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कागेश्वरी मनोहरा और गोठाटार के पानी उद्योगों में अनियमितताएं, मापदंडों के विरुद्ध १४९ जल्दी खराब हुए जार नष्ट

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • खाद्य प्रौद्योगिकी एवं गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने काठमांडू के चार पानी उद्योगों का अनुगमन कर मानकों के विरुद्ध १४९ पुराने एवं क्षतिग्रस्त जार नष्ट किए हैं।
  • जिसमें गोठाटार स्थित ओसियन ड्रिंकिंग वाटर इंडस्ट्रीज़ ने बिना अनुमतिपत्र नवीकरण किये टूटी पाइपलाइन का उपयोग कर संचालन किया पाया गया।
  • विभाग ने तीन उद्योगों से पानी के नमूने संग्रहित कर प्रयोगशाला में भेजे और सभी को पूर्वाधार सुधार व स्वच्छता पर ध्यान देने का निर्देश दिया।

११ जेठ, काठमांडू। खाद्य प्रौद्योगिकी एवं गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने काठमांडू के विभिन्न पानी उद्योगों में कड़ी निगरानी कर सख्त कार्रवाई की है।

कागेश्वरी मनोहरा और गोठाटार क्षेत्रों में निरीक्षण के दौरान मापदंडों के खिलाफ संचालित चार पानी उद्योगों से १४९ पुराने, टूटे तथा क्षतिग्रस्त जार नष्ट किये गए हैं, विभाग ने बताया।

विभाग के अनुसार इन उद्योगों में टूटी एवं छिद्रित जारों में पानी भरा जाता था, अनुमतिपत्र नवीनीकरण नहीं किया गया था तथा उत्पादन क्षेत्र के पूर्वाधार और सफाई में भारी लापरवाही पाई गई।

“खाद्य स्वच्छता एवं गुणवत्ता अधिनियम २०८१” के तहत तीन उद्योगों से लिए गए पानी के नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।

किस प्रकार की कार्रवाई की गई?

गोठाटार-७ के ओसियन ड्रिंकिंग वाटर इंडस्ट्रीज ने खाद्य अनुमतिपत्र नवीनीकरण किए बिना संचालन जारी रखा था। निरीक्षण में उद्योग की पाइपलाइन टूटी हुई और अन्य कंपनी के जार के उपयोग की बात सामने आई।

विभाग ने वहां से ७३ पुराने, छिद्रित और क्षतिग्रस्त जार नष्ट कराए। पानी के नमूने संग्रहित करने के बाद उद्योग को सात दिनों के भीतर कार्यालय में उपस्थिति देने और सुधार करने के निर्देश दिए गए।

कागेश्वरी मनोहरा-७ के भद्रकाली पानी उद्योग परिसर में वर्षा ऋतु में जल जमाव की संभावना और जार भरने वाले कक्ष के बाहर टाइल टूटी हुई देखी गई।

विभाग ने वहां से ४१ पुराने और क्षतिग्रस्त जार नष्ट किए और पानी जमा न होने के लिए संरचना के मरम्मत का निर्देश दिया। इस उद्योग से भी पानी के नमूने लिए गए।

कागेश्वरी मनोहरा-७ बिरेगाउँ स्थित मनोहरा फूड एंड बेवरेज प्रा.लि. में जार धोने और पानी भरने का कार्य एक ही कक्ष में हो रहा था।

इससे पानी में संक्रमण का खतरा हो सकता है, इसलिए विभाग ने जार साफ-सफाई और भरने के कक्ष अलग करने के आदेश दिए। वहां से १९ पुराने जार नष्ट कर पानी के नमूने परीक्षण के लिए लिए गए।

कागেশ्वरी मनोहरा के सिद्धकाली अक्वा पानी उद्योग से भी १६ क्षतिग्रस्त पुराने जार नष्ट किए गए। इसके अतिरिक्त पानी भरने के स्थान के सामने अनिवार्य रूप से लगाए जाने वाले ‘यूवी लाइट’ की कमी मिली, जिसे तत्काल स्थापित करने का निर्देश दिया गया।

बाजार में पानी की मांग के समय उद्योग मानकों का पालन न कर अनियमित जार में पानी भरने और सफाई न रखने की वजह से विभाग ने अनुगमन कड़ा किया है।

संग्रहित नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद अतिरिक्त कार्रवाई की योजना बनाई जाएगी, विभाग ने बताया।