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गोलाप्रथा प्रणाली हटाने के विरोध में बार अध्यक्ष मिश्र का बयान

११ जेठ, काठमाडौं। नेपाल बार एसोसिएसन के अध्यक्ष प्रा.डा. विजयप्रसाद मिश्र ने सर्वोच्च अदालत में लागू गोलाप्रथा प्रणाली हटाने की तैयारी पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि गोलाप्रथा के माध्यम से पेशी निर्धारित करने के अभ्यास को समाप्त करने पर प्रधानन्यायाधीश स्वयं पेशी निर्धारित करने के प्रयत्न से न्यायपालिका राजनीतिक प्रभाव में आ सकती है।

काठमाडौं में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘अभी सर्वोच्च अदालत में गोलाप्रथा प्रणाली हटाने की तैयारी चल रही है। यदि इसे हटाया गया तो क्या होगा यह चिंता का विषय है। अब प्रधानन्यायाधीश बनने के लिए त्याग-तपस्या की आवश्यकता भी नहीं रहेगी।’ इस प्रणाली के हटाए जाने पर उन्होंने कड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी।

प्रधानन्यायाधीश नियुक्ति प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाते हुए मिश्र ने कहा कि संवैधानिक परिषद के माध्यम से प्रधानमंत्री की पसंद अनुसार व्यक्ति नियुक्त करने का चलन शुरू हो चुका है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि सरकार आलोचना करने वाले व्यक्तियों को ‘झोले’ कहकर पहचानने के लिए हजारों लोग परिचालित किए जा रहे हैं।

न्यायपालिका की गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हुए अध्यक्ष मिश्र ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कानून व्यवसायियों को विवेक खोना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, ‘संवैधानिक परिषद में प्रधानमंत्री की पसन्द के अनुसार नियुक्ति की प्रक्रिया बढ़ गई है। प्रधानमंत्री की पसंद के अनुसार ही कोई व्यक्ति प्रधानन्यायाधीश बन रहा है। इस स्थिति को स्वीकार करना या हटाना आवश्यक है। सरकार का विरोध करने वालों को हजारों की संख्या में परिचालित कर ‘झोले’ कहना शुरू कर दिया गया है।’ अध्यक्ष मिश्र ने आगे कहा, ‘अभी भी हमें विवेक खोना नहीं चाहिए। वर्तमान में हमारे वरिष्ठ वकीलों को यह भूमिका निभानी होगी।’