
समाचार सारांश
समीक्षित एवं संपादित।
- अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने संघीय संसद में आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के लिए २१ खरब २४ अरब ३४ करोड़ रुपये के बजट का प्रस्तुतीकरण किया है।
- सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के कुल बजट में पूंजीगत खर्च के लिए ४ खरब ३१ अरब १० करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
- बजट में प्रशासनिक खर्चों में कटौती के लिए ३१ गैरजरूरी सरकारी निकायों के उन्मूलन की घोषणा की गई है।
१५ जेठ, काठमांडू। कुल बजट में पूंजीगत खर्च का हिस्सा घटाते हुए सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ का बजट सार्वजनिक किया है।
अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने संघीय संसद की संयुक्त बैठक में प्रस्तुत किया गया बजट २१ खरब २४ अरब ३४ करोड़ रुपये का है।
सरकार ने चालू आर्थिक वर्ष २०८२/८३ के संशोधित अनुमान की तुलना में बजट का आकार २५.२ प्रतिशत बढ़ाया है, फिर भी पूंजीगत खर्च में वृद्धि नहीं हुई है।
आगामी वर्ष पूंजीगत खर्च के लिए कुल बजट का २०.३ प्रतिशत, अर्थात ४ खरब ३१ अरब १० करोड़ रुपये आवंटित किया गया है।

चालू वर्ष के बजट में पूंजीगत खर्च का हिस्सा २०.८ प्रतिशत था। सरकार ने बजट में सुधार के कई आकर्षक कार्यक्रम शामिल किए हैं, लेकिन संरचनात्मक समस्याएं अब भी बरकरार हैं।
क्योंकि कुल स्रोतों का ७९.७ प्रतिशत बजट सामान्य खर्च और ऋण भुगतान में खर्च होना आवश्यक है, इसलिए अर्थशास्त्रियों द्वारा अर्थमंत्री के प्रस्तुत बजट से पूरी संतुष्टि होना स्वाभाविक नहीं है।
अर्थशास्त्री प्रो. डॉ. रेशम थापा ने आंतरिक ऋण लेकर बजट विस्तार करने की प्रवृत्ति को दीर्घकालिक रूप में उचित नहीं बताया है।
उनके अनुसार, राज्य का खर्च सामान्यतः उत्पादकशील नहीं होता। निजी क्षेत्र के निवेश को आंतरिक ऋण के माध्यम से सरकार द्वारा हड़पना अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी नहीं होता।
अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने आगामी वर्ष के लिए १२ खरब ७० अरब रुपये के चालू खर्च का अनुमान लगाया है, जो चालू वर्ष से ९० अरब रुपये अधिक है। चालू वर्ष कुल बजट का ५९.८ प्रतिशत चालू खर्च पर खर्च किया गया है।
सरकार ने इस वर्ष कर्मचारी वेतन में वृद्धि की है। कुछ सामाजिक भत्ते भी दोगुने किए गए हैं, लेकिन सामाजिक सुरक्षा व्यय में कटौती नहीं की गई।
पूर्व अर्थमंत्री डॉ. प्रकाशरण महत ने राजस्व लक्ष्य एवं विदेशी ऋण प्राप्ति के लक्ष्य को व्यवहारिक न होने का आकलन किया है। वेतन वृद्धिलाई सकारात्मक मानते हुए उन्होंने स्रोत प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बताया है।

इस वर्ष सरकार ने ६ खरब से अधिक घाटा बजट प्रस्तुत किया है। बजट की आकर्षक योजनाएं और नारे इस चुनौती को छिपाते हैं, लेकिन पूर्व मंत्री के अनुसार कार्यान्वयन में कठिनाइयां दिखेंगी। वे कहते हैं, ‘राजस्व जुटाना भी कठिन है और खर्च क्षमता सीमित है। भले ही हम दो-तिहाई सरकार हों, संभवता यह पूरा करना मुश्किल होगा।’
सरकार ने आगामी वर्ष के २१ खरब २४ अरब के बजट के लिए राजस्व संग्रह १४ खरब ५ अरब रुपये अनुमानित किया है। विदेशी अनुदान ६१ अरब ७४ करोड़ रुपये रखा गया है, जो चालू वर्ष के ५३ अरब ४५ करोड़ रुपये से अधिक है।
अर्थमंत्री ने इन अनुमानों को असंभव बताते हुए आलोचना की है। आगामी वर्ष सरकार ने आंतरिक ऋण के रूप में ४ खरब १० अरब और बाहरी ऋण के रूप में २ खरब ४७ अरब रुपये शामिल करने का लक्ष्य रखा है।
राष्ट्रीय योजना आयोग ने आगामी वर्ष के लिए १८ खरब ९० अरब रुपये की सीमा निर्धारित की थी। अर्थशास्त्री और आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. प्रकाश श्रेष्ठ ने यथार्थवादी और कार्यान्वयन योग्य बजट बनाने की आवश्यकता बताई है।
उन्होंने कहा कि नई सरकार, नए जनादेश और नई कार्ययोजना के साथ बजट का आकार बढ़ाया गया है। यदि यह बजट खर्च हो सके तो असंभव नहीं है।
वे कहते हैं, ‘पिछले दिनों की तरह बजट लाकर विस्तार किया जाएगा लेकिन कार्यान्वयन में कमी के कारण मध्यावधि मूल्यांकन में कटौती की जाएगी, जो समस्या उत्पन्न करेगी।’
सुधार प्रयास से आशावादी बजट
सरकार ने इस बार सुधार को प्राथमिकता दी है। पूर्व अर्थमंत्री रामेश्वर खनाल ने बजट समीक्षा करते हुए कहा, ‘बजट में सुधारात्मक कार्यक्रम प्रमुख विशेषता हैं।’
सरकार ने मध्यम वर्ग को बढ़ावा देने के तहत आयकर के निचले सीमा को हटाकर अधिकांश व्यक्तियों को लाभ पहुँचाने की कोशिश की है। कर्मचारी वेतन वृद्धि को विशेषज्ञों ने सकारात्मक कदम माना है।
सरकार ने औद्योगिक कच्चे माल के कस्टम दरों को कम से कम एक स्तर नीचे किया है, जिससे २७३ वस्तुओं का कस्टम दर घटेगा। साथ ही ३६० वस्तुओं पर लगा आंतरिक शुल्क समाप्त कर दिया गया है।
कस्टम बिंदु पर लगने वाले विभिन्न करों को एकीकृत कर हरित कर में सम्मिलित किया गया है। पूंजीगत लाभ कर को अंतिम रूप दिया गया है। मूल्य वर्धित कर वापसी प्रणाली स्वचालित बनाने की घोषणा भी हुई है।

कर पालन को दंड के रूप में नहीं बल्कि विकास का साथी बनाने का वादा करते हुए अर्थमंत्री ने कहा कि कानूनी अस्पष्टता और करदाता अज्ञानता से उत्पन्न लंबित कर विवादों का समाधान किया जाएगा।
जरूरत से अधिक सरकारी संगठन संरचना को समाप्त कर चुस्त बनाए जाने की योजना सरकार की है। इसके तहत ३१ निकाय समाप्त किए जाएंगे, ६ मर्जर, ६ हस्तांतरण और १८ निकाय की पुनर्संरचना की जाएगी।
सरकार ने लागत में कमी और दक्षता वृद्धि के लिए संस्थागत सुधार, निवेश प्रोत्साहन, आर्थिक सुधार और सहज सेवा वितरण के लिए नीति और कानूनी व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। कार्यगत सुधार पूंजीगत खर्च में गति और ताल लाने का वचन अर्थमंत्री का है।
उद्यमी अंबिकापुरसाद पौड़ेल ने पूंजीगत खर्च के पूर्ण उपयोग के लिए अर्थमंत्री से पहल करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में बजट सुनकर कई बार प्रसन्नता हुई, लेकिन अब और अधिक उत्साहित हैं। उन्होंने लिखा, ‘मेरा केवल एक ही इच्छा है कि पूंजीगत खर्च पूरी तरह से हो, कर कानून में कोई द्विविधा न हो और पिछले कर बकाया को ७० प्रतिशत से घटाकर ७ प्रतिशत रखा जाए।’
पूर्व अर्थ राज्यमंत्री उदयशमशेर राणा ने ६ खरब ५७ अरब ऋण वृद्धि के साथ प्रस्तुत बजट में केवल ४ खरब ३१ अरब पूंजीगत खर्च आवंटित किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक ऋण २२.४१ प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन बजट उत्पादन, रोजगार और व्यापार घाटा घटाने में कमजोर है।
२२ प्रतिशत बड़ा बजट आकार विशेषज्ञों को महत्वाकांक्षी दिखा, लेकिन कार्यान्वयन क्षमता के आधार पर कई सवाल उठने की संभावना है, यही उनका मत है।





