
समाचार सारांश
समीक्षा किया गया।
- नेपाल सरकार को खाद्य स्वच्छता के लिए विकेन्द्रीकृत निरीक्षण प्रणाली अपनाने की सुझाव दी गई है।
- सरकार को जोखिम आधारित खाद्य निरीक्षण प्रणाली लागू कर जनस्वास्थ्य में उच्च जोखिम वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- आयातित खाद्य पदार्थों के प्रभावी परीक्षण और ट्रेसिबिलिटी प्रणाली विकसित कर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
मेरे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर, मैं नेपाल सरकार को खाद्य स्वच्छता सुनिश्चित करने हेतु अपनाने योग्य कुछ नीतिगत उपाय प्रस्तुत करना चाहूंगा।
खाद्य तभी ‘खाने योग्य’ कहलाता है जब वह स्वच्छ हो; अन्यथा वही खाद्य विषाणु जैसा बन सकता है। एक व्यक्ति दिनभर में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों या उनके मिश्रण का सेवन करता है। यदि किसी कारणवश खाद्य पदार्थ दूषित हो जाते हैं, तो इसका गंभीर प्रभाव जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है। नीति निर्माता स्तर पर इस विषय को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
दूसरे दृष्टिकोण से देखा जाए तो, राज्य द्वारा स्वच्छ खाद्य सुनिश्चित करना मतलब नागरिकों को अस्वस्थ भोजन से होने वाले रोगों और अस्पताल के खर्चों से बचाना है। साथ ही सुरक्षित और गुणवत्तायुक्त खाद्य स्वस्थ, सक्षम और उत्पादक जनशक्ति के निर्माण में मदद करता है। खाद्य स्वच्छता बेहद महत्वपूर्ण होने के बावजूद, नेपाल जैसे अल्पविकसित देशों में इसे अपेक्षित राष्ट्रीय प्राथमिकता नहीं मिल पाती है। कई बार दिखावटी निगरानी या केवल लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए कुछ गतिविधियाँ की जाती हैं।
नेपाल जैसे उच्च पर्यटन संभावनाओं वाले देश में सीमित संसाधनों के भीतर प्रभावी नीतिगत सुधार करने से उच्च स्तरीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली स्थापित की जा सकती है। इससे आंतरिक एवं बाह्य पर्यटन के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। विदेशी पर्यटक नेपाल के ‘स्ट्रिट फूड’ से लेकर पारंपरिक भोजन तक निःसंकोच सेवन कर सकें ऐसा वातावरण बनाना आवश्यक है।
सबसे पहले, खाद्य निरीक्षण प्रणाली विकेन्द्रीकृत होनी चाहिए। विकेंद्रीकरण केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि कार्यगत आधार पर भी आवश्यक है। केंद्रीय सरकार के अधीन खाद्य प्रौद्योगिकी एवं गुणवत्ता नियंत्रण विभाग स्थानीय होटल, रेस्तरां और छोटे उद्योगों का सीधे निरीक्षण करने के बजाय स्थानीय या प्रदेश सरकारों को इन व्यवसायों का नियमन और प्रबंधन करने देना अधिक प्रभावी होगा। केंद्रीय सरकार को बड़े खाद्य उद्योगों, निर्यात आधारित उत्पादन, आयात प्रबंधन और जनस्वास्थ्य के लिए उच्च जोखिम वाले खाद्य पदार्थों के निरीक्षण पर केंद्रित होना चाहिए। इससे विभाग की सक्रियता बढ़ेगी।
सीमित संसाधनों वाले देश में अनुसंधान एवं अध्ययन को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जाए तो कम लागत में अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, देश भर के खाद्य प्रौद्योगिकी शिक्षण संस्थानों के सैकड़ों विद्यार्थी जो हर साल करते हैं, यदि वे सरकारी सहयोग पाएं तो उनकी शोध केवल कागज तक सीमित नहीं रहकर राष्ट्रीय खाद्य स्वच्छता और खाद्य उद्योग के लिए उपयोगी बन सकती है।
खाद्य स्वच्छता संबंधी विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को प्रभावी समन्वय के तहत लाना आवश्यक है।
साथ ही उद्योगों को केवल दंड और जुर्माने के नजरिए से न देखकर, समस्या समाधान में सहयोग का वातावरण बनाना चाहिए। इससे उद्योगपति अपनी समस्याएँ खुले रूप से सरकार या अनुसंधान संस्थानों के साथ साझा करने के लिए तैयार होंगे।
सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों को एक साथ प्रभावी नियंत्रण करना संभव नहीं है। इसलिए सरकार को जनस्वास्थ्य के लिए उच्च जोखिम वाले खाद्य, जल्दी खराब होने वाले और संवेदनशील समूहों द्वारा उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों पर प्राथमिकता देनी चाहिए। जोखिम आधारित खाद्य निरीक्षण प्रणाली ही आधुनिक खाद्य सुरक्षा की मूल नींव है।
कुछ उद्योगी और व्यावसायिक संगठन अपने सदस्यों के उद्योगों के स्व-नियमन की जिम्मेदारी और अधिकार दें तो सरकार के लिए काम आसान होगा। ऐसे संगठन अपने स्तर पर निरीक्षण, नियंत्रण और अनुशासनात्मक कार्रवाई की व्यवस्था विकसित कर सकते हैं। कनाडा जैसे विकसित देश इस मॉडल का प्रभावी उपयोग कर रहे हैं।
खाद्य स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को प्रभावी समन्वय के दायरे में लाना अत्यंत आवश्यक है। बीज, उर्वरक, पशुपालन, चारा, कीटनाशक और खाद्य गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित निकायों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय हो सके तो खाद्य सुरक्षा प्रणाली और मजबूत होगी। उदाहरण स्वरूप कीटनाशक नियंत्रण और खाद्य परीक्षण निकायों के बीच नियमित जानकारी आदान-प्रदान से खाद्यान्न में कीटनाशकों के उपयोग को नियंत्रित करना अधिक आसान हो जाएगा।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उद्योगों को केवल दंडात्मक प्रक्रियाओं के बजाय सहयोग और क्षमता वृद्धि के माध्यम से सुधार किया जाना चाहिए। खाद्य उद्योगों को प्रशिक्षण, प्राविधिक जनशक्ति, स्वच्छता प्रबंधन तथा उपकरणों के उपयोग में सहायता प्रदान करना सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। स्थानीय या प्रादेशिक सरकार खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को उद्योगों में नियुक्त करे जबकि केन्द्रीय सरकार निगरानी और नियंत्रण का कार्य संभाले।
वर्तमान में उद्योगी दंड के डर से अपनी समस्याओं को छुपाते हैं जबकि निरीक्षक सामान्य त्रुटियों को भी अतिरंजित रूप में पेश करते हैं। इससे दीर्घकालिक रूप से खाद्य उद्योग कमजोर हो सकता है। अतः खाद्य स्वच्छता बनाये रखने के लिए “सहयोग और नियंत्रण” दोनों का संतुलन आवश्यक है।
दंड और जुर्माने की प्रणाली भी वैज्ञानिक और पारदर्शी होनी चाहिए। उद्योग की मंशा, पूर्व गतिविधियों, गलती की प्रकृति एवं जानबूझकर या लापरवाही से हुई त्रुटि के आधार पर कारवाई होनी चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय अभ्यास है। स्पष्ट मानदंड बनाकर किन त्रुटियों में क्या कारवाई होगी, यह जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।
खाद्य पदार्थ के स्रोत से अंत उपयोगकर्ता तक की यात्रा पता लगाने वाली प्रणाली विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नेपाल में राष्ट्रीय उत्पादन के साथ बड़ी मात्रा में आयातित खाद्य पदार्थ भी आते हैं। इसलिए आयातित खाद्य का प्रभावी परीक्षण और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। इसे उच्च जोखिम वाले खाद्य से शुरू किया जा सकता है। नेपाल को यह स्पष्ट करना होगा कि किस देश से कौन से खाद्य पदार्थ आयात किए जाएंगे। आवश्यक होने पर विदेशी उद्योगों का निरीक्षण, वर्चुअल ऑडिट और दस्तावेज मूल्यांकन आधारित स्वीकृति प्रणाली विकसित की जा सकती है।
आयातकों के खाद्य स्वच्छता के न्यूनतम मानदंड पालन की निगरानी भी आवश्यक है। इसके साथ ही “ट्रेसिबिलिटी” अर्थात खाद्य का स्रोत से उपभोक्ता तक का सफर पता लगाने की प्रणाली विकसित करना बेहद जरूरी है। यह व्यवस्था तुरंत बताने में सक्षम हो कि खाद्य कहाँ से आयात हुआ और कौन-कौन सी दुकानों या उपभोक्ताओं तक पहुंचा। इससे खाद्य स्वच्छता की जवाबदेही बढ़ेगी।
खुली सीमाओं के कारण यह कार्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन खुदरा विक्रेता स्तर तक प्रभावी निगरानी से खाद्य स्वच्छता के साथ कर प्रणाली भी पारदर्शी हो सकती है। आयातित खाद्य पदार्थों का नियमित परीक्षण, संबंधित डेटा बेस निर्माण और जोखिम आधारित अतिरिक्त परीक्षण व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्यजन्य संक्रमण, मिश्रण और अखाद्य गतिविधि की नियमित जानकारी रखना चाहिए। विभिन्न देशों में स्थित नेपाली दूतावासों के माध्यम से ऐसी घटनाओं की सूचना एकत्र कर जोखिम भरे खाद्य पदार्थों के नेपाल में प्रवेश पर रोकथाम करना आवश्यक है। अन्यथा, दूसरे देशों में अस्वीकृत या बिक्री न हो सकने वाले अखाद्य पदार्थ नेपाल में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं।
(खाद्य वैज्ञानिक हरिहर गुरागाईं वर्तमान में कनाडा में कार्यरत हैं।)





