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विद्युत् प्राधिकरण विभाजन की तैयारी तेज, कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां अब भी बरकरार

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद प्रदान किया गया।

  • सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के भीतर नेपाल विद्युत् प्राधिकरण को उत्पादन, प्रसारण, वितरण और व्यापार के लिए तीन अलग-अलग कंपनियों में विभाजित करने की घोषणा की है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कानून में संशोधन के बिना प्राधिकरण का पुनर्गठन संभव नहीं होगा और संपत्ति तथा कर्मचारियों के प्रबंधन को मुख्य चुनौती माना जा रहा है।
  • ऊर्जा, जलस्रोत और सिंचाई मंत्रालय ने सहायक सचिव संदीप देव की अध्यक्षता में पुनर्गठन के लिए एक अध्ययन समिति का गठन किया है।

१८ ज्येष्ठ, काठमांडू। सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के भीतर नेपाल विद्युत् प्राधिकरण के पुनर्गठन को पूरा करने की घोषणा कर दी है।

बजट वक्तव्य के साथ ही लंबे समय से चर्चा में रहे प्राधिकरण के ‘अनबंडलिंग’ प्रक्रिया को पुनः आगे बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं।

ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने २०७४ साल से ही अनबंडलिंग की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए सरकार ने पहले ही विद्युत् उत्पादन कंपनी, राष्ट्रीय प्रसारण ग्रिड कंपनी लिमिटेड और विद्युत् व्यापार कंपनी सहित अन्य कंपनियां स्थापित कर संचालन में लाया है। लेकिन सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के भीतर प्राधिकरण के खंडीकरण का समस्त कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना स्पष्ट कानूनी आधार, संपत्ति प्रबंधन और कर्मचारियों के समायोजन के पुनर्गठन में जल्दबाजी जटिलताएं पैदा कर सकती हैं।

आगामी वित्तीय वर्ष २०८३/८४ के बजट वक्तव्य में सरकार ने विद्युत् प्राधिकरण को उत्पादन, प्रसारण और वितरण तथा व्यापार के लिए तीन अलग-अलग कंपनियों में विभाजित करने की घोषणा की है।

सरकार ने विद्युत् क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार के लिए २०७४ साल से अनबंडलिंग की अवधारणा प्रस्तुत की थी। उसी समय विद्युत् उत्पादन कंपनी, राष्ट्रीय प्रसारण ग्रिड कंपनी और विद्युत् व्यापार कंपनी स्थापित की गईं, परंतु प्राधिकरण की संपत्ति, दायित्व और मानव संसाधन के हस्तांतरण में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई थी।

बिना कानून संशोधन के संभव नहीं

विद्युत् प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निदेशक शेरसिंह भाट के अनुसार बजट में उल्लेखित पुनर्गठन वास्तव में प्राधिकरण के विभाजन के समान है। परंतु इसके लिए वर्तमान नेपाल विद्युत् प्राधिकरण अधिनियम मार्ग नहीं देता, इसलिए नई कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “विद्युत् प्राधिकरण अलग विधि द्वारा स्थापित संस्था है, इसे विभाजित करने के लिए अधिनियम संशोधन या नया विद्युत् अधिनियम आवश्यक है। मौजूदा कानूनी संरचना में पुनर्गठन संभव नहीं, इसलिए सरकार नई विद्युत् अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है।”

भाट के अनुसार उत्पादन, प्रसारण और व्यापार के लिए स्थापित कंपनियों में प्राधिकरण का कुछ हिस्सा तो है, लेकिन ये सहायक कंपनियां नहीं हैं।

पहले स्थापित कंपनियों की औचित्य क्या?

प्राधिकरण के एक अन्य पूर्व उपकार्यकारी निदेशक प्रबल अधिकारी के अनुसार बजट घोषणा से और असमंजस बढ़ गया है। उनके मुताबिक उत्पादन, प्रसारण और व्यापार के लिए अलग-अलग कंपनियां पहले से ही स्थापित हैं और इनमें प्राधिकरण की बहुमत हिस्सेदारी है।

उन्होंने पूछा, “जब ये कंपनियां पहले से मौजूद हैं, तो नई संरचना बनाने का औचित्य क्या है?”

उनका कहना है कि विद्युत् व्यापार कंपनी में प्राधिकरण की ५१ प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसी स्थिति में बजट में पुनः विभाजन की घोषणा पर और स्पष्टता जरूरी है।

संपत्ति और कर्मचारियों का प्रबंधन बड़ी चुनौती

अधिकारी के अनुसार प्राधिकरण को विभाजित करने के फैसले से ज्यादा मुश्किल इसका क्रियान्वयन होगा। जलविद्युत परियोजनाएं, प्रसारण लाइन, सबस्टेशन और वितरण नेटवर्क जैसी अरबों रुपये की संपत्तियों का मूल्यांकन और वितरण कैसे होगा, यह अभी अस्पष्ट है।

साथ ही हजारों कर्मचारियों का प्रबंधन, सेवाएं, प्रशिक्षण और तकनीकी मानव संसाधन का पुनर्वितरण जैसे विषयों पर पर्याप्त तैयारी नहीं होने से संस्था कमजोर पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि बजट में विरोधाभास भी दिखाई देता है। ‘एक ओर प्राधिकरण को विशेषीकृत संस्था बनाने की बात है, वहीं दूसरी ओर मल उत्पादन या विद्युत् वाहन के पार्ट्स बनाने जैसी असंबंधित जिम्मेदारियां भी देने की बात है।’

मंत्रालय ने बनाई अध्ययन समिति

इस विषय पर अध्ययन के लिए ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने एक समिति गठित की है। पुनर्गठन की रूपरेखा तैयार करने के लिए हाल ही में सहायक सचिव संदीप देव की अध्यक्षता में यह समिति बनी है।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि समिति ने कार्यादेश (टीओआर) तैयार करना शुरू कर दिया है और संपत्ति प्रबंधन, कर्मचारी समायोजन एवं दायित्व हस्तांतरण की रूपरेखा बनाना इसका कार्य है।

“२०७४ से यह विषय उठा है, लेकिन संपत्ति, कर्मचारी और दायित्व प्रबंधन में कोई ठोस काम नहीं हुआ था,” उस अधिकारी ने कहा, “इस बार डी-मर्जर मॉडल के जरिए पूरी तरह से अलग संरचना बनाने पर अध्ययन हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि वर्तमान नेपाल विद्युत् प्राधिकरण अधिनियम २०४१ ऐसे संरचनात्मक बदलाव के लिए पर्याप्त आधार नहीं देता, इसलिए सरकार नए विद्युत् अधिनियम लाने या मौजूदा अधिनियम को प्रतिस्थापित करने के विकल्प पर विचार कर सकती है।

मंत्रालय का दावा है कि प्राधिकरण का अनबंडलिंग ऊर्जा क्षेत्र के सबसे लंबे समय से चली आ रही सुधार योजनाओं में से एक है।

समिति से उम्मीद है कि वे अगले ७ से १० दिनों में प्रारंभिक कार्ययोजना प्रस्तुत करेंगे।

मंत्रालय के अधिकारी मानते हैं कि उत्पादन, प्रसारण और व्यापार को अलग-अलग संस्थाओं के जरिए चलाने से कार्यक्षमता, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कानूनी अस्पष्टताओं, संपत्ति हस्तांतरण और कर्मचारी प्रबंधन की चुनौतियों को हल किए बिना आगे बढ़ना विद्युत क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर सकता है।

सरकार ने आगामी वर्ष के भीतर पुनर्गठन पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, लेकिन इसकी सफलता नई कानूनी व्यवस्था, स्पष्ट संक्रमणकालीन योजना और हितधारकों के बीच सहमति पर निर्भर होगी।