
१४ जेठ, काठमाडौं । सहकारी संस्थाओं द्वारा एक ही व्यक्ति को १४ करोड़ रुपये तक ऋण दिए जाने का तथ्यांक सार्वजनिक हुआ है। यह जानकारी सहकारी बेथिति जांचबूझ आयोग के अध्ययन से सामने आई है। आयोग के अनुसार, एक व्यक्ति को एक ही दिन में सहकारी संस्थाओं ने एक करोड़ रुपये तक ऋण प्रदान किया है। इसमें ४९ लाख और ५१ लाख के दो अलग-अलग कारोबारों के माध्यम से एक ही दिन में ऋण दिया गया है।
आयोग की रिपोर्ट में उल्लेख है कि ४९ प्रतिशत से अधिक संचालक समिति के सदस्यों ने संस्थाओं से ऋण लिया है। ‘‘एक ही दिन में एक ही व्यक्ति को ४९ लाख और ५१ लाख के ऋण देकर कुल एक करोड़ रुपये से अधिक ऋण निवेश किया गया है,’’ रिपोर्ट में कहा गया है। इसके अतिरिक्त, सहकारी संस्थाओं ने ऋण हानि कोष में पर्याप्त राशि व्यवस्था किए बिना ही लाभ दिखाकर लाभांश वितरण किया है, यह भी आयोग ने उजागर किया है।
सहकारी संस्थाओं के कारोबार विवरण संग्रहीत करने वाले सॉफ्टवेयर में संचालकों द्वारा अनियमितता करना आसान बनाने के लिए दो अलग-अलग विवरण रखे जाते हैं, आयोग ने यह जानकारी दी है। आयोग ने कहा है कि ‘‘अरबों का कारोबार करने वाले सहकारी संस्थाओं के प्रबंधकों की योग्यता एसएलसी तक सीमित होती है’’ और पदाधिकारियों द्वारा अपने परिवार के सदस्यों और नजदीकी रिश्तेदारों को ऋण दिए जाने के कारण पूरे सहकारी क्षेत्र में समस्या उत्पन्न हो रही है।
आयोग ने सहकारी संस्थाओं का अनुगमन कर रिपोर्ट पेश की है, जिसके बाद संस्थाओं के पदाधिकारियों को विभाग में बुलाकर बातचीत की जाती है और कानूनी व्यवस्था के तहत निर्देश तथा सुझाव दिए जाते हैं। तथापि, सहकारी विभाग इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं देता या कार्रवाई नहीं करता है, यह बात भी आयोग ने सामने लाई है।
