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‘देश की जिम्मेदारी पाने पर जेट विमान की तरह आसानी से उड़ाने वाले खोखले आदर्श बहुत हैं’

समाचार सारांश

  • रेडियो कार्यक्रम ‘श्रुति सम्बेग’ के मशहूर प्रस्तोता अच्युत घिमिरे ने अपनी स्पष्ट और भावपूर्ण आवाज के माध्यम से नेपाली साहित्य को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • उन्होंने संचार माध्यमों द्वारा गलत समाचार को सत्य मानकर प्रसारित करने और पत्रकारिता के अस्तित्व पर संकट के विषय में चिंता व्यक्त की है।
  • भविष्य की पीढ़ी को उन्होंने सलाह दी है कि चाहे कोई भी नई तकनीक आ जाए, शारीरिक मेहनत करना जरूरी है और इंसान होकर जीना आवश्यक है।

शायद कई लोग अच्युत घिमिरे को उनके असली नाम से ज्यादा उनकी आवाज से पहचानते हैं। उनकी स्पष्ट, भावपूर्ण और आकर्षक आवाज ही उनकी पहचान है। आवाज के माध्यम से उन्होंने नेपाली साहित्य को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अच्युत ने लंबे समय तक रेडियो कार्यक्रम “श्रुति सम्बेग” का संचालन किया और अब डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। वे यूट्यूब पर उपन्यास, कथा संग्रह का वाचन करते हैं। साथ ही “बुलबुल” नामक ग़ज़ल और कविता कार्यक्रम तथा एकल कविता वाचन कार्यक्रम के माध्यम से भी वे काफ़ी लोकप्रिय हैं।

इस बार हमने उनसे खुलकर बातचीत की।

१. वर्तमान

हाल ही में कौन सी बात या खबर ने खुशी दी?

प्रधानमंत्री द्वारा यूरोपियन यूनियन के राजदूतों के साथ संयुक्त बैठक करने की खबर ने खुशी दी।

कौन सी बात ने अस्वस्थ महसूस कराया?

कई मीडिया द्वारा झूठी खबरों को सच मानकर प्रकाशित और प्रसारित करने का दावा करने के बाद भी उनके पर्दाफाश के बाद असहमत होकर खंडन न करना दुखद है।

आजकल सबसे रोचक विषय या व्यक्ति कौन है?

कई लोग हैं, लेकिन संसद का विषय आजकल काफी रोचक लगता है।

नेपाली समाज का सबसे अच्छा और सबसे खराब पक्ष क्या लगता है?

सबसे खराब पक्ष हमेशा झगड़ा, अविश्वास और मारपीट है। अच्छा पक्ष मैं समाज में अंततः सहमति बनने को मानता हूँ, वह भी बिना किसी मध्यस्थता के।

पत्रपत्रिका और ऑनलाइन सामग्री कितनी देखना पसंद करते हैं? पत्रकारिता को कैसा अनुभव करते हैं?

मैं पत्रपत्रिका काफी देखता हूँ। लेकिन आज की पत्रकारिता अपना अस्तित्व खोती दिखती है। पत्रकारिता में राजनीति, सेना, पुलिस, सत्ता जैसी बातें सामान्य होनी चाहिए, लेकिन अब पत्रकारिता सामान्य होकर उनके पीछे चलने लगी है। पत्रकारिता को समाज को दिशा दिखानी थी लेकिन अब समाज और व्यक्ति पत्रकारिता से ईर्ष्या भी करते दिखते हैं।

इतिहास में लौटकर क्या काम या सुधार करना चाहेंगे?

प्रत्यक्ष प्रसारण के मामलों में सुधार करना चाहता था।

२. बचपन और किशोरावस्था

बच्चे उम्र में सबसे ज्यादा कौन सा खेल खेला करते थे?

शायद फुटबॉल खेला होगा, लेकिन ज्यादा नहीं।

आपको कौन से निकनेम दिए जाते थे?

अच्युते, बुलबुल।

दोस्तों से झगड़ा होता था?

थोड़ा बहुत होता होगा, लेकिन खास याद नहीं है।

आपका सेलिब्रिटी क्रॉस क्या है?

छोटे में सरोज खनाल, बद्री अधिकारी, सुनिल शर्मा, निशा शर्मा जैसे टेलिनाटक देखना पसंद था।

३. सिनेमा

पहली बार फिल्म देखने का अनुभव कैसा था?

चलचित्र कन्यादान हॉल में देखने का याद है, वरना राष्ट्रीय टेलीविजन से हिन्दी फिल्में।

किस तरह के फिल्में पसंद हैं?

आर्ट फिल्में, अंतरराष्ट्रीय संबंध या मनोवैज्ञानिक विषय की फिल्में।

पसंदीदा फिल्में?

दक्षिण भारतीय फिल्में अब पसंद हैं। पहले हिन्दी की सोले, लैजा मजनू, मुन्नाभाई एमबीबीएस पसंद थी। अंग्रेज़ी में होटल रुवांडा, पर्सूट ऑफ हैप्पीनेस, पर्म्यूम, टाइटैनिक पसंद हैं। नेपाली में हालिया फिल्में जैसे दयाहाङ राई की फिल्में। नाटक से आए कलाकारों की फिल्में भी पसंद हैं।

लोकप्रिय होने के बावजूद कुछ फिल्में जो पसंद नहीं आईं?

हैं, पर अब याद नहीं आ रही।

फिल्में देखने का चयन कैसे करते हैं?

मेरा स्वभाव मेल खाने वाले दोस्तों की सिफारिश से।

नेपाल में किस तरह की फिल्मों को ज्यादा बनना चाहिए?

वास्तविक जीवन सिखाने वाली, समाज सुधार और अभिमुखीकरण करने वाली फिल्में।

४. पुस्तकें

कितनी किताबें पढ़ते हैं? किस तरह की पढ़ाई करते हैं?

पहले ज्यादा पढ़ता था, अब समय कम है। चर्चा में या कुछ सीखने वाले विषय पढ़ता हूं।

पसंदीदा पुस्तकें?

काफी हैं। बीपी के सभी आख्यान, पारिजात के आख्यान, भैरव अर्याल की हास्य व्यंग्य पसंद हैं।

पसंदीदा लेखक?

बीपी, पारिजात, भैरव अर्याल, कृष्ण धराबासी, नयनराज पाण्डे। हालिया पीढ़ी से जिएस पौडेल और केशवराज ज्ञवाली।

एक दिन बिताने का मौका मिले तो कौन से पात्र के साथ बिताना चाहेंगे?

सुम्निमा की विदुषी पात्र पुलोमा के साथ बिताना चाहूंगा।

नेपाल में किस विषय पर ज्यादा पुस्तकें लिखनी चाहिए?

ऐसे विषय जिन पर पढ़कर ६० वर्षों तक दिमाग में टिकने वाली कहानी या पात्र स्थापित हों। पढ़कर सीखना आसान हो।

५. घूमना और रुचियाँ

घुमने का शौक कितना है?

बहुत पसंद है।

सबसे ज्यादा कहाँ गए हैं और कहाँ जाना चाहते हैं?

सबसे ज्यादा दुबई गए, मालदीव जाना चाहते हैं।

सबसे पसंदीदा यात्रा?

बांके का कोहलपुर।

कितने गीत सुनते हैं? पसंदीदा गायक?

सुनता हूँ। खासकर शास्त्रीय और आधुनिक गीत। दीप श्रेष्ठ, दीपक खरेल, अरुणा लामा आदि।

अभी किस गायक के गीत सुनते हैं?

सुजन चापागाई।

विशेष रुचि?

घूमना और पढ़ना।

खान-पान कैसी पसंद है? पसंदीदा व्यंजन?

जो भी हो खा सकता हूँ।

खरीददारी कैसी करते हैं?

बहुत कम।

खरीदारी कब करते हैं?

जरूरी कपड़ा खरीदते हैं।

कपड़े खुद खरीदते हैं या कोई और करता है?

खुद खरीदता हूँ।

सबसे महंगी खरीद या सेवा?

आम मध्यम वर्गीय खरीदारी करता हूँ, महंगी कोई खास याद नहीं।

६. राजनीति

नेपाल की राजनीति कैसी लगती है?

ऐसी लगती है जो नेपाली समाज को संघर्ष में डालती है।

राजनीतिक मुख्य समस्या क्या दिखती है?

शुरुआत से हमारी राजनीति अमेरिका या रूस के प्रभाव में रही। कांग्रेस या कम्युनिस्ट के द्वंद में देश नहीं चलता। नेता झूठ बोलकर सपने बेचते हैं और हकीकत में नहीं ला पाते।

१० प्रतिशत से कम लोग कांग्रेस या कम्युनिस्ट के सिद्धांत समझकर राजनीति करते हैं। केवल अपने को जानने वाले और अभिमानी बनकर देश की जिम्मेदारी पाते हैं और जेट विमान की तरह उड़ाने वाले खोखले आदर्श मौजूद हैं।

नेताओं की एक विशेषता सुधारनी हो तो क्या होती?

मैं पृथ्वी का आदमी हूँ। ८० वर्ष जीऊंगा। हजारों वर्षों से राष्ट्र चला है, मैं न रहूँ तो भी चलता रहेगा। मुझसे बेहतर जानने वाले कई हैं, मैं एक सामान्य कण हूँ, यह सोच जगानी चाहिए।

पसंदीदा या प्रभावशाली नेता?

देश सेवा के लिए बीपी, मनमोहन, पुष्पलाल, गणेशमान, कृष्णप्रसाद। वर्तमान मीडिया में गगन थापा, डॉ. सुरेन्द्र पांडे, सुशीला कार्की, रवि लामिछाने। सभी गुण एक जैसे अच्छे नहीं।

प्रधानमंत्री होते तो सबसे पहले क्या काम करते?

सबसे पहले भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन बनाना सोचता।

सामाजिक नेटवर्क और डिजिटल उपकरण

कौन सा मोबाइल इस्तेमाल करते हैं?

वनप्लस।

दिन में मोबाइल और ऑनलाइन कितना समय बिताते हैं? ज्यादा किसका उपयोग करते हैं?

लगभग ३ घंटे। फेसबुक ज्यादा चलाता हूँ। समाचार भी वहीं से देखता हूँ।

सुबह उठने पर और रात सोने से पहले फोन देखना आदत है?

हां।

नेटवर्क के अच्छे और बुरे पक्ष क्या हैं?

अच्छा है जनता को सूचना पहुंचाना और लोगों को जोड़ना। बुरा है लत लगना और गलत सूचना फैलाना।

फॉलोअर्स, लाइक, कमेंट का असर कैसा होता है?

मानव स्वभाव से लालची होता है, मुझे भी लालच होता है, लेकिन मैं केवल प्राकृतिक जुड़े फॉलोअर्स पर भरोसा करता हूँ।

एआई उपकरण कितने चलाते हैं? ज्यादा कौन सा?

बहुत कम, चैटजीपीटी थोड़ा इस्तेमाल करता हूँ।

सामाजिक नेटवर्क अभिव्यक्ति स्वतंत्रता बढ़ाते हैं या गलत सूचना फैलाते हैं?

अभी ज्यादा गलत सूचना फैलाने का दृश्य है।

सामाजिक नेटवर्क से पुस्तक और पत्रपत्रिका विस्थापित हो जाएंगी, ऐसा लगता है?

पूर्ण विस्थापन नहीं। लोगों में पढ़ने की रुचि कम हुई है।

७. रोचक तथ्य

अगर पुनर्जन्म हो तो क्या बनना चाहेंगे?

पक्षी।

तनाव कैसे कम करते हैं?

अकेले बैठकर या अधिक सोचकर।

सबसे पसंदीदा खुशबू?

रात की रानी (हसनिया) फूल।

अब तक मिला सबसे अच्छा सुझाव?

गलत मत करो, हमेशा अच्छा करो।

आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश देंगे?

जितनी भी तकनीकें आविष्कार हों, इंसान बनकर ही जीना जरूरी है। मशीन का सम्मान करो, लेकिन मेहनत मत छोड़ो। शारीरिक परिश्रम आवश्यक है।

दिल खोलकर हमारी साप्ताहिक संवाद श्रृंखला है, जिसमें विभिन्न विषयों पर नजदीक से बातचीत होती है।