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तराई मधेश को दो प्रदेशों में विभाजन की मांग

१३ जेठ, काठमाडौँ । तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी (तमलोपा) ने सरकार से सम्पूर्ण मधेश को दो प्रदेशों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। पार्टी के अध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल के नेतृत्व वाली तमलोपा ने संविधान संशोधन बहस पत्र तैयार करने वाली कार्यदल को समग्र मधेश को पुनः पूर्वी और पश्चिमी मधेश के नाम से दो प्रदेशों में विभाजित करने का प्रस्ताव दिया है। पार्टी का कहना है कि अठार जिलों को मधेश प्रदेश में रखकर बाकी जिलों को अन्य प्रदेशों में शामिल करने से मधेश और थरूहट के लोगों को अपमानित महसूस हो रहा है।

संविधान जारी होने के बाद से ही प्रदेशों के सीमांकन विवादास्पद बने रहने का उल्लेख करते हुए तमलोपा ने कहा, ‘मधेश के आठ जिलों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों को जबरदस्ती अन्य प्रदेशों में समाहित किया गया है। यहाँ के मधेश और थरूहट के लोग अपनी पहचान और स्वशासन के अधिकार में अपमान महसूस कर रहे हैं। हम समग्र मधेश को पूर्वी और पश्चिमी मधेश के रूप में दो प्रदेशों में पुनः सीमांकन की मांग करते हैं।’ तमलोपा ने संविधान संशोधन संबंधी निर्वाचन प्रणाली, शासन स्वरूप सहित आठ बिंदुओं पर सुझाव भी प्रस्तुत किए हैं। पार्टी संघीयता को मजबूत बनाने पर जोर देती है।

सुझाव पत्र में लिखा है, ‘संविधान संशोधन द्वारा संघीयता को कमजोर करने या इसका स्वरूप बदलकर शक्तियों के केंद्रीकरण का कोई प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।’ प्रदेश को निर्वाचन क्षेत्र मानकर पूर्ण समानुपातिक प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया गया है। ‘प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा के निर्वाचन में प्रदेश को निर्वाचन क्षेत्र मानते हुए पूर्ण समानुपातिक प्रणाली लागू की जाए,’ पार्टी ने कहा है। राष्ट्रीय सभा में भी जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है। तमलोपा ने नेपाल के शासन स्वरूप के लिए ‘वेस्टमिन्स्टर बहुदलीय संसदीय लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था’ को सबसे उपयुक्त बताया है। साथ ही स्थानीय सरकार के चुनाव गैरदलीय आधार पर कराने की व्यवस्था करने का सुझाव भी तमलोपा ने दिया है।