
सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के लिए २१ खरब २४ अरब रुपये का बजट प्रस्तुत करते हुए ७ प्रतिशत आर्थिक विकास का लक्ष्य रखा है। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा १० लाख रुपये करने की घोषणा की है। बजट के माध्यम से आंतरिक उत्पादन संरक्षण एवं संवर्धन तथा कौशल विकास सहित ५ नए कर लगाए गए हैं। १५ जेठ, काठमांडू।
इतिहास की सबसे मजबूत सरकार बनने के बाद अर्थव्यवस्था में बड़ा ‘डिपार्चर’ होने की उम्मीद कई लोगों को थी। लेकिन, क्या आपने सड़क या परिवहन में कोई क्रांतिकारी परियोजना देखी? नहीं, देखी नहीं। बल्कि पिछले वर्ष के मुकाबले बजट ही कम हुआ है। जलविद्युत या सिंचाई में ऐसी कोई बड़ी परियोजना दिखी? वह भी नहीं। शिक्षा देश का भविष्य बनाती है। क्या शिक्षा में कोई रूपांतरणकारी योजना आई? आई नहीं। शिक्षा के लिए बजट का अनुपात घटा है। शिक्षा में २० प्रतिशत बजट आवंटित करने की मान्यता है, लेकिन बजट के कुल १० प्रतिशत ही आवंटित हुआ है।
सरकार ने पाँच वर्षों में १५ लाख रोजगार सृजित करने का वचन दिया है, यानी हर वर्ष ३ लाख रोजगार। रोजगार सृजन के लिए बड़ी मात्रा में देशी और विदेशी निवेश आकर्षित होना आवश्यक है। लेकिन, क्या आपने विदेशी निवेश के लिए कोई आकर्षक योजना सुनी? नहीं सुनी। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले बार-बार कहते थे कि वे एक रूपांतरणकारी बजट लाएंगे। जेनेरिक जन आंदोलन के बल पर प्राप्त प्रचण्ड बहुमत वाली इस सरकार के पास इस डिपार्चर का अवसर था, लेकिन अर्थमंत्री वाग्ले ने इस मौके को गंवा दिया है।
अर्थमंत्री वाग्ले ने इस बजट में शुरुआत से ही बदलाव किया है। वह है- बजट लेखन की पारंपरिक शैली छोड़कर नई शैली अपनाना। उद्यम-व्यवसाय को राहत देने और मध्यम वर्ग का विस्तार कर समग्र अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने के लिए उन्होंने कर दरों के व्यापक पुनरीक्षण की घोषणा की है। उन्होंने व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा १० लाख रुपये करने तथा सर्वोच्च दर ३९ प्रतिशत से घटाकर २९ प्रतिशत करने की घोषणा की है। २७३ प्रकार की कच्ची सामग्रियों के कर कम किए गए हैं, ११ स्तर के करों को ७ स्तर में लाया गया है, ३६० वस्तुओं पर अंतःशुल्क हटा दिया गया है, ऐसे आकर्षक पहलुओं का उल्लेख बजट वक्तव्य में है। लेकिन कर संबंधी कानूनी व्यवस्था वाली आर्थिक विधेयक देखने पर पता चलता है कि यह सुधार नहीं, बल्कि प्रतिगामी कर नीति है।
नेपाल ने २०५४ साल में विभिन्न नामों से रंगीन कर हटा कर एक-एकल बिक्री कर के रूप में वैट शुरू किया था। लेकिन इस बजट ने मीठे नामों के पीछे फिर से पाँच नए रंगीन कर लगाए हैं। वे हैं – आंतरिक उत्पादन संरक्षण एवं संवर्द्धन शुल्क, कौशल विकास शुल्क, स्वच्छ अवसंरचना शुल्क, शिक्षा समता शुल्क और स्वास्थ्य संवर्द्धन शुल्क।
अर्थमंत्री वाग्ले ने ६० सरकारी संस्थानों को बंद, हस्तांतरण या पुनर्गठन करके सरकार को चुस्त-दुरुस्त बनाने की घोषणा की है, जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इससे बचाए गए बजट को बढ़ाए गए खर्च को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। निवेश बढ़ाने के लिए घोषित कार्यक्रम कोई नई योजना नहीं हैं।
सरकार ने आगामी वर्ष के लिए ७ प्रतिशत आर्थिक विकास लक्ष्य रखा है, जिसे प्राप्त करने के लिए निवेश का विस्तार आवश्यक है। एक ओर सरकार की खर्च करने की क्षमता कमजोर है, वहीं दूसरी ओर निजी निवेश को भी प्रोत्साहित नहीं किया गया। ऐसे में आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा।





