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नेतृत्व के लिए सिटौला और केसी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रिय महासंघ के सातवें महाधिवेशन में 387 संस्थाओं के 1663 प्रतिनिधि नए नेतृत्व के चयन के लिए पोखरा में एकत्रित हुए हैं।
  • वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुण्यप्रसाद सिटौला और हरिप्रसाद शरण के बीच अध्यक्ष पद के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा जारी है, जिसमें सिटौला ने ऑनलाइन टिकटिंग, जीपीएस सिस्टम और कैशलेस प्रणाली को प्राथमिकता दी है।
  • महासंघ के 86 सदस्यीय केंद्रीय कार्यसमिति के विभिन्न पदों के लिए मतदान जारी है, जिसमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष सहित कई पदों पर कई उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

29 वैशाख, पोखरा । नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रिय महासंघ का चुनावी मुकाबला पोखरा में जारी है। महासंघ के नए नेतृत्व के चयन के लिए 387 संस्थाओं के 1663 प्रतिनिधि पोखरा में जुटे हैं।

27 वैशाख से शुरू हुए सातवें महाधिवेशन के माध्यम से पूरे देश के यातायात व्यवसायी से जुड़े प्रालियों, कंपनियों, समितियों तथा संगठनों के छाता संगठन महासंघ का नया नेतृत्व चुना जाएगा।

नेतृत्व के लिए वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुण्यप्रसाद सिटौला (सरोज) और वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिप्रसाद शरण के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। मंगलवार को कांग्रेस, एमाले और माओवादी ने सिटौला के पक्ष में सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन एक समूह के विरोध के कारण प्रयास असफल रहा।

अध्यक्ष पद के लिए पूर्व अध्यक्ष विजय स्वाँर और योगेन्द्र कर्मचार्य ने अलग-अलग उम्मेदवारी घोषित करने की योजना बनाई थी। लेकिन कांग्रेस से सिटौला का नाम सामने आने के बाद एक समूह असंतुष्ट हो गया और तीन पुराने दलों को एक मंच पर लाने के प्रयास सफल नहीं हो पाए।

सिटौला और हरिशरण के साथ-साथ अध्यक्ष पद के लिए बलेफी गाउँपालिका के पूर्व अध्यक्ष और अरनिको यातायात प्रालि के अध्यक्ष केदार क्षेत्री तथा सानो काजी प्रजापति ने भी अपनी उम्मीदवारी जताई थी। लेकिन मुख्य मुकाबला सिटौला और केसी के बीच ही होने की संभावना है।

पूर्व सरकार के निकट रहकर कई कार्यकारी पदों पर काम कर चुके सिटौला ने अपने अतीत के कार्यों और नेतृत्व क्षमता के कारण खुद को पसंदीदा उम्मीदवार मानते हैं।

सिटौला ने पुराने कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से तकनीकी रूप से उन्नत यातायात क्षेत्र बनाने की योजना बताई है।

उन्होंने कहा, ‘ऑनलाइन टिकटिंग, जीपीएस सिस्टम, और कैशलेस प्रणाली — ये तीन एजेंडाएं मेरी प्राथमिकता हैं। मजदूर से लेकर व्यवसायी तक सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा भी मेरी प्राथमिकताओं में शामिल है।’

सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान होते हुए भी उसका प्रभावी क्रियान्वयन न हो पाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका नेतृत्व इस दिशा में काम करेगा।

सिटौला ने बीमा नीति में बड़े मुद्दों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना बीमा प्रणाली क्षतिग्रस्त है और दुर्घटना न्यूनीकरण के लिए यदि राज्य ने बीमा को व्यवस्थित नहीं किया तो काम नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा कि वे बीमा नीति को लाने और उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सक्रिय रहेंगे। दुर्घटना के बाद बीमा कंपनियों के साथ अक्सर झंझट होता है।

सिटौला ने कहा, ‘मैं बीमा कंपनियों के अत्याचारों को रोकूंगा। दुर्घटना के बाद मृतक परिवार को 5 लाख और घायलों को 3 लाख रुपए ही मिल पाता है। घायलों के इलाज में करोड़ों खर्च होते हैं। दुर्घटना में मृतक को पांच लाख दिया जाता है, जबकि सड़क पर 20 लाख की मांग होती है। ऐसे असंगतियों को मैं दूर कराऊंगा।’

सड़क प्रबंधन और आधारभूत संरचना को व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाने के लिए उन्होंने अपनी उम्मीदवारी बताई।

लंबे अनुभव के बावजूद कार्यकारी पदों पर काम करने वालों ने निराश किया है, इसलिए नया नेतृत्व इस व्यवस्था को तोड़ने के लिए काम करेगा, यह कहकर केसी ने अपनी उम्मीदवारी का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि महासंघ में वे लंबे समय से जुड़े हैं लेकिन कार्यकारी भूमिका में नहीं रहे, और कार्यसमिति के काम करने के ढांचे को करीब से देखा है।

केसी ने कहा कि सार्वजनिक यातायात क्षेत्र में बीमा से जुड़ी बड़ी समस्या है और उन्होंने इसे सुधारने की योजना बनाई है। वे वर्तमान सरकार के साथ सहयोग करके यातायात क्षेत्र की समस्याओं को हल करने का प्रयास कर रहे हैं।

महासंघ की सरकार से समन्वय न हो पाने के कारण पुराने कानूनों में ही कार्य करना पड़ा और इसलिए यातायात क्षेत्र की समस्याएं जस की तस बनीं। उन्होंने दुर्घटना में कमी, आयात और रूट परमिट नीतियों में सुधार के लिए प्रतिबद्धता जताई।

केसी ने राजस्थानिकट के समर्थन के साथ पिछली चुनाव की नारा दोहराते हुए ‘चुपचाप, हरिशरण केसी (हुस) को छाप’ का नारा दिया।

महासंघ में 86 सदस्यीय केंद्रीय कार्यसमिति होगी, जिसमें से 84 पदों के लिए ही चुनाव होगा, चुनाव अधिकारी योगेन्द्र केसी ने जानकारी दी।

अध्यक्ष पद पर सिटौला और केसी के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अन्य पदों पर भी मतदान जारी है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष के लिए 3 पदों पर 6 उम्मीदवार हैं।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए पोखरा से 2 उम्मीदवार हैं। पोखरा के ऐनकुमार साई, केदार पौड़े के अलावा गोकर्णप्रसाद पराजुली, सानुकाजी प्रजापति, सुनील कुँवर और राजेन्द्र रिजाल भी इस पद के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

महासचिव पद के लिए डेकनाथ गौतम, शम्भुप्रसाद रिजाल और ज्ञानेन्द्र श्रेष्ठ के बीच मुकाबला है। कोषाध्यक्ष पद के लिए किरणकुमार खड्का, राजेन्द्र आचार्य और राजेशकुमार श्रेष्ठ उम्मीदवार हैं।

7 उपाध्यक्ष पदों के लिए 13, सचिव पद के लिए 6 तथा उपमहासचिव पद के लिए 5 उम्मीदवार हैं। नया नेतृत्व गठित करने के लिए पोखरा इवेंट सेंटर में रामलक्ष्मण इलेक्ट्रॉनिक मशीन से मतदान किया जा रहा है।