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लोक संगीत में अश्लीलता बढ़ने पर राष्ट्रीय लोक संचारकर्मी नेपाल ने की कड़ाई से नियम बनाने की मांग

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • राष्ट्रीय लोक संचारकर्मी नेपाल ने लोक कला और दोहोरी गीतों में बढ़ती अश्लीलता और विकृति पर गहरा विरोध जताया है।
  • संस्था ने विवादित कलाकारों और प्रस्तुतियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की सरकार से मांग की है।
  • लोक संचारकर्मी नेपाल ने कलाकारों से सामाजिक मर्यादा और जिम्मेदारी के साथ सांस्कृतिक रुप से शिष्ट सामग्री प्रस्तुत करने का आग्रह किया है।

28 वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रीय लोक संचारकर्मी नेपाल ने नेपाली लोक कला, संस्कृति तथा दोहोरी गीत क्षेत्र में हाल के दिनों में अश्लीलता और विकृति की वृद्धि को लेकर गहरी आपत्ति व्यक्त की है।

सोमवार को संस्था के अध्यक्ष चन्द्रमणि गौतम की अध्यक्षता में हुई आकस्मिक बैठक में सामाजिक मर्यादा का उल्लंघन करने वाले कलाकारों और सामग्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सरकार से मांग की गई।

बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया कि खासतौर पर डिजिटल माध्यम और मेलों में दिखाई जा रही प्रस्तुतियाँ नेपाली लोक संस्कृति की मौलिकता और गरिमा को धूमिल कर रही हैं।

विवादित कलाकारों और प्रस्तुतियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग करते हुए संस्था ने हाल के घटनाओं का उल्लेख करते हुए संबंधित पक्षों की जांच कराने का आग्रह भी किया है।

प्रकाश अधिकारी के यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित दोहोरी में प्रकाश अधिकारी और कोपिला छिनाल द्वारा उपयोग किए गए शब्द, हाव-भाव और प्रस्तुति से दोहोरी की मर्म और सभ्यता को आघात पहुंचा है, ऐसा संस्था ने माना है।

संस्था का मानना है कि उक्त सामग्री मात्र सस्ती लोकप्रियता और आय के लिए बनाई गई है।

इसके साथ ही, लोक संचारकर्मी नेपाल ने गुल्मी के महोत्सव में गायिका ज्योति मगर द्वारा मंच पर किए गए कुछ कृत्यों को सामाजिक मर्यादाओं के विपरीत और अत्यंत अस्वीकार्य बताया है। इसी तरह, एक धार्मिक स्थल पर मॉडलरिया खड्का के अशिष्ट नृत्य ने धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था को चोट पहुंचाई है, और इसके लिए भी संस्था ने आपत्ति जताई है।

राष्ट्रीय लोक संचारकर्मी नेपाल ने इन गतिविधियों में संलग्न कलाकारों के खिलाफ प्रचलित कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस पत्र को गृह मंत्रालय, संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय, तथा साइबर ब्यूरो को भी भेजा गया है।

संस्था के सचिव कमल सरगम द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘सभी लोक और दोहोरी कलाकारों, सृजकों तथा प्रस्तुतकर्ताओं से आग्रह है कि वे अपनी रचनाओं के प्रति जिम्मेदार बनें और सामाजिक मर्यादा का सम्मान करते हुए केवल सुसंस्कृत सामग्री ही सार्वजनिक करें।’