहसचिव तिर्थराज भट्टराई समेत सात अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। उस समय विशेष अदालत को भेजे गए विवरण में अख्तियार ने पूर्व गृहमंत्री लेखक समेत अन्य के खिलाफ जांच चल रही होने की जानकारी दी थी। अख्तियार ने यह आरोप लगाया था कि विभिन्न देशों में नेपाली कामगारों को वीजिट वीजा पर भेजते समय रिश्वत लेने का नेटवर्क बनाया गया था। इस मामले में तिर्थराज भट्टराई तथा अन्य सात अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अभियोग चलाया गया था जिसमें तत्कालीन गृहमंत्री लेखक, गृहसचिव दुवाड़ी, सहसचिव छविलाल रिजाल समेत वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, जैसा कि अदालत को सौंपे गए दस्तावेज़ों में उल्लेख है। विशेष अदालत ने २०७४ में विभिन्न घटनाक्रमों और संबंधित व्यक्तियों के आधार पर अलग-अलग आरोपपत्र लाने का निर्देश दिया था। उसी निर्देश के तहत अख्तियार ने विभिन्न मामलों को समाप्त कर अदालत में आरोपपत्र पेश किये। अख्तियार द्वारा भेजे गए दस्तावेज़ों के अनुसार त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के तत्कालीन प्रमुख अध्यागमन अधिकारी तिर्थराज भट्टराई की डायरी बरामद हुई थी और नेपाल टेलिकॉम से उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण भी किया गया था। सीडीआर के विश्लेषण से तत्कालीन गृहमंत्री के निजी सचिव बद्री तिवारी और स्वकीय सचिव जनक भट्ट से असामान्य संबंध दिखे थे। अख्तियार ने कहा था कि इनके बीच गैरकानूनी धन लेनदेन हो सकता है। एक दस्तावेज़ में अख्तियार ने विशेष अदालत को बताया था, “(उल्लिखित) विभिन्न विषय, घटना, समय और संलग्न प्रतिवादी के आधार पर अलग-अलग जांच चल रही है।” अख्तियार के अनौपचारिक स्रोत के अनुसार जांच आगे बढ़ाने पर गृहमंत्री लेखक, गृहसचिव दुवाड़ी समेत ने सहसचिव तिर्थराज भट्टराई से कोई लाभ (रिश्वत) लेने के सबूत नहीं पाए जाने पर उनके विरुद्ध मामला नहीं चलाने का निर्णय लिया गया है। स्रोत ने कहा, “कोई प्रमाण नहीं मिला, जब प्रमाण नहीं हो तो मामला कैसे चलाएंगे?”