ट्रम्प के साथ बैठक में शी ने कहा- ताइवान मामले को गलत तरीके से संभाला गया तो संघर्ष हो सकता है

समाचार सारांश
समीक्षा संपादकीय की गई।
- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण बताया है।
- शी ने ताइवान मामले को सही तरीके से न संभालने पर दोनों देशों के संबंधों के खतरनाक स्थिति में पहुंचने की चेतावनी दी।
- अमेरिका ने ताइवान को अरबों डॉलर का हथियार पैकेज दिया है, जिसे चीन ने विरोध किया है।
३१ वैशाख, काठमांडू। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे को अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण विषय बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले को सही तरीके से न संभाला गया तो संबंध खतरनाक स्थिति में पहुंच सकते हैं।
चीनी सरकारी एजेंसी षिन्हुआ के अनुसार, जिनपिंग ने ट्रम्प के साथ बैठक में ताइवान मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि इस विषय को सही तरीके से प्रबंधित किया गया तो अमेरिका और चीन के बीच स्थिरता बनाए रखी जा सकती है।
शी ने ताइवान की स्वतंत्रता को मूल रूप से ताइवान जलसन्धि की शांति के अनुकूल नहीं बताया। उन्होंने कहा कि जलसन्धि की शांति ही चीन और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा साझा आधार है।
ताइवान लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील विषयों में से एक रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जबकि अमेरिका ताइवान को सैन्य और राजनीतिक सहायता प्रदान करता है।
हाल के वर्षों में अमेरिका ने ताइवान को अरबों डॉलर का हथियार पैकेज दिया है, जिसे चीन लगातार विरोध करता रहा है।
ताइवान मुद्दा क्या है?
ताइवान एक स्वतंत्र द्वीप है जिसे बीजिंग अपना क्षेत्र मानता है और आवश्यक होने पर बल प्रयोग कर नियंत्रण कर सकते है।
पिछले वर्षों में बीजिंग ने ताइवान के चारों ओर नाकाबंदी और सैन्य अभ्यास बढ़ाए हैं, जो ताइवान के अधिकारियों और समर्थकों के लिए चिंता का विषय है।
पिछले साल ट्रम्प प्रशासन ने ताइवान को 11 अरब डॉलर के हथियार बेचने का ऐलान किया था, जिस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया और चेतावनी दी थी।
अमेरिकी समर्थन से ताइवान खुश
ताइवान दोनों महाशक्तियों के बीच एक प्रमुख चर्चा का विषय रहा है और ताइपेई ट्रम्प-शी की बैठक को बारीकी से देख रहा है।
रॉयटर्स के अनुसार, बीजिंग में हो रहे शिखर सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर ताइवानी सरकार की प्रवक्ता मिशेल ली ने अमेरिकी समर्थन के लिए आभार जताया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ताइवान इस बैठक के मुख्य एजेंडा में शामिल है। शी इस अवसर का उपयोग स्वतंत्र द्वीप को हथियार बेचने पर रोक लगाने के लिए ट्रम्प पर दबाव डालने में कर सकते हैं।
अमेरिकी नीति और ट्रम्प का दृष्टिकोण
अमेरिकी अधिकारियों ने पहले ही पुष्टि कर दी है कि ताइवान विषय पर शी और ट्रम्प के बीच चर्चा होगी। बीजिंग ने वॉशिंगटन से ताइवान को हथियार बिक्री कम करने का आग्रह किया है।
वॉशिंगटन ने कहा है कि वे इस स्वतंत्र द्वीप पर बल प्रयोग कर नियंत्रण करने के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे और हथियार आपूर्ति प्रतिबद्धता बनाए रखेंगे।
अमेरिका एक चीन नीति का समर्थन करता है, लेकिन ताइवान के साथ मजबूत और अनौपचारिक संबंध बनाए रखता है। इसके अलावा ताइवान की रक्षा के लिए आवश्यक साधन प्रदान करना अमेरिका की कानूनी जिम्मेदारी भी है।
हालांकि, भौगोलिक रूप से ताइवान चीन के तट के ज्यादा करीब है बजाय अमेरिका के, यह बात ट्रम्प भी कई बार बता चुके हैं।
पिछले साल दक्षिण कोरिया में शी से मिलने के बाद ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा था कि ताइवान कभी विवादित मुद्दा नहीं रहा।
(अंतर्राष्ट्रीय संचार माध्यमों के सहयोग से)





