Skip to main content

जापान में नया वीजा नियम लागू, नेपाली व्यवसायियों के सामने चुनौती

टोक्यो के नेरिमा इलाके में हांगकांग शैली के रेस्टोरेंट चला रहीं 47 वर्षीय चानका के ये समाचार संक्षेप की समीक्षा की गई और तैयार किया गया। जापान ने 27 अक्टूबर से लागू होने वाले बिजनेस मैनेजर वीजा के लिए पूंजी मापदंड तीन करोड़ येन किया है। नए वीजा नियम के कारण जापान में छोटे विदेशी व्यवसायी अपने कारोबार बंद कर देश वापस लौटने को मजबूर हैं। एडोगावा इंडियन एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन एस चंद्रानी ने कहा है कि व्यवसाय खोने से समुदाय कमजोर होगा।

31 जेठ, काठमांडू। जापान में लागू हुए नए वीजा नियम के कारण नेपाली सहित विदेशी छोटे व्यवसायी गंभीर संकट में हैं। खासतौर पर छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट, खाद्य आयात और खुदरा व्यवसाय चला रहे विदेशी नागरिक कारोबार बंद कर देश लौटने पर मजबूर हो रहे हैं, यह जापानी मीडिया में बताया गया है।

जापान की प्रवासन सेवा एजेंसी ने 27 अक्टूबर से लागू होने वाले ‘बिजनेस मैनेजर’ वीजा के लिए पूंजी संबंधी मापदंड कड़ा कर दिया है। नए नियम के अनुसार कारोबार के लिए कम से कम तीन करोड़ येन (करीब 190,000 अमेरिकी डॉलर) पूंजी आवश्यक होगी। इससे पहले यह पांच मिलियन येन था। इस बदलाव का असर खासतौर पर विदेशी समुदाय द्वारा संचालित छोटे व्यवसायों पर पड़ा है।

टोक्यो के नेरिमा में हांगकांग शैली के रेस्टोरेंट चला रही 47 वर्षीय चानका ने जापान की ऑनलाइन द असाही शिम्बुन को बताया कि नए नियम पूरे न कर पाने के कारण उन्होंने अपना रेस्टोरेंट बंद करने का फैसला किया है। कोविड-19 महामारी से गुज़रकर हाल ही में उनका रेस्टोरेंट ‘सान माई सान नेरिमा’ 20 मई को आखिरी बार खुलेगा। ‘मैं रेस्टोरेंट छोड़ना आसानी से नहीं चाहती थी, लेकिन कोई विकल्प नहीं था,’ उन्होंने कहा।

जानकारी है कि उन्होंने जापानी टेलीविजन नाटक देखते हुए बड़े होने का सपना पूरा करने के लिए लंबे समय तक बचत की और 2020 में यह रेस्टोरेंट खोला था। व्यवसाय ठीक चलने के बाद भी तीन करोड़ येन पूंजी जुटाना संभव न होने के कारण अंततः बंद करने का फैसला किया।

नेपाली और भारतीय व्यवसायी भी प्रभावित हैं। जापान की राजधानी टोक्यो के एडोगावा इलाके में देश का सबसे बड़ा भारतीय समुदाय रहता है, जिसे निशी-कासाई क्षेत्र ‘लिटिल इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां नेपाली भी रेस्टोरेंट चलाते हैं। वहां काम करने वाले एक व्यवसायी के अनुसार अधिकांश छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट संचालक तीन करोड़ येन जुटाने में असमर्थ हैं। ‘हम मेहनत से व्यवसाय चला रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी कोशिशों की परवाह नहीं कर रही,’ उन्होंने कहा, ‘अगर विदेशी अपने देश का खाना भी नहीं खा पाए तो वे जापान आना बंद कर देंगे, जिसका असर अंततः जापान पर पड़ेगा।’

उनके अनुसार, कई रेस्टोरेंट अब नवीनीकरण न होने के कारण बंद होने का खतरा है। एडोगावा इंडियन एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन एस चंद्रानी ने बताया कि अक्टूबर से भारतीय और नेपाली व्यवसायियों की लगातार चिंता आ रही है।

उन्होंने कहा कि शाकाहारी और धार्मिक आहारों पर निर्भर भारतीय-नेपाली समुदाय के लिए स्थानीय व्यवसाय बेहद जरूरी हैं। ‘अगर ये व्यवसाय खत्म हो गए तो समुदाय कमजोर होगा,’ उन्होंने कहा। ‘इमानदार व्यवसायी विस्थापित होने का खतरा है।’

टोक्यो के प्रशासनिक कानून विशेषज्ञ काजुहिको यामादा ने तीन करोड़ येन का मापदंड अत्यंत कठिन बताया है। उनका कहना है कि यह जापानी नागरिकों के लिए भी इतनी बड़ी पूंजी जुटाना सहज नहीं है। उन्होंने कहा कि नए नियम लागू होने के कारण विदेशी उद्यमी से वीजा आवेदन परामर्श लगभग बंद हो गया है। ‘इतनी बड़ी पूंजी वाले लोग जापान के बजाय अमेरिका या यूरोप को चुन सकते हैं,’ उन्होंने कहा।

नकली कंपनियां खोलने वाले आमतौर पर धनी होते हैं, इसलिए वे नए नियमों को आसानी से चकमा दे सकते हैं। लेकिन छोटे व्यवसाय चलाकर जापानी समाज में योगदान दे रहे विदेशी लोग बाहर हो सकते हैं, ऐसा एक अन्य व्यवसाय विशेषज्ञ अत्सुशी कोंदो ने जापानी ऑनलाइन द असाही शिम्बुन को बताया। ‘यह नियम मेहनती और ईमानदार लोगों को विस्थापित करेगा,’ उन्होंने कहा, ‘नियम ऐसे होने चाहिए जो गलत प्रयोग को रोकते हुए असली व्यवसायियों को टिकने में मदद करें।’