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रास्वपा सभापति तथा १७ सांसदों के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने की जांच की सिफारिश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रीय स्वतन्त्4d पार्टी के सभापति रवि लामिछाने और १७ सांसदों के खिलाफ २३ और २४ भदौ की घटनाओं में जांच करने की सिफारिश की है। आयोग के अनुसार, लामिछाने का नख्खु कारागार से निकलते समय कैदियों को बाहर भेजने में संलिप्तता थी और उनकी अभिव्यक्तियों ने प्रदर्शन को भड़काया, इसलिए जांच आवश्यक मानी गई है। आयोग की सदस्य लिली थापा के संयोजन में गठित समिति ने मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जांच करके रिपोर्ट प्रकाशित की है।

रास्वपा के सांसद सुधन गुरुङ, दीपक बोहरा, गणेश कार्की, सुलभ खरेल, शिव यादव, बब्लु गुप्ता, कृष्णकुमार कार्की, डॉ. तोसिमा कार्की, राजीव खत्री, केपी खनाल, आशिका तामाङ, ज्वाला संग्रौला, सोम शर्मा और पुरुषोत्तम यादव के खिलाफ भी जांच की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही, रास्वपा के केंद्रीय सदस्य खेमराज साउद और बाजुरा से रास्वपा के उम्मीदवार हेमराज थापा के खिलाफ भी जांच की सिफारिश की गई है।

आयोग ने बताया कि २३ और २४ भदौ की घटनाओं में हुए मानवीय और भौतिक क्षति के साथ-साथ सांसदों की अभिव्यक्तियों के कारण प्रदर्शनकारियों में आक्रोश या उत्तेजना उत्पन्न हुई या नहीं, इस पर जांच आवश्यक है। आयोग ने भदौ २३ के प्रदर्शन में हुए दमन और उसके अगले दिन की घटनाओं की छानबीन कर रिपोर्ट प्रकाशित की है।