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भारत में ९ दिनों में तीसरी बार ईंधन मूल्य वृद्धि, नेपाल पर भी पड़ सकता है प्रभाव

भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम ९ दिनों के अंदर तीसरी बार बढ़ाए गए हैं, और दिल्ली में पेट्रोल का दाम ९९.५१ भारतीय रुपये तथा डीजल का दाम ९२.४९ भारतीय रुपये पहुंच गया है। नेपाल भारत से पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है, इसलिए भारत में हुई इस मूल्य वृद्धि का नेपाल पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण भारत की तेल कंपनियां घाटे में आ गईं, जिससे उन्हें दाम बढ़ाने का कदम उठाना पड़ा है।

९ जेठ, काठमांडू। भारत में फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। दिल्ली में पेट्रोल प्रति लीटर ८७ पैसे महंगा होकर ९९.५१ रुपये हो गया है, जबकि डीजल का दाम भी प्रति लीटर ९१ पैसे बढ़कर ९२.४९ रुपये हो गया है। भारतीय मीडिया के अनुसार यह वृद्धि ९ दिनों के भीतर तीसरी बार की गई है। इससे पहले १९ मई को पेट्रोल व डीजल के दाम औसतन प्रति लीटर ९० पैसे बढ़ाए गए थे, तथा १५ मई को भी प्रति लीटर ३ रुपये की वृद्धि हुई थी।

नेपाल पर भी हो सकता है प्रभाव
नेपाल भारत से पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करता है। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) से पेट्रोल, डीजल सहित अन्य ईंधन खरीदता है। इसलिए भारत में ईंधन के दामों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव नेपाल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। नेपाल ऑयल निगम के एक संचालक समिति सदस्य ने कहा, ‘भारत से खरीद मूल्य सूची उच्च दर पर आने पर नेपाल ऑयल निगम की लागत बढ़ जाएगी, जिसके कारण हमें अंदरूनी बाजार में भी दाम समायोजित करने की स्थिति आ सकती है।’ हालांकि फिलहाल दामों में वृद्धि या कमी को लेकर कोई निश्चित जानकारी नहीं है।

नेपाल ऑयल निगम की संचालक समिति अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार लगभग १५ दिनों में अपने स्वचालित प्रणाली के ज़रिए दाम समायोजन करती है। कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक उच्च बने रहने से नेपाल में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने ईंधन की खपत घटाने के लिए शनिवार और रविवार को सार्वजनिक छुट्टी घोषित की है।

भारत में ईंधन के दाम क्यों बढ़े?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इसके मुख्य कारण हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल ७० डॉलर थी, अब यह १०० डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। तेल महंगा होने से तेल कंपनियां आर्थिक दबाव में आईं और घाटा पूरा करने के लिए दाम बढ़ाने पड़े। यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक उच्च रही, तो पेट्रोल और डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के विनिमय दर के आधार पर ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘‘डेली प्राइस रिविजन’’ या ‘‘डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम’’ के माध्यम से रोज सुबह ६ बजे नए दाम जारी करती हैं। उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले विभिन्न कर और खर्च जुड़ने के कारण अंतिम मूल्य आधार मूल्य से कहीं अधिक होता है।

२०२४ से दाम स्थिर थे
मार्च २०२४ से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर थे। लोकसभा चुनाव २०२४ से पहले सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए प्रति लीटर २ रुपये की कटौती की थी। भारत में राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण लंबे समय तक दैनिक मूल्य समायोजन नहीं किया गया, लेकिन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के १५ दिन के औसत कच्चे तेल मूल्य के आधार पर समय-समय पर मूल्य समायोजन का प्रावधान रखा है।

सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के कारण घाटे में थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री से कंपनियों को महीने में लगभग ३० हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इसे कम करने के लिए सरकार ने विशेष एक्साइज ड्यूटी घटाने की नीति अपनाई थी। पेट्रोल पर १३ रुपये का शुल्क घटाकर ३ रुपये किया गया था, जबकि डीजल पर १० रुपये का शुल्क शून्य कर दिया गया।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले रविवार तेलंगाना में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों के संयमित उपयोग का सुझाव दिया था। उन्होंने पेट्रोल, गैस और डीजल के सावधानीपूर्वक उपयोग की अपील करते हुए विदेशी मुद्रा बचत और युद्ध के नकारात्मक प्रभाव को कम करने की आवश्यकता जताई थी।