
फिफा विश्वकप २०२६ के समूह ‘ए’ में मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और चेक गणराज्य शामिल हैं, जिन्होंने इसे अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक समूह बना दिया है। मेक्सिको ने आयोजक के रूप में स्वतः स्थान प्राप्त किया है और यह टीम १८वीं बार विश्वकप खेल रही है। चेक गणराज्य २० वर्षों बाद विश्वकप में वापसी कर रहा है और समूह का डार्क हॉर्स माना जाता है। ३० वैशाख, काठमांडू। विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच फिफा विश्वकप २०२६ के नजदीक आते ही समूह चरण की प्रतियोगिताओं में विशेष रुचि देखी जा रही है। समूह ‘ए’ में मेक्सिको के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और चेक गणराज्य की उपस्थिति है। ये चारों टीमें अब तक विश्वकप की ट्रॉफी जीतने में सफल नहीं हुई हैं। अनुभव, युवा ऊर्जा और अलग फुटबॉल शैली ने इस समूह को बेहद प्रतिस्पर्धात्मक बना दिया है।
मेक्सिको ने होस्ट राष्ट्र के रूप में स्वतः विश्वकप में स्थान सुरक्षित किया है। घरेलू मैदान और समर्थकों के विशाल समर्थन से यह टीम की सबसे बड़ी ताकत होगी। उत्तर अमेरिका के फुटबॉल में हमेशा से मजबूत मानी जाने वाली मेक्सिको टीम में अनुभव और गति दोनों की भरमार है। यह टीम १८वीं बार विश्वकप में हिस्सा ले रही है। १९७० और १९८६ में क्वार्टरफाइनल तक पहुँच चुकी मेक्सिको इस बार घरेलू मैदान पर समान उपलब्धि दोहराने का लक्ष्य लेकर उतरेगा।
दक्षिण अफ्रीका ने अफ्रीकी क्वालिफायर में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वकप का स्थान सुरक्षित किया है। यह टीम २०१० के बाद पहली बार विश्वकप में खेल रही है। लंबे समय बाद विश्वकप में वापसी कर रही इस टीम में उत्साह बहुत ऊँचा है। शारीरिक रूप से मजबूत और काउंटर अटैक में प्रभावी दक्षिण अफ्रीका समूह में चुनौती पेश कर सकता है। यह दक्षिण अफ्रीका की चौथी विश्वकप भागीदारी होगी।
दक्षिण कोरिया ने एशियाई क्वालिफायर में समूह विजेता बनकर लगातार एक और विश्वकप यात्रा तय की है। अनुशासन, तेज खेलशैली और यूरोपीय क्लबों में खेलने वाले अनुभवी खिलाड़ी इस टीम की मुख्य ताकत हैं। चेक गणराज्य ने यूरोपीय प्लेऑफ़ पार करते हुए २० वर्षों बाद विश्वकप में वापसी की है। संगठित और रणनीतिक फुटबॉल खेलने वाली चेक टीम समूह की ‘डार्क हॉर्स’ मानी जाती है।




