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फिर्के खोलामा पूर्वमाओवादी नेता का पांचतले घर, उन्होंने कहा- जुआ खेला था, हारा

पोखरा महानगरपालिकाले फिर्के खोला मिचकर अवैध रूप से बने संरचनाओं को ढहाने हेतु डोजर चलाना शुरू किया है। पूर्वमाओवादी नेता ज्ञानबहादुर कोइरालाले नियमों का उल्लंघन करते हुए फिर्के खोलामाथि पांचतले घर बनाने की बात स्वीकार की है। फिर्के खोला मिचकर 35 व्यक्तियों और 11 संस्थाओं ने अवैध रूप से पक्के भवन बनाये हैं। 11 जेठ, पोखरा।

‘ओह! खोलामाथि पांचतले घर? ऐसा कैसे बना लिया होगा?’ पोखरा महानगरपालिकाद्वारा सोमवार को डोजर चलाए जाने वाले स्थान पर जमा हुए नागरिकों ने आश्चर्य व्यक्त किया। वास्तव में पोखरा के फिर्के खोला पर एक बड़ा पांचतला मकान खड़ा था। वडा नंबर 5 के पर्स्याङ के पीछे लक्ष्मी टोल में फिर्के खोलामाथि बना यह आलीशान बंगला अपनी खोल के किनारे कमरे और खिड़कियों सहित दिखाई देता है। यह किसका है? यहां के कई लोगों को ज्ञात है, लेकिन अन्य लोगों की भी जिज्ञासा बढ़ी है।

ज्ञानबहादुर पूर्वमाओवादी नेता हैं। माओवादी शांति प्रक्रिया के बाद वे लंबे समय तक पोखरा महानगर के सर्वदलीय संयंत्र में कार्यरत रहे। स्थानीय चुनावों से पहले यह संयंत्र महानगर के नीतिगत एवं विकास निर्माण कार्यों में भूमिका निभाता था। महानगर के विकास, नियमन एवं सुशासन के जिम्मेदार व्यक्ति ही कानून तोड़कर खोले पर संरचना बना रहे हैं। वह भी एक नहीं बल्कि दो संरचनाएँ। पोखरा महानगराने रविवार से डोजर चलाने का अभियान शुरू किया है जो फिर्के खोला पुल के नीचे के क्षेत्र में है।

ज्ञानबहादुर ने स्वीकार किया कि घर निर्माण सही मापदंडों के अनुसार नहीं हुआ और अनुमति लिए बिना बनाया गया है। उन्होंने कहा, ‘मैंने जुआ खेला, पता था कि एक दिन हारना पड़ेगा।’ उन्होंने चार साल पहले फिर्के खोलामाथि घर बनाया था। ‘मापदंडों के अनुसार अनुमति न मिलने के कारण बाद में जो होगा वह सोचकर बनाया था’ उन्होंने कहा। वे गैरकानूनी जुआ खेलने के कारण आर्थिक और सामाजिक दोनों रूपों में नुकसान झेल रहे हैं।

फिर्के खोला में ज्ञानबहादुर जैसे 35 व्यक्ति और 11 संस्थाओं ने अवैध रूप से पक्का मकान और भवन निर्माण किया है। सरकारी निकायों ने भी फिर्के खोलाको दोहन किया है। उदाहरण के लिए, पोखरा इंजीनियरिंग कॉलेज एवं लिटिल स्टेप स्कूल जैसी शैक्षिक संस्थाएँ खोल के बड़े हिस्से पर कब्जा करती हैं। लगभग 8 किलोमीटर लंबा फिर्के खोला न केवल विकास के दायरे में आया है बल्कि पिछले दशकों में विवाद एवं चर्चाओं का केंद्र भी बना हुआ है।