Skip to main content

राप्ती स्वास्थ्य प्रतिष्ठान में एक माह में 113 मिर्गौला पथरी की सफल शल्यक्रिया सम्पन्न

राप्ती स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में वैशाख 1 से 31 तक 113 मरीजों की मिर्गौला की पथरी की शल्यक्रिया सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई है। प्रतिष्ठान के यूरोलॉजी विभाग ने इस अवधि में 505 मरीजों को ओपीडी सेवा प्रदान की और 61 मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया गया। प्रतिष्ठान ने वीर अस्पताल और त्रिवि शिक्षण अस्पताल के साथ सहयोग कर यूरोलॉजी सेवाओं का विस्तार किया है, लेकिन भौतिक पूर्वाधार की कमी अब भी एक चुनौती बनी हुई है।

9 जेठ, दाङ। राप्ती स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में केवल एक माह के भीतर 113 मिर्गौला पथरी वाले मरीजों की सफल शल्यक्रिया की गई है। प्रतिष्ठान के आंकड़ों के अनुसार वैशाख 1 से 31 तक यूरोलॉजी विभाग ने कुल 113 मरीजों की शल्यक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। उसी अवधि में यूरोलॉजी विभाग ने 505 मरीजों को ओपीडी सेवा प्रदान की और 61 को भर्ती कर उपचार किया गया, इस जानकारी की पुष्टि प्रतिष्ठान ने की है।

प्रतिष्ठान में यूरोलॉजिस्ट सर्जन डॉ. सुशील खनियाँ के नेतृत्व में चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम छोटे से लेकर बड़े शल्यक्रिया नियमित रूप से संचालित कर रही है। प्रतिष्ठान के अनुसार प्रतिदिन यूरोलॉजी ओपीडी में 70 से अधिक मरीज परामर्श और उपचार प्राप्त कर रहे हैं।

पहले जिले में यूरोलॉजी सेवाओं का अभाव था, जिसके कारण सामान्य से लेकर विशेषज्ञ उपचार के लिए मरीजों को अन्य जिलों के अस्पताल जाना पड़ता था। लेकिन प्रतिष्ठान में अत्याधुनिक उपकरणों के साथ यूरोलॉजी सेवा के विस्तार के बाद स्थानीय मरीजों को सहज उपचार सुविधा उपलब्ध हो रही है।

यूरोलॉजी सेवाओं में मूत्र संबंधी रोग, प्रोस्टेट, मिर्गौला की पथरी, पित्ताशय की पथरी, मूत्र नली की समस्याएँ, अंडकोष में सूजन या दर्द, मूत्र में जलन या रिसाव जैसी बीमारियों का यहां उपचार संभव है, यह जानकारी यूरोलॉजिस्ट डॉ. खनियाँ ने दी। वे बताते हैं कि यूरोलॉजी सेवा लेने वाले मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

प्रतिष्ठान के निमित्त कार्यालय प्रमुख, निर्देशक एवं सह-प्राध्यापक डॉ. सुरेश रसाइली ने यूरोलॉजी सेवाओं को अत्यंत प्रभावकारी बताते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार मिलने से मरीज खुश हैं। डॉ. खनियाँ लंबे समय से प्रतिष्ठान में यूरोलॉजी सेवा प्रदान कर रहे अनुभवी चिकित्सक हैं।

प्रतिष्ठान ने यूरोलॉजी समेत विशेषीकृत सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए वीर अस्पताल और त्रिवि शिक्षण अस्पताल के साथ सहयोग शुरू किया है। सेवाओं के विस्तार के बावजूद भौतिक पूर्वाधार की कमी अब भी एक चुनौती बनी हुई है, ऐसा प्रतिष्ठान ने बताया है।