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उपसभामुख ठाकुर ने दहेज प्रथा के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प व्यक्त किया

उपसभामुख रुबिकुमारी ठाकुर ने दहेज प्रथा के विरुद्ध अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने सर्लाही के चंद्रनगर गाउँपालिका–२ गौچरण बाजार में रविवार को आयोजित बाल विवाह और दहेज प्रथा उन्मूलन संबंधी व्यापक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक समानता और व्यवहार के माध्यम से ही दहेज प्रथा का अंत संभव है।

‘बाल विवाह से जीवन नष्ट होता है, दहेज हटाएं, बेटी बचाएं’ के नारे के साथ आयोजित कार्यक्रम में उपसभामुख ठाकुर ने दहेज के कारण विशेषकर मधेश क्षेत्र में बेटियों के प्रति हिंसा बढ़ने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “दहेज के दबाव में कई बेटियों और बहुओं ने अपनी जान गंवा दी है और गर्भ में ही बेटियों की हत्या हो रही है, यह तथ्य भी सामने आया है।”

उपसभामुख ठाकुर ने बताया कि मधेश में दहेज प्रथा गहराई तक फैली हुई है और इसका प्रभाव अब देश के अन्य इलाक़ों में भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा तब तक इस तरह की सामाजिक कुरीतियों को खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने बेटियों को बेटों के समान शिक्षा और अवसर प्रदान करने पर भी जोर दिया।

सांसद नितिमा भंडारी कार्की ने दहेज प्रथा समाप्ति के लिए महिलाओं के साथ युवाओं की सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई। गाउँपालिका के अध्यक्ष राजकुमार महतो ने जानकारी दी कि २० वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही बेटी की शादी करने वाले अभिभावकों का सम्मान पंचायत द्वारा किया जाता है।

गाउँपालिका ने पिछले चार वर्षों से कक्षा १२ उत्तीर्ण करके २० वर्ष की आयु पूरी कर विवाह करने वाली बेटियों को प्रोत्साहन स्वरूप ५० हजार रुपये प्रदान किए हैं। अब तक १५७ बेटियों को ५० हजार रुपये और १९७ बेटियों को ११ हजार रुपये की सहायता पंचायत द्वारा दी जा चुकी है। कार्यक्रम में ३५४ बेटियों और उनके परिवारों को उपसभामुख ठाकुर के हाथों सम्मानित किया गया।