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‘एक मुठ्ठी बादल’ फिल्म में महिला स्वतंत्रता और सामाजिक नियमों के बीच द्वंद्व को दर्शाया गया है

‘एक मुठ्ठी बादल’ फिल्म मध्यम वर्गीय नेपाली परिवार में महिला स्वतंत्रता और सामाजिक नियमों के बीच के द्वंद्व को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। फिल्म की मुख्य पात्र माइली परिवार और होने वाले पति के संबंध में असंतोष व्यक्त करते हुए अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की खोज में लगी हैं। माइली अपने जीवन के निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी हैं। ११ नम्बर वडा कार्यालय में उनका विवाह दर्ता हो रहा होता है, उसी समय वडासचिव द्वारा भेजा गया पत्र पढ़ते हुए माइली के पिता और होने वाले पति मुस्कुरा रहे होते हैं। वडासचिव के निर्देशों का पालन करने के लिए माइली के होने वाले पति तत्पर हैं, परन्तु माइली को पत्र पर मुहर लगाना या वडासचिव की बात सुनने का मन नहीं होता। वहाँ घटित घटनाओं से माइली मानसिक रूप से असम्बद्ध हैं और उनके चेहरे पर कोई खुशी नहीं दिखाई देती। वह केवल तब मुस्कुराती हैं जब होने वाले पति से दूर अपनी कार में होती हैं। वडा कार्यालय में माइली का मन कहीं और होता है और वहाँ उनके पति ने उन्हें बुलाने की कोशिश नहीं की थी। कार्यालय का काम पूरा होने के बाद दो अलग रंग की कारें अलग-अलग दिशाओं में चलती हैं, तभी माइली मुस्कुराती हैं। इस प्रकार ‘एक मुठ्ठी बादल’ की शुरुआत होती है, जो मध्यम वर्गीय नेपाली परिवार की कहानी है। यह केवल पारिवारिक नाटक नहीं बल्कि एक नारीवादी फिल्म भी है।

फिल्म की विषयवस्तु पर चर्चा करने से पहले इसके नाम से ही प्रतीक समझा जा सकता है। ‘एक मुठ्ठी बादल’ नाम काफी कवितात्मक और प्रतीकात्मक है। फिल्म की लेखिका/निर्देशक सहारा शर्मा ने इस नाम का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारे समाज में महिलाएं कौन से सपने देख सकती हैं? क्या वे सपनों को थाम सकती हैं या नहीं?” मुठ्ठी में बादल रखना संभव नहीं है और अगर रखा भी जाए तो वह अस्थायी होता है। फिल्म इन सवालों को अपनी कहानी के माध्यम से उठाने का प्रयास करती है, जो माइली के जीवन के जरिये प्रकट होती है। माइली एक शिक्षित युवती हैं जो अमेरिका से वापस आई हैं। फिल्म में अमेरिका मध्यम वर्गीय परिवार का सपना दर्शाने वाला स्थान है। माइली का परिवार के साथ सामान्य संबंध हैं, न अधिक अच्छा न बहुत खराब। लेकिन परिवार के नियम — चाहे लिखित हों या अलिखित — के प्रति उनकी कई प्रश्न हैं। माता-पिता द्वारा भाई और माइली के साथ भेदभाव करना उन्हें पसंद नहीं है।

फिल्म एक और गंभीर सवाल भी उठाती है: क्या हमारी परंपरागत संस्कृतियां नई पीढ़ी को मानसिक शांति दे सकती हैं? कहानी के पुरुष पात्र और माइली की सोच अलग हैं। पुरुष पात्र पितृसत्तात्मक सोच रखते हैं जबकि माइली व्यक्तिगत स्वतंत्रता की तलाश में हैं। आर्थिक अंतर को भी वह स्वीकार नहीं करतीं। माइली का परिवार तराई के गाँव में है जबकि पुरुष परिवार काठमांडू में। माइली अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की खोज कर रही हैं, लेकिन उनकी बहन, भाई, माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों के साथ उसका मेल कैसा होता है, यह फिल्म में दिखाया गया है। माइली का परिवार मध्यम वर्गीय नेपाली परिवार की पूरी कहानी तो नहीं प्रस्तुत कर पाता, मगर यह फिल्म नेपाली समाज के जटिल दौर को चित्रित करने का प्रयास करती है। निर्देशक ने नए अंदाज में फिल्म बनाने का साहस दिखाया है, जो प्रशंसनीय है।