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सप्ताह में दो दिन छुट्टी देने के फैसले से छात्रों में बढ़ी चिंता

२८ वैशाख, डोटी। बझाङ के थलारा गाउँपालिका–१ के विवेक निरौला लक्ष्मीपुर माध्यमिक विद्यालय, मोतिपुर में कक्षा ९ में अध्ययनरत हैं। वे वर्तमान में पढ़ाई को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। सरकार द्वारा सप्ताह में दो दिन (शनिवार और रविवार) छुट्टी देने के निर्णय के बाद उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की। ‘सरकार का यह निर्णय अच्छा नहीं लगा। हमारे यहाँ पहले से ही छुट्टियाँ होती हैं, जिसके कारण पाठ्यक्रम कभी पूरा नहीं होता,’ निरौला कहते हैं, ‘अब सप्ताह में दो दिन छुट्टी देने के निर्णय के बाद इस वर्ष क्या होगा?’ वे प्रधानमंत्री बालेन शाह को एक अच्छे व्यक्ति के रूप में जानते हैं, लेकिन उन्हीं बालेन के विद्यालय दो दिन बंद करने के निर्णय से वे संतुष्ट नहीं हैं।

अछाम के साँफेबगर नगरपालिका–१० में स्थित बेतालमाण्डौ माध्यमिक विद्यालय की कक्षा ८ की छात्रा कृतिका भट्ट रविवार को विद्यालय बंद रहने पर असंतुष्ट हैं। ‘हमारी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षक ने पूर्ण पाठ्यक्रम पढ़ाने में असमर्थता जताई है। अब घर पर खुद पढ़ना पड़ेगा,’ उन्होंने कहा। उनके अनुसार शुक्रवार को विद्यालय में अतिरिक्त गतिविधि होती है इसलिए पढ़ाई नहीं होती। ‘इसलिए अब सप्ताह में केवल चार दिन ही पढ़ाई होगी,’ उन्होंने बताया।

डोटी के पद्म पब्लिक माध्यमिक विद्यालय की कक्षा ११ में अध्ययनरत छात्रा दिया कटुवाल बताती हैं कि रविवार को छुट्टी होने से नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ‘बहुत ज्यादा छुट्टियाँ होने से पढ़ाई कम होती है। घर पर भी कम पढ़ाई होती है। कक्षा अनियमित रहने से विद्यार्थी लापरवाह हो जाते हैं,’ उन्होंने कहा, ‘छुट्टी के दिन घर के काम भी करने पड़ते हैं, इसलिए पढ़ाई कम होती है। कम सीखने का खतरा होता है।’ कुछ विद्यार्थी घर पर रहते हुए मोबाइल, टेलीविजन या खेलकूद में ज्यादा समय बिताते हैं जिससे पढ़ाई में मन नहीं लगता यह चिंता भी है। ‘परीक्षा के नजदीक आते समय पाठ दुहराने और तैयारी करने में समस्या हो सकती है,’ कञ्चनपुर के कृष्णपुर नगरपालिका–४ के समैजी माध्यमिक विद्यालय के कक्षा १० के छात्र प्रल्हाद राजी ने कहा, ‘पाठ्यपुस्तकें इसी अनुसार होनी चाहिए, नहीं तो कोर्स पूरा नहीं होगा।’ इस वर्ष माध्यमिक शिक्षा परीक्षा (एसईई) की तैयारी करनी है इसलिए उनकी पढ़ाई पर असर पड़ने की चिंता है।

चुरे गाउँपालिका–६ कैलाली के भगवती माध्यमिक विद्यालय की छात्रा प्रतिक्षा अर्खाली मगर कहती हैं कि सप्ताह में दो दिन छुट्टी होने से सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को ही उठाना पड़ेगा। ‘शिक्षकों को तो फायदा होगा, कई दिन छुट्टी बिताने का मौका मिलेगा। हमें तो पढ़ना और सीखना है। अब अगर पढ़ाई नहीं हुई तो कभी होगी?’ उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘सरकार ने यह निर्णय उचित नहीं लिया।’