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सदस्यता नवीनीकरण के नाम पर कार्यकर्ताओं में भय फैलाना उचित नहीं: सिंह

समाचार सारांश

सामग्री को सम्पादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाली कांग्रेस के नेता प्रकाशमान सिंह ने पार्टी को संस्थापक नेताओं द्वारा निर्धारित मूल्य–मान्यताओं और आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
  • सिंह ने बताया कि पार्टी के भीतर विशेष और नियमित महाधिवेशन के समर्थक दो समूह दिख रहे हैं इसलिए 15वें महाधिवेशन को एकता का महाधिवेशन बनाना आवश्यक है।
  • उन्होंने कार्यकर्ताओं में सदस्यता नवीनीकरण के नाम पर डर उत्पन्न न करने और तकनीक के दुरुपयोग से प्रक्रिया उलटने की प्रवृत्ति रोकने का चेतावनी दी है।

14 जेठ, काठमाण्डौ। नेपाली कांग्रेस के नेता प्रकाशमान सिंह ने पार्टी को संस्थापक नेताओं द्वारा निर्धारित मूल्य–मान्यताओं और आदर्शों के अनुसार आगे बढ़ाने का आग्रह किया है।

धनुषा क्षेत्र संख्या 3 के क्षेत्रीय सभापति स्वर्गीय श्यामनिधि यादव की श्रद्धांजलि सभा में संबोधन करते हुए सिंह ने पार्टी में विधि के शासन को स्थापित करना वर्तमान में सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

नेता सिंह ने कहा कि नेपाली कांग्रेस को नेतृत्व करते हुए वर्तमान संविधान की रक्षा के साथ-साथ जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पार्टी को अपनी कमजोरियों को सुधारना होगा।

पार्टी के आंतरिक विवादों और आगामी 15वें महाधिवेशन के विषय पर चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि पार्टी फिलहाल दो धाराओं में विभाजित है। विशेष महाधिवेशन और नियमित महाधिवेशन के समर्थकों के दो समूह देखे जा रहे हैं, इसलिए उन्हें 15वें महाधिवेशन को ‘एकता का महाधिवेशन’ बनाना चाहिए।

इसके लिए दोनों पक्षों का विश्वास जीतकर, एक साझा और भरोसेमंद संयंत्र बनाकर ही महाधिवेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, उनकी राय है।

उन्होंने कहा, ‘हमारे सम्मानित संस्थापक नेताओं ने जिस संस्कार और मूल्य–मान्यताओं के आधार पर कांग्रेस की स्थापना की थी, उसे जीवित रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। 15वें महाधिवेशन के लिए सदस्यता नवीनीकरण और नया वितरण समाप्त होने के बाद पुनः अद्यतन करने के नाम पर कार्यकर्ताओं में भय और आतंक फैलाना उचित नहीं है।’

प्रौद्योगिकी के उपयोग के नाम पर विधि और प्रक्रिया का उल्लंघन कर केवल अपने समर्थकों को ही स्थान देने की प्रवृत्ति से पार्टी कमजोर होगी, उनका चेतावनीभरा कहना है।

देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और लोकतांत्रिक प्रणाली पर हो रही चुनौतियों का सामना करने के लिए कांग्रेस को एकजुट होना चाहिए, उनका तर्क है।