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बजट में अस्वाभाविक अंक रखने की प्रवृत्ति है, इसे सुधारेंगे : अर्थमंत्री

समाचार संक्षेप

समीक्षा कर तैयार।

  • अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा कि बजट में अस्वाभाविक अंक रखने की प्रवृत्ति है, जिसे सुधारेंगे।
  • सरकार ने साढ़े 19 खरब रुपये का बजट आवंटित किया है, लेकिन खर्च 16 खरब रुपये के आसपास ही रह पाएगा।
  • चालू आर्थिक वर्ष में पूंजीगत खर्च अब तक सबसे अधिक होने का अनुमान है, स्रोत जुटाने में चुनौतियां हैं।

29 वैशाख, Kathmandu। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने बजट में अस्वाभाविक आंकड़े अंकित करने की प्रवृत्ति को स्वीकार करते हुए कहा है कि इसे सुधारा जाएगा। उन्होंने प्रतिनिधि सभा की अर्थ समिति की बैठक में बताया कि वर्तमान सरकार ने साढ़े 19 खरब रुपये से अधिक बजट आवंटित किया है, परन्तु खर्च इसे 16 खरब रुपये तक सीमित रखने की स्थिति है।

उन्होंने कहा कि बजट निर्माण की प्रक्रिया में पहले से ही अस्वाभाविक अंक रखने की प्रवृत्ति ने यह स्थिति उत्पन्न की है। खासकर पूंजीगत खर्च लगभग 2 खरब रुपये के आसपास ही सीमित रहेगा, जिससे सरकार के आर्थिक लक्ष्यों की पूर्ति नहीं हो पाएगी। इसलिए अर्थमंत्री के अनुसार, अर्थव्यवस्था के विकास के लिए निजी क्षेत्र के निवेश की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष लगभग 18 खरब 90 अरब रुपये का बजट सीमा के भीतर आवंटित किया गया है, लेकिन संसाधन जुटाने में काफी चुनौती है। राजस्व से लगभग 13 खरब रुपये ही संग्रहित हो सकेंगे और बची हुई 7 खरब रुपये से अधिक राशि की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती है।

चालू आर्थिक वर्ष के बजट व्यय को बढ़ाने के लिए आपातकालीन स्थिति में काम किया जा रहा है। उनका अनुमान है कि असार के अंत तक पूंजीगत व्यय अब तक का सबसे अधिक होगा।