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बैंक ब्याज दर से अधिक महंगाई चिंता का विषय

तरकारी बेचने वाली एक व्यापारी

महंगाई की दर (मुद्रास्फीति) से कम बैंकों द्वारा दिये जाने वाले ब्याज दर के कारण उत्पन्न होने वाले प्रभावों को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है।

नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा हाल ही में प्रकाशित किए गए “देश की वर्तमान आर्थिक तथा वित्तीय स्थिति” के अनुसार 2082 साल के चैत्र माह में वार्षिक सूचकांक आधारित उपभोक्ता मुद्रास्फीति (महँगाई दर) 4.47 प्रतिशत रही है।

इसी तरह, 2082 चैत्र के अंत तक वाणिज्यिक बैंकों के निक्षेप पर औसत भारित ब्याज दर 3.40 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इस प्रकार जब बचतकर्ताओं को बैंक में जमा राशि पर दिया जाने वाला ब्याज दर महंगाई दर से कम होता है, तो धीरे-धीरे “डिससेविंग” की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इस बात को लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं।

डिससेविंग का अर्थ होता है कि व्यक्ति महंगाई के कारण अपनी आय से खर्च नहीं निकाल पाता, जिसके चलते वह बचत राशि निकाल कर खर्च करने लगता है, जिसे अर्थशास्त्रियों द्वारा इस प्रकार परिभाषित किया गया है।