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इतिहास में दर्ज सात बजट

समाचार सारांश

  • सुवर्ण शमशेर ने 21 माघ 2008 को नेपाल का इतिहास का पहला बजट सार्वजनिक किया।
  • तत्कालीन अर्थमंत्री भरतमोहन अधिकारी ने आर्थिक वर्ष 2051-52 के बजट के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा भत्ता और ‘अपने गाँव खुद बनाएं’ कार्यक्रम शुरू किया।
  • अर्थ राज्य मन्त्री महेश आचार्य ने आर्थिक वर्ष 2048-49 के बजट से नेपाल में आर्थिक उदारीकरण और खुला बाजार अर्थव्यवस्था की नीति लागू की।

12 जेठ, काठमांडू। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले जब प्रधानमंत्री की ओर से आगामी आर्थिक वर्ष 2083/84 के नीति तथा कार्यक्रम पर उठे प्रश्नों के उत्तर देने से पहले या विनियोजन विधेयक के सिद्धांत एवं प्राथमिकताओं पर उठे चिंताओं का समाधान करते हैं, तो वह हमेशा याद करते हैं – 21 माघ 2008 को सुवर्ण शमशेर द्वारा प्रस्तुत नेपाल का पहला बजट।

विपक्षी सांसदों द्वारा बजट पर पारंपरिक अर्थों में आलोचना किए जाने पर अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा था, ‘बजट से जुड़े शब्द वे ही हैं जो 2008 साल में सुवर्ण शमशेर के बजट में शामिल थे।’ शब्दों से मात्र नीति में सुधार आवश्यक होता है, इसलिए आलोचना को उन्होंने तर्कपूर्ण नहीं माना।

अर्थमंत्री वाग्ले के 2008 के बजट की याददाश्त की तरह नेपाल में इतिहास रचने जैसे कुछ सीमित आर्थिक वर्षों के बजट ही आए हैं। आज नए बजट आने से पहले हम पिछले 75 वर्षों में इतिहास बनाने में सफल सात बजटों पर चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक परिवेश ने वाग्ले को ऐसे महत्वपूर्ण बजट लाने का मौका दिया, लेकिन यह देखना बाकी है कि वे इसे कैसे उपयोग करेंगे।

2008 साल: नेपाल का पहला बजट

21 माघ 2008 को सुवर्ण शमशेर द्वारा प्रस्तुत यह बजट नेपाल का पहला आधिकारिक बजट था। उस समय राणा शासन के कारण राज्य संचालन में बहिष्कार था और राजस्व तथा खर्च की जानकारी किसी के पास नहीं थी।

2007 साल में प्रजातंत्र स्थापना के बाद सुवर्ण शमशेर ने बजट में लिखा है, ‘अब देश में लोकतांत्रिक और जवाबदेह सरकार होने के कारण राष्ट्र की आय और व्यय के बारे में खुद तथा विश्व को जानकारी मिल सकेगी।’ उन्होंने प्रजातंत्र के प्रथम अर्थमंत्री होने के नाते इतिहास में पहला बजट पेश कर पाने पर गर्व महसूस किया।

पहले बजट में 2007 साल के अनुमानित आय और खर्च का उल्लेख था; आय 2 करोड़ 90 लाख और खर्च 2 करोड़ 46 लाख रूपये। इस बजट का कुल आकार 5 करोड़ 25 लाख रूपये था और अनुमानित आय 3 करोड़ 5 लाख थी।

राणा शासन की शोषित जनता को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने के पहले कदम के रूप में यह बजट स्वर्ण अक्षरों में नेपाल के इतिहास में अंकित है।

2016/17: जननिर्वाचित सरकार द्वारा पहला बजट – करों में प्रारंभिक पहचान

जननिर्वाचित सरकार का पहला बजट 2016/17 में प्रस्तुत किया गया। तत्कालीन उपप्रधानमंत्री तथा अर्थमंत्री सुवर्ण शमशेर ने 25 साउन 2016 को संसद में बजट पेश किया।

इस बजट में लोकतंत्र के बाद 7-8 वर्षों तक राजनीतिक अस्थिरता की बात की गई थी, जिससे आम जनजीवन में सुधार के लिए पर्याप्त परिणाम नहीं निकले थे। इस समय नेपाल में पंचवर्षीय योजना भी शुरू हुई थी।

इस बजट से सरकार ने पहली बार आयकर लगाना शुरू किया। व्यापार लाभ या वेतन पर कर लगाया गया। बीपी कोइरालाकी सरकार ने जमीन पर मालपोत कर भी लगाया। उस समय का बजट 24 करोड़ 89 लाख रूपये था। कृषि, पेयजल, ग्रामीण विकास और व्यापार को प्राथमिकता दी गई थी।

2041/42: उदार वित्तीय नीति – निजी बैंक खोलने का मार्ग प्रशस्त

26 असार 2041 को अर्थमंत्री डॉ. प्रकाशचन्द्र लोहनी ने उदार वित्तीय नीति सहित 2041/42 का ऐतिहासिक बजट पेश किया। इस बजट ने निजी क्षेत्र के अनुकूल पहल की।

मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए डॉ. लोहनी ने नए बैंक खोलकर वित्तीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की नीति अपनाई। इस बजट में वाणिज्य बैंक अधिनियम संशोधन, फाइनेंस कंपनी खोलने की सुविधा और कृषि में निवेश अनिवार्य किया गया। बजट का आकार 6 अरब 80 करोड़ रूपये था।

2048/49: आर्थिक उदारीकरण और खुली बाजार अर्थव्यवस्था की नीति

गिरिजाप्रसाद कोइराला नेतृत्व में अर्थ राज्य मंत्री महेश आचार्य ने 27 असार 2048 को इस बजट को जारी किया, जो आर्थिक उदारीकरण की महत्वपूर्ण दस्तावेज था। इसने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई और व्यापार, विद्युत, बैंकिंग, हवाई सेवा और मीडिया में निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित किया।

इस बजट ने सार्वजनिक संस्थानों में निवेश में कटौती कर निजीकरण शुरू करने तथा प्रबंधन सुधार की घोषणा की। निजी वित्त कंपनी और वाणिज्य बैंक खोलने की अनुमति दी गई। विदेशी मुद्रा का प्रावधान भी सरलीकृत किया गया। बजट का आकार 26 अरब 64 करोड़ रूपये था।

2051/52: सामाजिक सुरक्षा और ‘अपने गाँव खुद बनाएं’

आर्थिक वर्ष 2051/52 के बजट को दो बार प्रकाशित किया गया। पहला 31 असार को महेश आचार्य ने पेश किया और बाद में एमाले नेतृत्व की अल्पमत सरकार ने 11 पुष को भरतमोहन अधिकारी के माध्यम से पूरक बजट प्रस्तुत किया।

इस बजट ने गाँव को विकास का केंद्रबिंदु बनाने की नीति अपनाई और सीधे गाँव विकास समितियों को बजट भेजने की व्यवस्था की। सामाजिक सुरक्षा के पायलट परियोजना के तौर पर पांच जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत कार्यक्रम शुरू किया गया, जबकि अगले वर्ष 75 जिलों में 75 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को मासिक भत्ता प्रदान करने की घोषणा की गई।

सार्वजनिक संसाधनों के उचित उपयोग और योजना क्रियान्वयन में सुधार लाने के लिए कानूनी प्रयास भी इसी बजट से शुरू हुए। बजट का आकार 42 अरब 69 करोड़ रुपये था।

2065/66: महत्वाकांक्षी बजट और ‘तेज आर्थिक विकास’

2062/63 के आंदोलन के बाद पहली जननिर्वाचित सरकार ने डॉ. बाबुराम भट्टराई के नेतृत्व में 2065/66 का महत्वाकांक्षी बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा था, ‘एक युग से दूसरे युग में बड़ा छलांग लगाने के लिए कुछ जोखिम उठाना जरूरी है।’

इस बजट में पहली बार 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया। निवेश बोर्ड स्थापना का निर्णय लिया गया और पूर्वराजा की संपत्ति जनता के हित में खर्च करने की घोषणा की गई। सामाजिक सुरक्षा भत्ता वर्गीकरण के साथ विभिन्न समुदायों के लिए भत्ता नीति लाई गई।

बजट ने आधारभूत संरचना विकास को प्राथमिकता दी और कर्मचारियों का वेतन समान किया। 2 खरब 36 अरब रुपये के इस बजट का आकार पूर्व के मुकाबले कहीं बड़ा था।

2072/73: रामशरण महत का ‘विश्व का श्रेष्ठ अर्थमंत्री’ बनाने वाला बजट

2072 के विनाशकारी भूकंप के बाद की आपदा के बीच अर्थमंत्री डॉ. रामशरण महत ने 2072/73 का बजट प्रस्तुत किया। भूकंप के बाद पुनर्निर्माण में आक्रामक वृद्धि करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों तथा 4 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता कायम की।

यह बजट सिर्फ पुनर्निर्माण का प्रतीक ही नहीं बल्कि वित्तीय पहुँच विस्तार और निवेश प्रोत्साहन का आरंभ था। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण कोष की स्थापना की गई और 74 अरब रुपये का आवंटन किया गया। निजी आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता योजना और निवेश सम्मेलन की भी घोषणा की गई। इस आर्थिक वर्ष का बजट 8 खरब 19 अरब रुपये के बराबर था।