
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन दौरे के लिए बीजिंग के लिए रवाना हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का चीन दौरा लगभग एक दशक बाद हो रहा है। इस दौरे को विश्व के दो सबसे बड़े अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। ट्रम्प के साथ-साथ अमेरिका की बड़ी कंपनियों के कार्यकारी भी बीजिंग पहुंच रहे हैं। बोइंग, सिटी ग्रुप और क्वालकॉम के कार्यकारी चीनी कंपनियों के साथ संभावित समझौतों के लिए जा रहे हैं। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापार युद्ध को रोकने की स्थिति में यह दौरा एक नया परीक्षण भी माना जा रहा है।
सन् 2018 में ट्रम्प ने दुनिया भर के मित्रों से लेकर विरोधी राष्ट्रों तक सभी पर आयात शुल्क लगाया था। इस नीति ने अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध में सबसे बड़ा प्रभाव डाला था। अमेरिकी आयात शुल्क के जवाब में चीन ने भी शुल्क लगाए जिससे 100 प्रतिशत तक कर वृद्धि हुई। अक्टूबर में ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच दक्षिण कोरिया में हुई आमने-सामने की बैठक के बाद इन शुल्कों को रोक दिया गया था। तथापि, दोनों पक्षों की धमकियां अभी भी कायम हैं।
ट्रम्प ने सन् 2016 के चुनाव जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार को न्यायोचित बनाने और उत्पादन क्षेत्र में नौकरियां स्वदेश वापस लाने का वादा किया था। सन् 2018 में उन्होंने चीन से होने वाले आयात पर 250 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर का कर लगाया था जिसे कई लोग व्यापार युद्ध की शुरुआत मानते हैं। जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय की नीति शोधकर्ता निंग लेंग के अनुसार, “यह पहली बार था जब उन्होंने गंभीरता से ट्रम्प को चुनौती दी।” ट्रम्प के करों से अमेरिकी खरीदारों ने विकल्प तलाशे और चीन के मजदूरों के लिए जोखिम पैदा हुआ।
ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान 2025 में उन्होंने करों को दोगुना करते हुए चीन से आयातित सामग्री पर 20 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया। उसके बाद उन्होंने घोषित ‘मुक्ति दिवस’ पर 35 प्रतिशत शुल्क लगाकर चीन से आयातित सामग्री पर विश्व का सबसे ज्यादा कर लगाया। हालांकि अत्याधुनिक चिप्स संबंधी सामानों पर यह कर लागू नहीं हुआ। इस बार की बैठक में चीन की स्थिति मजबूत है और अमेरिका के साथ व्यापार कमजोर होने के कारण चीन ने विश्व के नए व्यापारिक साझेदारों की सहायता से अब तक सबसे अधिक निर्यात हासिल किया है।





