
सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट के माध्यम से नेपाल विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र के सहयोग से हरित यूरिया मल उद्योग संचालित करने की घोषणा की है। हरित यूरिया उत्पादन के लिए विद्युत् प्राधिकरण सहूलियत दर पर बिजली उपलब्ध कराएगा और उत्पादित मल को सरकार खरीदेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्युत् प्राधिकरण का मुख्य कार्य विद्युत सेवा प्रदान करना है, इसलिए इसे मल उत्पादन में शामिल नहीं होना चाहिए। १९ जेठ, काठमांडू। नेपाल में रासायनिक मल की कमी दूर करने के लिए सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में एक महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की है। सरकार ने नेपाल विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र की सहकार्य में ‘कंपनी मॉडल’ में ‘हरित यूरिया’ मल उद्योग संचालित करने की घोषणा की है। आगामी वर्ष २०८३/८४ के बजट वक्तव्य के माध्यम से ऊर्जा, जल स्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र के सहयोग से कंपनी मॉडल में हरित यूरिया मल उद्योग संचालन की बात कही है।
सरकार ने निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए उत्पादित मल की खरीद गारंटी (पीपीए) करने और सहूलियत दर पर बिजली उपलब्ध कराने की नीति अपनाई है। प्राधिकरण संचालक समिति के सदस्य अम्सुकिरण शाही के अनुसार, हाइड्रोजन को पृथक करके हरित यूरिया बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विश्वभर चर्चा में रहे हरित हाइड्रोजन को नेपाल में भी बजट में शामिल किए जाने के बाद अधिक रुचि दिखी है। सरकार ने इस विषय पर तीन अध्ययन कराए हैं। इन अध्ययनों से पता चला कि नेपाल में हरित यूरिया मल उत्पादन संभव है। इसी आधार पर सरकार ने पहली बार इसे बजट में शामिल किया है।
शुरुआत में उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के सचिवों के बीच चर्चा हुई थी। चर्चा के बाद इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए उदयपुर सीमेंट उद्योग को केंद्र में रखा गया था। सीमेंट उद्योग से निकलने वाले गैस को फ्यूज करके यूरिया मल बनाने की योजना है। हालांकि, वर्तमान में उदयपुर सीमेंट उद्योग बंद है। सरकार इसे पुनः संचालित करने की तैयारी में है। उसी आधार पर उक्त उद्योग से निकलने वाले वेस्ट गैस से हरित यूरिया मल बनाने की योजना है, यह शाही ने बताया।
हरित यूरिया सामान्यत: रासायनिक मल का उत्पादन करते समय प्राकृतिक गैस या कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है, जो वातावरण में कार्बन उत्सर्जन बढ़ाता है। फिर भी, नेपाल में कार्यरत प्रचुर जलविद्युत का उपयोग करके पानी से हाइड्रोजन अलग कर बनाया जाने वाला मल ही हरित यूरिया कहलाता है। यह पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ स्वदेशी कच्चा माल (बिजली और पानी) पर आधारित है, ऐसा शाही ने बताया। हरित यूरिया के उत्पादन के लिए मुख्य तीन कच्चे माल आवश्यकता होती है: विद्युत्, पानी और कार्बनडाईऑक्साइड (CO₂)। पहले बिजली के जरिए पानी (H₂O) को तोड़कर हाइड्रोजन गैस निकाली जाती है। उसके बाद हवा से नाइट्रोजन लेकर निकाले गए हाइड्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है। अमोनिया में कार्बनडाईऑक्साइड मिलाने के बाद ठोस यूरिया मल बनता है, शाही ने बताया।
नेपाल में कार्बनडाईऑक्साइड को उदयपुर सीमेंट जैसी उद्योगों से निकलने वाली धुआं (वेस्ट गैस) को ‘कैप्चर’ करके उपयोग करने की योजना प्रस्तावित की गई है। ‘सीमेंट उद्योग से बड़े पैमाने पर CO₂ निकलता है, इसे उपयोग में लाने से प्रदूषण कम होता है और सस्ते में मल उत्पादन संभव होता है,’ शाही ने कहा। बजट में निर्दिष्ट किया गया है कि सरकार निजी क्षेत्र को इस उद्योग में निवेश के लिए विशेष सुविधा प्रदान करेगी। प्राधिकरण सहूलियत दर पर बिजली देगा और इसी आधार पर जल्द से जल्द परीक्षण के रूप में हरित यूरिया मल उत्पादन की योजना को आगे बढ़ाएगा। ‘हम पांच रुपये प्रति यूनिट बिजली देकर नेपाल में बड़ी मात्रा में यूरिया का उत्पादन करने की क्षमता रखते हैं,’ शाही ने कहा।
नेपाल में यह योजना कितनी संभव है? नेपाल में इसका तकनीकी अध्ययन काठमांडू विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में साढ़े दो मेगावाट की क्षमता वाला एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। वर्षा ऋतु में अधिक होने वाली बिजली को मल उत्पादन में उपयोग करके बिजली की बर्बादी रोकी जा सकेगी, शाही ने बताया। जल तथा ऊर्जा आयोग का सचिवालय और वैकल्पिक ऊर्जा प्रचार केंद्र इसे प्राथमिकता देते हुए अध्ययन कर रहे हैं। पड़ोसी भारत में भी विद्युत प्राधिकरण के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन विभाग बनाया गया है। संभावनाएं होते हुए भी कुछ कानूनी और तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं। प्राधिकरण के संचालक सदस्य शाही के अनुसार हाइड्रोजन के गुण जांचने और नियमन करने वाला किसी ‘नियामक निकाय’ की नेपाल में अभी तक व्यवस्था नहीं है। हाइड्रोजन गैस अत्यंत ज्वलनशील होती है, इसलिए इसकी सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण में विशेष सावधानी आवश्यक है।
नेपाल हर साल भारी राशि खर्च करके रासायनिक मल का आयात करता है। सरकार द्वारा बजट में प्रस्तावित हरित यूरिया अवधारणा सफल होने पर न केवल मल उत्पादन में बल्कि जलविद्युत उपयोग में भी नई(dimensoins) उम्मीदें जुड़ेंगी। प्राधिकरण इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। विशेषज्ञों का सवाल – क्या प्राधिकरण विद्युत उत्पादन करे या मल निर्माण? सरकार की इस योजना पर विशेषज्ञों ने आश्चर्य जताया है। उनका तर्क है कि विद्युत प्राधिकरण का कार्य विद्युत उत्पादन, प्रसारण और वितरण है, मल निर्माण में संलग्न नहीं होना चाहिए। विद्युत प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निदेशक प्रबल अधिकारी ने सवाल उठाया कि क्या प्राधिकरण का काम मल बनाना है या यह विद्युत सेवा से संबंधित है। ‘विद्युत प्राधिकरण ने निजी क्षेत्र के साथ मिलकर हरित यूरिया मल बनाने की बात कही है, लेकिन प्राधिकरण का असली काम क्या है? यह विद्युत उत्पादन और सेवा में दक्ष है। उसी पर ध्यान केन्द्रित होना चाहिए और इसे बेहतर बनाने पर काम होना चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘मगर जब मल निर्माण की बात आती है तो यह पुनर्संरचना योजना से मेल नहीं खाती।’ एक तरफ प्राधिकरण को तीन कंपनियों में विभाजित करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर मल उत्पादन करने का मुद्दा विरोधाभास लिए हुए है, उन्होंने कहा। ‘पुनर्संरचना के कारण प्राधिकरण के टूटने की स्थिति आएगी, तब मल निर्माण संभव होगा कैसे? क्यों प्राधिकरण मल बनाये? यह काम निजी सेक्टर कर सकता है, तो यह पहल क्यों?’ उन्होंने प्रश्न उठाया। विद्युत सेवा प्रदान करने वाले प्राधिकरण को मल निर्माण का जिम्मा देना, यह विषय उनके मुताबिक विचारणीय एवं गम्भीर है।




