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उपेन्द्र यादव ने पार्टी सुदृढ़ीकरण के लिए अनौपचारिक चर्चाएं जारी रखीं

जनता समाजवादी पार्टी नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव सप्तरी में पार्टी के अग्रणी कार्यकर्ताओं से अनौपचारिक चर्चा करते हुए पार्टी को मजबूत बनाने के प्रयास में लगे हुए हैं। फागुन में सम्पन्न आम चुनाव में जसपा नेपाल तीन प्रतिशत मतदाताओं के थ्रेसहोल्ड को पार करने में विफल रहा और ९४ में से किसी भी उम्मीदवार ने जीत हासिल नहीं की। निर्वाचन आयोग ने जसपा नेपाल और महन्थ ठाकुर के नेतृत्व वाली लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के बीच हुए एकीकरण को मान्यता देते हुए पार्टी कार्यों में नई गतिशीलता आने की बात कही है।

३१ वैशाख, काठमाडौं – जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने मंगलवार सप्तरी के राजविराज में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने सप्तरी के निर्वाचन क्षेत्र संख्या ३ के अंतर्गत आने वाले पालिका कार्यकर्ताओं से भी चर्चा की है। २१ फागुन को सम्पन्न आम चुनाव में यदव ने प्रतिनिधि सभा सदस्य पद के लिए सप्तरी–३ से चुनाव लड़कर पराजय प्राप्त की थी। न केवल यादव, बल्कि जसपा नेपाल ने चुनाव चिन्ह छाता के साथ उतारे गए ९४ उम्मीदवारों में से कोई भी उम्मीदवार विजयी नहीं हो सका। समानुपातिक मतों में १ लाख ८२ हजार २८५ मत प्राप्त करने के बावजूद जसपा नेपाल तीन प्रतिशत थ्रेसहोल्ड पार नहीं कर सका।

मधेशवादी दलों में सबसे अधिक मत मिलने वाली इस पार्टी के अध्यक्ष यादव ने चुनाव के बाद अनौपचारिक मुलाकातों और चर्चाओं में तेजी लाई है। उन्होंने कहा, ‘पिछले चुनाव की समीक्षा करते हुए पार्टी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मुलाकातें जारी रख रहा हूं। जनता से सीधे मिलकर अपने विचार रखने और जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा हूं।’ काठमाडौँ में भी यादव ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से अनौपचारिक चर्चाएं जारी रखी हैं। औपचारिक बैठक न होने के बावजूद वे केन्द्रीय कार्यालय नियमित रूप से आते-जाते रहते हैं।

फागुन के चुनाव में हार के बावजूद जसपा नेपाल ने अभी तक औपचारिक समीक्षा नहीं की है। चुनाव से पहले जसपा नेपाल ने महन्थ ठाकुर नेतृत्व वाली लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) के साथ एकीकरण किया था। लेकिन एकीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से समाप्त नहीं होने के कारण औपचारिक समीक्षा बैठक प्रभावित हुई, नेता बताते हैं। पुस में हुई सहमति के अनुसार महन्थ ठाकुर जसपा नेपाल के संरक्षक बन गए हैं और वे राष्ट्रीय सभा के सदस्य भी हैं। जसपा नेपाल और लोसपा के एकीकरण से पहले लोसपाने अन्य पार्टियों से भी एकीकरण किया था। मंसिर २४ को हृदयेश त्रिपाठी के अध्यक्षत्व वाली जनता प्रगतिशील पार्टी और वृषेशचन्द्र लाल नेतृत्व वाली तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी (तमलोपा) ने लोसपा के साथ एकीकरण का समझौता किया था। फिलहाल, लाल नेतृत्व वाली तमलोपा इस सहमति से अलग है। जनता प्रगतिशील पार्टी के अध्यक्ष त्रिपाठी ने बताया कि उनकी पार्टी पूरी तरह से एकीकृत है। उन्होंने कहा, ‘हमने लोसपा के साथ एकता की इसके बाद लोसपा और जसपा नेपाल के बीच एकीकरण हुआ। मैं अपने विचार लोसपा के नेताओं के साथ साझा करूंगा।’

निर्वाचन आयोग की सोमवार को हुई बैठक में जसपा नेपाल के एकीकरण को मान्यता दी गई है। आयोग से औपचारिक पत्र मिलते ही पार्टी के कामों में गतिशीलता आएगी, नेता बताते हैं। जसपा नेपाल के सह-अध्यक्ष रकम चम्जोङ ने कहा कि अन्य दलों के साथ भी एकता के लिए चर्चा जारी है। उन्होंने बताया, ‘पार्टी को मजबूत बनाने के विषय में विभिन्न स्तरों से चर्चा हो रही है। जल्द ही केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में ठोस निर्णय लिया जाएगा।’

विभिन्न दलों के साथ संभावित एकता के बावजूद थ्रेसहोल्ड पास न करने के विषय पर अध्यक्ष यादव केंद्र से लेकर स्थानीय स्तर तक के कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रहे हैं। पार्टी अपेक्षित परिणाम न मिलने के बावजूद सिद्धांतों में स्पष्ट है, जसपा नेपाल के नेताओं का यह मानना है। अध्यक्ष यादव ने कहा, ‘जनता को हमारा एजेंडा समझाते हुए संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दे रहा हूं।’

गजेन्द्रनारायण सिंह ने मधेसी जनता के न्यायोचित प्रतिनिधित्व, नागरिकता, समावेशिता और संघीयता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखते हुए लगभग साढ़े तीन दशक पहले नेपाल सद्भावना पार्टी की स्थापना की थी। इस पार्टी ने मधेश के मुद्दों को संसद में प्रखरता से उठाया। २०६४ के चुनाव में मधेशवादी दल संविधानसभा के चौथे और पाँचवें सबसे बड़े दल बने। ५२ सीटों के साथ चौथा सबसे बड़ा दल बनने में मधेशी जनअधिकार फोरम के नेतृत्व में उपेन्द्र यादव का योगदान था। २०३२ में विद्यार्थी जीवन में ही वामपंथी राजनीति शुरू करने वाले यादव ने नेकपा (एमाले) और नेकपा (माओवादी) में भी काम किया। कम्युनिस्ट राजनीति छोड़कर मधेशी जनअधिकार फोरम के अध्यक्ष बने यादव के नेतृत्व में २०६३ के अंतरिम संविधान का विरोध हुआ। २०६३ माघ में काठमाण्डौं के माइतीघर मण्डल में आयोजित अंतरिम संविधान जलाने के कार्यक्रम में मुख्य झलक मधेश आंदोलन की थी। इसी आंदोलन के प्रभाव से पहले ६०१ सदस्यीय संविधान सभा में ८७ सदस्य मधेशवादी दल के थे। २०६४ में सुनसरी–५ और मोरङ–५, २०७० में सुनसरी–५, २०७४ में सप्तरी–२ और २०८० के उप-निर्वाचन में बारा–२ से प्रतिनिधि सभा सदस्य चुने गए यादव उपप्रधानमंत्री भी रह चुके हैं।

मधेशी जनअधिकार फोरम सन् २०६५ में विभाजित होकर फोरम लोकतान्त्रिक बना। इसके बाद यादव का नेतृत्व वाली पार्टी लगातार टूट-फूट और गठजोड़ का सामना करती रही। अशोक राई की पार्टी के साथ एकीकरण के बाद यादव संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष बने। पूर्व प्रधानमंत्री बाबुराम भट्टराई की पार्टी के साथ एकता के बाद वर्तमान समाजवादी पार्टी का गठन हुआ। लेकिन भट्टराई और राई दोनों यादव के साथ नहीं हैं।

फागुन चुनाव से पहले लोसपा के साथ एकीकरण के बावजूद मधेशवादी दल अपने प्रतिनिधि सभा उम्मीदवारों को जिताने में असफल रहा। उस समय एकता ना मानने वाले सीके राउत की जनमत पार्टी, राजेन्द्र महतो की राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी, रेशम चौधरी की नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, अशोक राई की जसपा सहित अन्य दलों से चर्चा हो रही थी, नेता बताते हैं। चुनाव परिणाम के बाद यादव अनौपचारिक चर्चाओं और मुलाकातों में केंद्रित हैं और इसी बीच अपने परिवार को भी समय दे रहे हैं।

जसपा नेपाल के महासचिव लालबाबु राउत ने कहा कि अध्यक्ष यादव जनता के साथ संवाद पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा, ‘मुद्दों में कोई समस्या न होने के कारण अध्यक्षजी ने संगठन विस्तार में तेजी लाई है।’