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इमानदार और निवेशोन्मुख निजी क्षेत्र को डरने की जरूरत नहीं – अर्थमंत्री वाग्ले

अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने विश्वास दिलाया है कि इमानदार और निवेशोन्मुख निजी क्षेत्र को कतई डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य मध्यम वर्ग का विकास करते हुए गरीब, श्रमिक, किसान और अवसर वंचित वर्गों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। उन्होंने बताया कि पिछले ३० वर्षों की नीतियाँ और प्रशासनिक तरीके उपयुक्त नहीं रहे, जिससे देश ने आर्थिक अवसर खोए हैं। ५ जेठ, काठमांडू।

विनियोग विधेयक २०८३ के सिद्धांत और प्राथमिकताओं से जुड़े संघीय संसद के दोनों सदनों में उठे प्रश्नों के उत्तर देते हुए अर्थमंत्री वाग्ले ने इमानदार और निवेशोन्मुख निजी क्षेत्र के लिए भयमुक्त होकर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास जताया। जब सांसदों ने निजी क्षेत्र में असहजता और आत्मविश्वास की कमी की चिंता जताई, तो उन्होंने कहा, ‘इमानदार और निवेशोन्मुख निजी क्षेत्र को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार स्वयं घर-घर और द्वार-द्वार जाकर निवेश, उद्योग और उत्पादन के विस्तार के लिए प्रोत्साहित कर रही है।’

सरकार आवश्यक सुविधा प्रदान करने, कानूनी सुधार करने और नीतिगत स्थिरता देने के लिए प्रतिबद्ध है, ऐसा उन्होंने बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि सहयोगी प्रक्रिया में मिलीभगत, नीतिगत कब्जा और शोषण की प्रवृत्तियों से राज्य को मुक्त कराकर सुशासन के लाभ सभी नागरिकों तक पहुँचाने का कार्य निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की सोच, नीति, कार्यक्रम और विनियोग विधेयक के सिद्धांत तथा प्राथमिकताएँ पूरी तरह मेल खाती हैं और आने वाला बजट भी इसी दिशा में होगा।

उन्होंने प्रतिपक्षी दलों से भी अनुचित तत्वों के साथ संबंध तोड़ने का आग्रह किया। मध्यम वर्ग के विस्तार को केवल सीमित वर्ग को लाभ पहुँचाने वाला बताने वाले आशंकाओं पर, उन्होंने स्पष्ट किया, ‘मध्यम वर्ग के विस्तार का मतलब कुछ सीमित वर्ग को सुविधा देना नहीं है। इसका केंद्र गरीब, श्रमिक, किसान, भूमिहीन, सुकुम्बासी और अवसर वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण में है।’