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राज्य संचालन में अनुभवी एवं विचारशील नेतृत्व का संतुलन आवश्यक है

समाचार सारांश

  • राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने सरकार संचालन के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश, मुख्य सचिव, सेनापति, पुलिस प्रमुख और कूटनीतिज्ञों को शामिल करते हुए पूर्ण सल्लाहकार समिति बनाने का सुझाव दिया है।
  • पार्टी संचालन हेतु राजनीतिक दार्शनिक, रणनीतिक चिंतक और प्राज्ञिकों को शामिल कर विचारधारा स्पष्ट करने वाले ‘थिंक टैंक’ गठन करने की मांग की गई है।
  • सिंहदरबार में डिजिटल पहुंच बढ़ाकर नागरिकों को गुमासो व सुझाव सीधे मंत्रालय तक पहुँचाने वाले ऐप विकसित करने और सामाजिक नेटवर्क के परिपक्व उपयोग की आवश्यकता बताई गई है।

इस वर्ष भी वैशाख ११ गुजर गया परंतु पिछले वर्षों जैसी चर्चा नहीं हुई। नेपाल के लोकतंत्र के इतिहास में वैशाख ११ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जिसने जनशक्ति को स्थापित किया। इसी लोकतांत्रिक खुलापन के आधार पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) जैसी नयी शक्तियाँ उभरी हैं। रास्वपा में युवा नेतृत्व की ऊर्जा प्रशंसनीय है, परन्तु राज्य संचालन एक जटिल प्रक्रिया है जहां केवल उत्साह पर्याप्त नहीं, अनुभव का भी बड़ा महत्व है। विदेश नीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और न्याय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ‘ट्रायल एंड एरर’ करने का अवसर किसी को नहीं मिलता। छोटी सी गलती नहीं केवल संकट में डाल सकती है। इसलिए भावना से दूर होकर परिपक्व रणनीति और विशेषज्ञता के आधार पर आगे बढ़ना आवश्यक है।

युवा नेतृत्व का चुनाव द्वारा संसद और सरकार में प्रवेश परिवर्तन का संकेत है। लेकिन राज्य संयंत्र जटिल और नौकरशाही संरचना से भरा होता है। दशकों तक सेवा करने वाले अनुभवी व्यक्तियों के बिना सफलता संभव नहीं है। इसलिए पार्टी को खुद को जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित करने हेतु कार्यशैली सुधार और विशेषज्ञों का समावेश अनिवार्य बनाना चाहिए। डिजिटल युग में नागरिक और सरकार के बीच की दूरी कम करने वाली तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हुए सुशासन का नया मॉडल प्रस्तुत करने में देर हो चुकी है।

वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक मंदी के बीच छोटे निर्णय भी गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। चाहे वह सीमा शुल्क नीति हो या विद्यार्थी संगठन प्रबंधन, हर कदम से दीर्घकालीन प्रभाव और जनमानस की मनोविज्ञान को समझना जरूरी है। लोकप्रियतावाद के बजाय वास्तविकता पर आधारित कार्य करने जरूरी है। जल्दबाजी में फैसले दुर्घटना ला सकते हैं इसलिए गहन अध्ययन और शोध के आधार पर नीतिगत सुधार करना पार्टी और देश दोनों के हित में होगा।

सरकार एवं पार्टी संचालन में सल्लाहकार समिति आवश्यक

सोशल मीडिया दोधारी तलवार की तरह है; जल्दी ऊपर पहुंचाता है पर जल्दी ही नीचे भी गिरा सकता है।

सरकार और पार्टी संचालन दो भिन्न पक्ष हैं। सरकार चलाने के लिए प्रशासनिक, सुरक्षा और कूटनीतिक अनुभव जरूरी होता है, जबकि पार्टी संचालन के लिए विचार, दर्शन और रणनीति आवश्यक है। इसलिए रास्वपा को तत्काल दो उच्चस्तरीय सल्लाहकार समितियां गठित करनी चाहिए। एक में पूर्व प्रधान न्यायाधीश, पूर्व मुख्य सचिव, नेपाली सेना के पूर्व प्रधान सेनापति, पूर्व पुलिस प्रमुख, अनुभवी कूटनीतिज्ञ और वरिष्ठ अर्थशास्त्री शामिल हों जो मंत्रियों को नीतिगत निर्णय से पहले कानूनी, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर सलाह दें ताकि अपरिपक्व निर्णयों से बचा जा सके। यह संवैधानिक सर्वोच्चता, विधि का शासन और शक्ति पृथक्करण को बनाए रखने में मदद करेगा।

पार्टी संचालन के लिए राजनीतिक दार्शनिक, रणनीतिक चिंतक और विद्वानों को सम्मिलित करके एक ‘थिंक टैंक’ की आवश्यकता है। यह पार्टी की विचारधारा स्पष्ट करेगा, नीतियाँ बनाएगा, और सामाजिक महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन करेगा। केवल चुने हुए व्यक्तियों के दबदबे के बजाय बौद्धिक वर्ग को उचित स्थान मिलने से पार्टी की गरिमा बढ़ेगी। अनुभवी और विशेषज्ञों के संयोजन से युवा नेतृत्व को मार्गदर्शन मिलेगा और राज्य संयंत्र में पकड़ मजबूत होगी। पार्टी संचालन में बहुलवाद, समावेशिता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करते हुए सहयोग की संस्कृति विकसित करना आज की जरूरत है।

कई नेता और कार्यकर्ता अन्य दलों से आये हैं या नई सोच रखते हैं। इस स्थिति में “हम अलग हैं” कहना शब्दों से ज्यादा निर्णय और परिणामों से दिखना चाहिए। अनुभवी सलाह लेने से कमजोरी नहीं बल्कि मजबूती और परिपक्वता आती है। राज्य के विभिन्न अंगों की जानकारी के बिना सुधार प्रयास केवल “शोर” तक सीमित रह सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर सुशासन की नींव रखनी होगी। सल्लाहकार समिति नियमित बैठकें और सुझाव संग्रह प्रणाली विकसित करें।

मंत्री और पार्टी नेतृत्व को कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज या नीति सार्वजनिक करने से पूर्व इन समितियों से सलाह लेना अनिवार्य होना चाहिए। इससे गलतियों से बचा जा सकेगा और जनता में पार्टी की विश्वसनीयता मजबूत होगी। एक परिपक्व दल को निरंतर सीखते हुए सुधार का रास्ता अपनाना चाहिए।

डिजिटल पारदर्शिता और नागरिक पहुंच सुदृढ़ करना

वाक एवं प्रेस स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए तथ्य आधारित राजनीति आगे बढ़ानी चाहिए।

आज का युग डिजिटल पारदर्शिता का है, फिर भी आम नागरिकों को मंत्री या सचिव से मिलने के लिए सिंहदरबार में घंटों इंतजार करना पड़ता है और ‘पास’ के लिए स्रोत ढूंढना पड़ता है। यह ‘गेटपास’ व्यवस्था जनता के लिए अभेद्य दीवार जैसी हो गई है। रास्वपा को इस व्यवस्था को समाप्त करना चाहिए। सिंहदरबार की दीवार पार कर न केवल अपने बल्कि दूर-दराज के लोगों की आवाज भी सीधे मंत्रालय तक पहुँचाने हेतु तकनीक विकसित करनी होगी। इसके लिए पुराने ‘हैलो सरकार’ की तुलना में अधिक उन्नत मोबाइल ऐप बनाना जरूरी है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और नागरिक सर्वोच्चता का सम्मान होगा।

प्रत्येक मंत्रालय का अलग ऐप होना चाहिए जिसमें नागरिक सीधे शिकायत, सुझाव और समस्याएं भेज सकें। इन ऐप्स के जरिए मिली प्रतिक्रिया मंत्री एवं उच्च अधिकारियों द्वारा सीधे देखी जाएं और उत्तर दिया जाए। इससे जनता को सरकार हाथ में होने का अनुभव होगा। पारदर्शिता केवल भाषण में नहीं, व्यवहार में अनुभव होनी चाहिए। कौन सी फाइल कहां रुकी है, कौन सा योजना कितना प्रगति पर है – सभी गृह में बैठे देख सकें इस तरह की तकनीक प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसी डिजिटल पहुंच भ्रष्टाचार पर पूर्ण रोकथाम करने और शक्ति विकेंद्रीकरण के लक्ष्य पूरे करने में मदद करेगी।

सोशल मीडिया के उपयोग में परिपक्वता आवश्यक है। फेसबुक या टिकटक पर वायरल होने या ज्यादा ‘फॉलोअर्स’ होने को नेतृत्व की काबिलियत नहीं मानना चाहिए। सोशल मीडिया दोधारी तलवार है; यह नेतृत्व को जल्दी ऊपर पहुंचाता है पर जल्दी ही गिरा भी सकता है। नेता की योग्यता अनुशासन, शिक्षा, अनुभव और समुदाय के प्रति समर्पण से मापी जानी चाहिए। टिकटक पर दिखने वाली सस्ती लोकप्रियता से बेहतर है भद्र व्यवहार और स्पष्ट नीतियां जो जनता का मन जीतती हैं। डिजिटल मीडिया को सूचना के माध्यम के रूप में विकसित करना चाहिए पर केवल कलात्मक संबंध बनाकर राजनीति चलाना जोखिमपूर्ण है। वाक् और प्रेस स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए सत्य और तथ्य आधारित राजनीति को आगे बढ़ाना जरूरी है। सरकार और नागरिक के बीच की दूरी कम करना असली लोकतंत्र और सुशासन की नींव है।

स्वतंत्र न्यायपालिका और संवैधानिक सर्वोच्चता को बनाए रखते हुए संयम से काम किया जाए तो आने वाले वर्ष में बड़ा सकारात्मक बदलाव आ सकता है और जनता का भरोसा कायम रह सकता है।

भू-राजनीति, सामाजिक मुद्दे और कार्यशैली में परिपक्वता

वर्तमान भू-राजनीतिक हालात जटिल और अस्थिर हैं। विश्व के कई हिस्सों में युद्ध और शक्तिराष्ट्रों के संघर्ष ने नेपाल को भी प्रभावित किया है। ऐसे समय में पड़ोसी देशों के साथ संबंध और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखते हुए निर्णय लेना जरूरी है। उदाहरण स्वरूप सीमा शुल्क में 100 रुपए से ऊपर की वस्तुओं पर कर लगना सीमावर्ती क्षेत्रों के आम लोगों के लिए समस्या बन गया है और भारतीय मीडिया में नकारात्मक चर्चा भी हुई है, जिससे कार्यान्वयन पक्ष की कमजोरियां प्रदर्शित होती हैं। नीतियों में समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है।

विद्यार्थी राजनीति और सुकुमवासी समस्या जैसे संवेदनशील विषयों में व्यवहारिक सतर्कता जरूरी है। विद्यार्थी यूनियन खत्म करने का प्रस्ताव लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध हो सकता है। विकृतियों को हटाने हेतु नियम लागू करने चाहिए पर संगठन को समाप्त करने से युवाओं की राजनीतिक चेतना दबने का खतरा है। शांतिपूर्ण विरोध और मानवाधिकार की रक्षा लोकतंत्र के महत्वपूर्ण पक्ष हैं। नकारात्मक पहलुओं को सुधारने और सकारात्मकों को बनाए रखने के लिए संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है। सुकुमवासियों के मामले में ‘डोजर’ चलाने से पहले सुकुमवासी और ‘हुकुमवासी’ के बीच स्पष्ट पहचान बनानी चाहिए। कठिनाइयों वाली सड़क या शहर का विकास अर्थहीन हो जाता है जब मानवीय संवेदनाएं भूल जाई जाती हैं।

‘राइट टू रिकॉल’ की अवधारणा को गलत तरीके से नहीं समझना चाहिए बल्कि सही अर्थ में समझना चाहिए। शक्ति जनता की होनी चाहिए, पार्टी के शीर्ष नेताओं को दंडित करने का उपकरण नहीं। चुनकर भेजा गया प्रतिनिधि ही पुनः बुलाने का तरीका लोकतंत्र का हिस्सा है। पूर्ण मताधिकार और आवधिक चुनाव से चुने गए प्रतिनिधि जनता के प्रति जिम्मेदार होते हैं। सरकार के साथ काम करने के पास पर्याप्त समय है। पहले वर्ष को अध्ययन, शोध और समस्या पहचान में लगाया जाना चाहिए। जल्दबाजी में काम करने से समस्याएँ बढ़ सकती हैं, इसलिए धीरे-धीरे मजबूत कदम उठाना बुद्धिमानी होगी।

रास्वपा को अन्य पार्टियों की तरह सत्ता में उलझने से बचना चाहिए और परिणामों से प्रमाणित पक्ष अपनाना चाहिए। पार्टी में योग्य और सक्षम सदस्यों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए और पुराने-नए भेदभाव के बिना सभी को सम्मिलित कर देश के भविष्य को बदलना संभव है।

कुल मिलाकर, राज्य संचालन गंभीर जिम्मेदारी है जहां केवल ऊर्जा नहीं, विवेक भी उतना ही आवश्यक है। रास्वपा को युवा ऊर्जा को अनुभवी विशेषज्ञों के ज्ञान से जोड़कर मजबूत कार्यपद्धति बनानी चाहिए। सल्लाहकार समिति का गठन, डिजिटल सामुदायिक नेटवर्क, और भू-राजनीतिक तथा सामाजिक मामलों में परिपक्वता पार्टी की सफलता की मुख्य नींव हैं। लोकप्रियता नहीं, बल्कि दीर्घकालीन नीतियां और जनसेवा पर केंद्रित रहना जरूरी है।

स्वतंत्र न्यायपालिका और संवैधानिक सर्वोच्चता का सम्मान करते हुए संयमित कार्य करने पर बाकी वर्षों में बड़े सकारात्मक परिवर्तन आएंगे और जनता का विश्वास स्थिर रहेगा।