संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान करने की दिशा में दोनों देश अग्रसर हैं – परराष्ट्र मंत्री खनाल

समाचार सारांश
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- परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि लिपुलेक सहित भारत के साथ सीमा विवाद संवाद के माध्यम से हल करने की दिशा में दोनों देश आगे बढ़ रहे हैं।
- नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद में तकनीकी समिति काम कर रही है और कूटनीतिक पहल से समाधान खोजने की प्रक्रिया सक्रिय है, मंत्री खनाल ने बताया।
- मंत्री खनाल ने बताया कि मानसून के दौरान सीमा वार्ता नहीं होती, लेकिन पहले रुकी हुई प्रक्रिया शीतकालीन सत्र में फिर से शुरू हो गई है।
६ जेठ, काठमांडू। परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि संवाद के माध्यम से लिपुलेक समेत भारत के साथ सीमाविवाद समाधान की दिशा में दोनों देश अग्रसर हैं।
बुधवार को प्रतिनिधि सभा की अंतरराष्ट्रीय संबंध और पर्यटन समिति की बैठक में यह विषय उठाया गया। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद प्रमेश कुमार हमाल ने सरकार की राय पूछी।
‘लिपुलेक पर हमने नोट भेजा था, उसका क्या प्रतिक्रिया मिली?’ सांसद हमाल ने पूछा।
जवाब में मंत्री खनाल ने कहा कि मानसरोवर यात्रा के मुद्दे सुलझने के बाद नेपाल ने कूटनीतिक नोट भेजा था।
‘हमने स्वाभाविक रूप से अपनी मांग के साथ नोट भेजा, उनकी तरफ से भी सीमा को लेकर अपनी दावेदारी आई। लेकिन कूटनीतिक प्रयास से समाधान खोजने की प्रतिक्रिया मिली है,’ परराष्ट्र मंत्री खनाल ने कहा।
उनके अनुसार, नेपाल भी सीमा विवाद कूटनीतिक संवाद के माध्यम से हल करने को तैयार है। उन्होंने कहा, ‘हमने भी हमेशा कहा है कि ऐसे सीमा विवादों का समाधान कूटनीतिक बातचीत से होना चाहिए।’ दोनों देशों की सीमाओं पर संयुक्त तौर पर काम भी चल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘नेपाल और भारत के बीच तकनीकी समिति काम कर रही है। सीमाएं लंबी हैं, उन्हें परखने के लिए समिति सक्रिय है। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।’
मनसून के दौरान सीमा वार्ता नहीं होती है, और उन्होंने कहा, ‘अधिकांश वार्ता शीतकालीन और शुष्क मौसम में होती हैं। बहुत समय तक यह प्रक्रिया रुकी थी, पिछले साल से फिर से शुरू होकर सीमा कार्य समूह की तकनीकी समिति सक्रिय रूप से काम कर रही है।’
नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से सीमासंबंधी वार्ता चल रही है और दोनों देश संवाद के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, उन्होंने बताया।
मंत्री खनाल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि लंबे समय के बाद नेपाल-भारत सीमा संबंधी मुद्दों में कूटनीतिक पहल और संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में हम अग्रसर हैं।’
