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सार्वजनिक सवारी के पंजीकरण पर रोक लगाने के फैसले का चैंबर ने किया कड़ा विरोध

नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सार्वजनिक सवारी के नए पंजीकरण पर रोक लगाने वाले सरकार के निर्णय पर गहरा ध्यानाकर्षण व्यक्त किया है। चैंबर का कहना है कि पंजीकरण रोकने से ऑटोमोबाइल व्यवसायी आर्थिक जोखिम में पड़ सकते हैं और व्यवसायियों से चर्चा किए बिना लिया गया यह निर्णय व्यावहारिक नहीं है। चैंबर के अध्यक्ष कमलेश कुमार अग्रवाल ने पंजीकरण प्रक्रिया में फंसे वाहनों के पंजीकरण को सरल बनाने और दीर्घकालीन नीति अपनाने के लिए सरकार से आग्रह किया है। ८ जेठ, काठमाडाय़।

नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सार्वजनिक सवारी साधनों के नए पंजीकरण पर रोक लगाने के सरकार के फैसले पर गंभीर ध्यानाकर्षण व्यक्त किया है। चैंबर ने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि सभी सार्वजनिक सवारी (इलेक्ट्रिक सहित) का पंजीकरण रोकने से ऑटोमोबाइल व्यवसायी गंभीर आर्थिक जोखिम में पड़ सकते हैं। यातायात व्यवस्था विभाग ने सार्वजनिक सवारी का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सभी सार्वजनिक सवारी (इलेक्ट्रिक सहित) के पंजीकरण पर रोक लगाई है।

सरकार द्वारा सार्वजनिक सवारी प्रबंधन को वैज्ञानिक, व्यवस्थित एवं दीर्घकालीन बनाने का जो नीति लाई गई है, वह स्वागत योग्य है, लेकिन व्यवसायियों से बिना किसी चर्चा या समन्वय के अचानक पंजीकरण रोकने का फैसला व्यावहारिक नहीं है, चैंबर ने बताया। कई बैंक व वित्तीय संस्थानों से ऋण लेकर एलसी खोलकर आयात किए गए सैकड़ों वाहन, जो भन्सार छूट के साथ पंजीकरण प्रक्रिया में हैं, कुछ ट्रांजिट में हैं और कुछ निर्माता कंपनी के आदेश पर निर्मित और डिस्पैच किए जा चुके हैं, उन पर अचानक पंजीकरण रोकने से निवेश जोखिम में पड़ गया है, चैंबर ने कहा।

चैंबर ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक यातायात सेवा के लिए आयात किए गए ऐसे वाहन अन्य क्षेत्रों में बेचने या उपयोग करने योग्य नहीं हैं, इसलिए व्यवसायी गंभीर आर्थिक संकट में पड़ सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय निर्माता कंपनियों के साथ नेपाली व्यवसायियों की विश्वसनीयता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कोविड–१९ महामारी के दौरान भी सरकार ने अचानक सवारी आयात रोकने का फैसला किया था, जिससे नेपाली व्यवसायियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विश्वसनीयता खोनी पड़ी थी, यह बात याद दिलाते हुए चैंबर ने कहा कि यह निर्णय नेपाल के व्यावसायिक माहौल को नकारात्मक संदेश देगा। चैंबर ने कहा कि यह निर्णय सार्वजनिक यातायात सेवा, रोजगार, ऑटोमोबाइल व्यवसाय, बैंकिंग क्षेत्र के निवेश और सरकारी राजस्व संग्रहण पर सीधे प्रभाव डालता है और तत्काल पुनर्विचार का आग्रह किया है। चैंबर अध्यक्ष कमलेश कुमार अग्रवाल ने पंजीकरण प्रक्रिया में मौजूद, ट्रांजिट में और पूर्व स्वीकृत आयातित वाहनों के पंजीकरण और संचालन को सुगम बनाने की मांग सरकार से की है। साथ ही निजी क्षेत्र और संबंधित पक्षों से आवश्यक समन्वय और परामर्श कर व्यवहारिक, वैज्ञानिक एवं दीर्घकालीन नीति अपनाने का आग्रह किया गया है।