
८ जेठ, डोल्पा । हिमालयी जिला डोल्पा में यार्सागुम्बा संकलन शुरू होते ही जिले के अधिकांश विद्यालय बंद हो गए हैं। सामुदायिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ यार्सागुम्बा संकलन के लिए हिमालयी पाटन की ओर जाने लगे हैं, जिसके कारण विद्यालय बंद किए गए हैं। जिले के सामुदायिक विद्यालयों में जैसे ही जेठ शुरू हुआ, विद्यार्थियों की उपस्थिति कम होने लगी है, ऐसा शिक्षकों ने बताया है। कुछ विद्यालयों में तो विद्यार्थियों की संख्या लगभग शून्य होने के कारण पढ़ाई-लिखाई रोकनी पड़ी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार डोल्पा में यार्सागुम्बा संकलन केवल एक मौसमी कार्य नहीं बल्कि अधिकांश परिवारों की मुख्य आय का स्रोत है। साल भर की खर्च व्यवस्था से लेकर बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन चलाने तक यार्सागुम्बा से मिलने वाली आमदनी पर कई परिवार निर्भर करते हैं। इसी कारण विद्यालय आयु के बच्चे भी अभिभावकों के साथ पाटन की ओर जाने लगे हैं। इस वर्ष जिले के सभी यार्सा पाटन १० जेठ से खुलने वाले हैं। यार्सागुम्बा संकलन के समय के नजदीक आते ही छात्र विद्यालय छोड़कर पाटन की ओर जाने लगे, जिससे विद्यालय संचालन प्रभावित हुआ है।
त्रिपुरासुंदरी नगरपालिका–३ सुँको सरस्वती माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रेम केसी ने बताया कि विद्यार्थियों के विद्यालय नहीं आने पर बाध्य होकर विद्यालय बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘सभी विद्यार्थी यार्सागुम्बा संकलन के लिए चले गए। अब विद्यालय में कोई विद्यार्थी नहीं आता, इसलिए विद्यालय बंद करना पड़ा।’ इसी तरह त्रिपुरासुंदरी नगरपालिका–६ फुलचिङ स्थित मुकुटेश्वर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक गंगाराम कठायत ने भी यार्सागुम्बा संकलन के कारण विद्यालय बंद करने की बात कही।
काइके गाउँपालिका के शिक्षा शाखा प्रमुख गोविन्द घर्ती ने बताया कि पालिका ने विद्यालय बंद न करने की योजना बनाई थी, परंतु जब विद्यार्थी लगभग शून्य हो गए तो अंततः विद्यालय बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘हमने विद्यालय खुला रखने का प्रयास किया, लेकिन विद्यार्थी न आने के कारण अंत में विद्यालय बंद करना पड़ा।’ घर्ती ने कहा कि यार्सागुम्बा संकलन के दौरान यह समस्या बार-बार होती है, इसलिए दीर्घकालीन समाधान की आवश्यकता है।
डोल्पा में हर वर्ष जेठ की दूसरी सप्ताह से असार की दूसरी सप्ताह तक लगभग एक महीने तक यार्सागुम्बा संकलन होता है। इस दौरान हजारों स्थानीय निवासी हिमालयी पाटन की ओर जाते हैं। शिक्षकों के मुताबिक यार्सागुम्बा से होने वाली आय से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है, लेकिन इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
