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बारामा डोजर संचालन कर लगभग सौ घर दुकानें ढहाई गईं

बाराको तीन नम्बर पुल क्षेत्र में डिविजन वन कार्यालय ने डोजर चलाकर लगभग सौ घरों को ध्वस्त कर दिया है। मिनाकुमारी रुम्बा ने तीन दिन पहले ऋण लेकर नया घर बनाया था, जिसे डोजर ने तोड़ दिया। स्थानीय लोगों ने बिना समय दिए खाली कराने की मांग को नकारते हुए सरकार के फैसले का विरोध किया है। 1 जेठ, बारा। शुक्रवार सुबह डिविजन वन कार्यालय की टीम डोजर लेकर 3 नम्बर पुल पहुंची, जहां मिनाकुमारी रुम्बा चाय पी रही थीं। वे दिनभर आने वाले ग्राहकों के लिए तैयारियां कर रही थीं। मिना को यह कल्पना भी नहीं थी कि उनकी तीन दिन पहले बनी नई घर थोड़ी देर में ही डोजर से ध्वस्त होगी। गुरुवार दोपहर वन कार्यालय के घर तोड़ने की खबर फैल गई थी, पर मिना को डर नहीं था। उन्होंने एक महीने पहले पुराना घर तोड़कर सड़क के अधिकार में आने वाली जमीन पर नया घर बनाया था। वहीं स्थानीय सरकार ने उसी जमीन का निस्सा दिया था, जिससे वह लालपूर्जा पाने की उम्मीद करती थीं। लेकिन वह जल्द ही आशंकित हो गईं। डोजर आते-आते उन्हें अपने घर के टूटने का एहसास नहीं था, पर जब 2-3 पुलिसकर्मी उनके आंगन में दाखिल हुए तो वह घबरा गईं, रिश्तेदारों को फोन किया और वडाध्यक्ष से मदद मांगी पर कुछ भी कारगर साबित नहीं हुआ। उन्होंने 100 प्रतिशत ब्याज पर लिया गया ऋण से बनाया नया घर आंखों के सामने ध्वस्त होता देख मातम कर दिया। डिविजन वन कार्यालय बार ने डिविजन सड़क कार्यालय हेटौंडा और पर्सा राष्ट्रीय निकुंज की टीम के साथ मिलकर मिना समेत लगभग 50 व्यवसायियों के सौ घरों को डोजर से तोड़ डाला है। “मेरा घर ही नहीं टूटा, बल्कि आज से मेरी सरकार में विश्वसनीयता भी टूट गई,” मिना ने कहा। तीन नम्बर पुल में मिना का होटल व्यवसाय तीस वर्षों से चल रहा था। करीब एक महीने पहले पुराना होटल घर तोड़कर नया घर बना रही थीं। मिना ने कहा, “अगर सरकार ने पहले सूचना दी होती कि यहां घर टूटेंगे तो ऋण लेकर घर क्यों बनाती? सरकार अच्छी आई, लेकिन सच में ऐसा नहीं था।” मिना ने बताया कि वे तीस वर्ष से इस इलाके में होटल चला रही थीं। उनके पति 2069 साल में निधन हो चुके हैं। एक महीने पहले पति के जमाने में बनाया पुराना लकड़ी का घर भी नष्ट हो गया। मिना कहती हैं, “सरकार ने मेरी जीविका छीन ली, मैं ऋण लेकर घर बनाई थी, लेकिन अब व्यापार की जगह खोने के बाद ऋण कैसे चुकाऊंगी?” उनके पास तीन नम्बर पुल के ऊपर ढुकुवाबास गांव में दो कठ्ठा खेती की जमीन है, वह भी ऐलानी। “कभी भी सरकार आकर हमें वहां से भी हटा सकती है,” मिना ने जोड़ा। तीन नम्बर पुल क्षेत्र के अधिकांश घर होटल व्यवसाय के लिए थे। पूर्व-पश्चिम राजमार्ग के हेटौंडा-पथलैया खंड में स्थित यह छोटा बाजार हजारों यात्रियों का विश्राम स्थल था। होटल और पर्यटन व्यवसायी संघ बाराका अध्यक्ष शम्भु खड्गी के अनुसार यहां दैनिक दस लाख से अधिक का व्यापार होता था। शुक्रवार से सरकार ने व्यापारियों को स्थायी रूप से यहां से हटाने का आदेश दिया। सरकार ने निस्सा बांटा था एवं लालपूर्जा का आश्वासन भी दिया था, लेकिन शुक्रवार को बाराको तीन नम्बर पुल क्षेत्र के लगभग सौ घरों को डोजर से ढहाया गया। सरकार ने इन्हें ‘अतिक्रमित क्षेत्र’ कहा, पर यह जमीन पहले से ही निस्सा बांटकर दी गई थी। स्थानीय अनिल पाख्रिन ने बसोबास के लिए अनुमति समेत निस्सा पाने का दावा करते हुए अन्याय का आरोप लगाया। जब वन कार्यालय की टीम ने घर तोड़ने की सूचना माइकिंग के जरिये दी तो अनिल के नेतृत्व में टीम निस्सा लेकर जीतपुरसिमरा उपमहानगरपालिका गई मांग करने। उनकी मांग थी कम से कम सामान हटाने का समय दिया जाए, लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने कहा, “वडाध्यक्ष, मेयर और सांसद सभी को गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुना।” अनिल ने यह भी कहा कि हालिया चुनाव जीतने वाले सांसदों ने भी फोन नहीं उठाए। उन्होंने कहा, “स्थानीय सरकार ने निस्सा बांटा और लालपूर्जा का आश्वासन दिया, फिर भी सामान हटाने के लिए समय नहीं दिया।” जीतपुरसिमरा उपमहानगरपालिका २२ नम्बर वडाले २०७७ साल में नागरिकों को अव्यवस्थित बसोबास क्षेत्र का नाप-तौल कर निस्सा बांटा था, जिससे लालपूर्जा पाने की उम्मीद थी। स्थानीय दीपक कुमार लामा के अनुसार, २०५५ साल में बनदेवी सामुदायिक वन गठित किया गया था जिसमें ३ नम्बर पुल क्षेत्र को आवासीय क्षेत्र माना गया था। २०३२ साल में यह क्षेत्र बसा हुआ था। २०४४ के नाप में वन क्षेत्र दिखाने के बाद भी २०५४/५५ में पुनः सामुदायिक वन व्यवस्थापन ने इसे आवासीय क्षेत्र मान्यता दी। इसी आधार पर २०७७ में भूमि आयोग ने नाप-तौल कर निस्सा बांटा। तीन वर्ष पहले २०८० असार में उपमहानगरपालिका ने भूमि व्यवस्था कार्यालय को पत्र लिखकर २४.९६ हेक्टेयर जमीन आवासीय बताई थी। लेकिन इन सबको नज़रअंदाज कर अचानक डोजर चलाने पर स्थानीय निराश हैं। दीपक कुमार लामा ने कहा, “सरकार चाहे जो भी स्तर की हो, वह हमारी अपनी सरकार है, हम उसके नागरिक हैं, लेकिन आज अनागरिक जैसा व्यवहार किया गया।” डिविजन वन कार्यालय के प्रमुख सुजित कुमार झा ने कहा, वन क्षेत्र और निकुंज में अवैध बसोबास है तो उसे हटाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बार-बार माइकिंग और लिखित सूचना दी गई, लेकिन स्थानीय लोगों ने नहीं सुनी इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी। वहीं उद्योग वाणिज्य संघ जीतपुरसिमरा के अध्यक्ष मोहन शर्मा ने कहा कि व्यवसायियों को स्थानांतरण के लिए समुचित समय दिए बिना डोजर चलाकर राज्य ने दमन किया है। “यह केवल व्यवसायियों के खिलाफ ही नहीं, स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों का भी हनन है,” शर्मा ने टिप्पणी की।