मधेश प्रदेश की मिट्टी में गंभीर स्वास्थ्य समस्या, सुधार के लिए सरकार की पहल

केंद्रीय कृषि प्रयोगशाला के अध्ययन के अनुसार मधेश प्रदेश की ५४.७ प्रतिशत मिट्टी में अम्लता की वृद्धि से उत्पादकता में गंभीर गिरावट आई है। मधेश प्रदेश की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा घटकर १.९४ प्रतिशत रह गई है, जबकि स्वस्थ मिट्टी के लिए यह मात्रा ५ प्रतिशत आवश्यक होती है। मिट्टी के स्वास्थ्य सुधार और अम्लीयता घटाने के लिए सरकार ने मधेश में ५० प्रतिशत अनुदान पर ढैंचों के बीज और कृषि चुन वितरण प्रारंभ किया है। १३ जेठ, काठमांडू।
नेपाल के अन्न भंडार माने जाने वाले मधेश प्रदेश की मिट्टी की seहत की स्थिति वर्तमान में काफी चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। केंद्रीय कृषि प्रयोगशाला द्वारा मधेश के विभिन्न जिलों में किए गए स्थलीय अध्ययन और मिट्टी परीक्षण के नतीजों ने मिट्टी की उत्पादकता में गंभीर गिरावट को दर्शाया है। प्रयोगशाला के वरिष्ठ मिट्टी विशेषज्ञ नेत्रप्रसाद भट्ट के अनुसार मधेश प्रदेश के धनुषा और सिरहा जिलों के १० स्थानीय तह के किसानों के साथ प्रत्यक्ष साक्षात्कार, स्थलीय निरीक्षण और मिट्टी के नमूने एकत्रित किए गए थे।
अध्ययन के दौरान मिट्टी में कठोरता बढ़ना, सूखे की स्थिति, कम जल धारण क्षमता और फसल की जड़ के विकास में कमी पाई गई। भट्ट के अनुसार किसानों ने बताया कि पहले की तुलना में अधिक मात्रा में उर्वरक उपयोग करने के बावजूद भी फसल की पैदावार घट रही है। किसानों में मिट्टी की समस्या के कारण उत्पादन कम होने की सामान्य जानकारी तो है, परंतु समस्याओं के तकनीकी कारणों की समझ अत्यंत कम है।
