Skip to main content

ऊर्जा बजट में प्राथमिकताएं: प्रसारण लाइन और प्राधिकरण विभाजन पर चर्चा

समाचार सारांश सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में ऊर्जा और सिंचाई क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए नेपाल विद्युत् प्राधिकरण को तीन कंपनियों में विभाजित करने की घोषणा की है। स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों के संगठन नेपाल ने बजट को सकारात्मक माना है, लेकिन नए विद्युत् खरीद समझौते को खोलने के मुद्दे पर स्पष्टता न होने की बात कही है। प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निदेशक प्रवल अधिकारी ने प्रसारण लाइन के बजट को सकारात्मक माना, लेकिन प्राधिकरण के विभाजन और अनुमति पत्र रद्द करने के निर्णय पर संशय व्यक्त किया है।

१५ जेठ, काठमांडू। सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट में ऊर्जा और सिंचाई क्षेत्र में बड़े निवेश और संरचनात्मक सुधार करने की घोषणा की है। ऊर्जा उत्पादन, प्रसारण और वितरण के लिए ८५ अरब ५४ करोड रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसके तहत हेटौंडा–ढल्केवर–इनरुवा ४०० केवी प्रसारण लाइन का कार्यान्वयन किया जाएगा और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रसारण लाइन विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी। राहुघाट, तनहुँ, माथिल्लो त्रिशूली–३ बी समेत कई जलविद्युत परियोजनाओं को तीव्रता देने तथा बुढीगण्डकी और दूधकोशी जलाशययुक्त योजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है।

नेपाल विद्युत् प्राधिकरण को उत्पादन, प्रसरण और वितरण/व्यापार के लिए तीन कंपनियों में विभाजित करने की घोषणा भी की गई है। निजी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय विद्युत् व्यापार एवं प्रसारण लाइन निर्माण में भागीदारी के लिए नीति बनाई गई है। बजट में ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा आधारित उद्योग को भी प्राथमिकता दी गई है। आगामी वर्ष ६७० मेगावाट जलविद्युत् और ३७० मेगावाट सौर ऊर्जा जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सिंचाई क्षेत्र में १५,८०० हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर सिंचाई सुविधा का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है। सिक्टा, बबई, सुनकोशी–मरिण, महाकाली और रानी–जमरा–कुलरिया जैसी जलस्रोत परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अरबों रुपये का बजट आवंटित किया गया है। नदी नियंत्रण, भूमिगत तथा लिफ्ट सिंचाई विस्तार को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

निजी ऊर्जा उत्पादकों ने इस बजट को सरकार की नीति में सुधार, रूपांतरणकारी और ऐतिहासिक बताते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संगठन नेपाल (इप्पान) के उपाध्यक्ष उत्तम भ्लोन लामाले ऊर्जा क्षेत्र के बजट को सकारात्मक बताया। उन्होंने ऊर्जा और जलविद्युत क्षेत्र के वन संबंधी विषयों के शामिल होने को रूपांतरणकारी करार दिया। लामाले इस बजट को ‘कोर्स करेक्शन और परिवर्तनकारी’ बताया।

सरकार द्वारा नए विद्युत खरीद समझौतों (पीपीए) को खोलने विषय पर स्पष्टता न देने से अस्पष्टता पैदा हुई है, उनका कहना है। ‘‘सरकार ने नया पीपीए खोलने का उल्लेख किया है जो ३०,००० मेगावाट का है, लेकिन इसका समय स्पष्ट नहीं है,’’ उन्होंने कहा। निजी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बिजली व्यापार में शामिल करने के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से और जानकारी की आवश्यकता बताई।

नेपाल विद्युत् प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निदेशक प्रवल अधिकारी ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र के बजट पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रसारण लाइन के बजट को ‘‘अत्यंत सकारात्मक’’ बताया, लेकिन प्राधिकरण के विभाजन और अनुमति पत्र रद्द करने के निर्णय पर ‘‘चिंता और संशय’’ व्यक्त किया। अधिकारी ने कुछ पहलुओं को उत्साहजनक सराहा, परन्तु कार्यान्वयन में चुनौतियां और कुछ नीतियाँ विवादास्पद हो सकने का संकेत दिया।

अधिकारी ने इस बजट का सबसे मजबूत पक्ष प्रसारण लाइनों में निवेश को बताया। कुल ८५ अरब के ऊर्जा बजट में से ७० अरब निर्माणाधीन प्रसारण लाइनों और सब-स्टेशन के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसे उन्होंने ‘‘अत्यंत प्रशंसनीय’’ कदम कहा। ‘‘नेपाल की ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती प्रसारण लाइन है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने २०३५ तक के लिए तय ऊर्जा रोडमैप के अनुसार वार्षिक ८५ अरब रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें ७० अरब का आवंटन लक्ष्य के करीब पहुंचना है। यह निजी क्षेत्र और उत्पादन हो रही बिजली के प्रवाह में बड़ी सहायता करेगा।’’

बजट में विद्युत खरीद समझौता की परियोजना अनुमति पत्र के रद्द करने और नई प्रक्रिया शुरू करने के प्रावधान पर अधिकारी ने सवाल उठाए। प्राधिकरण के अनुसार, लगभग १३४ परियोजनाएं हैं जिनकी क्षमता करीब २,९०० मेगावाट है। ‘‘क्यों निर्माण शुरू नहीं हो सका या वित्तीय प्रबंधन में असमर्थता क्यों हुई, इसका विश्लेषण किए बिना अनुमति पत्र रद्द करने से समय और संसाधन बर्बाद हो सकते हैं। नई अनुमति लेना और पीपीए प्रक्रिया सरकार के १० वर्ष में ३०,००० मेगावाट लक्ष्य को पूरा करने में बाधा बन सकती है। राज्य को सहायता देकर निर्माण में लाना बुद्धिमानी होगी,’’ उन्होंने सुझाव दिया।

सरकार द्वारा विद्युत प्राधिकरण के उत्पादन, प्रसारण और वितरण में विभाजन की घोषणा पर अधिकारी ने कहा, ‘‘पहले भी इस विषय पर बात हुई, लेकिन ९७ प्रतिशत विद्युतीकरण के साथ एक लाभार्थी संस्था को कर्मचारी सुविधाओं आदि का अध्ययन किए बिना विभाजित करना व्यवहारिक चुनौतियां लाएगा।’’

बजट ने पहली बार जलाशययुक्त परियोजनाओं में निजी क्षेत्र को १०० प्रतिशत निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए ४० प्रतिशत शेयर सर्वसाधारण को देने का प्रावधान रखा है। अधिकारी ने इसे सकारात्मक शुरुआत कहा। हालांकि, बिजली किसे और किस मूल्य पर मिलेगी इसकी गारंटी न होने पर निजी क्षेत्र के लिए बड़े जलाशययुक्त परियोजनाओं में निवेश आकर्षक नहीं होगा, उन्होंने बताया।

बजट में सूखे मौसम के लिए प्रतिस्पर्धात्मक पीपीए करने का प्रावधान है, लेकिन बरसात के मौसम की बिजली के संबंध में चुप्पी रहने पर अधिकारी ने चिंता जताई। ७० अरब रुपये के प्रसारण लाइन आवंटन ने ऊर्जा क्षेत्र में आशा जागाई है, लेकिन अनुमति पत्र रद्द करने की नीति और प्राधिकरण के विभाजन से अन्योल पैदा हुआ है, अधिकारी ने कहा। बुढीगण्डकी जैसे बड़े आयोजन में प्रशासनिक संरचना के साथ-साथ निवेश के स्पष्ट तरीके भी आवश्यक हैं।