
देश निर्माण करने के लिए नेपाली के मन में देश के प्रति दुख होना आवश्यक है। प्रत्येक नेपाली के हृदय में देश का पीड़ा महसूस होनी चाहिए। पहले हिमालों की भूमि थी, फिर किसी का वस्त्र। पहले पहाड़ों की भूमि थी, फिर किसी का पोशाक। पहले तराई की भूमि थी, फिर किसी का पहनावा। यदि देश ही न होता तो आखिरकार किसका क्या रहता? नेपालीों के रक्त में देश को प्रवाहित होना ही चाहिए। इसलिए प्रत्येक के दिल में देश का पीड़ा महसूस होना आवश्यक है। हर भाषा-भाषी और पहनावे के बीच एकता में आधारित रहना चाहिए। सभी धर्मों और संस्कृतियों में विशिष्टता कायम रहनी चाहिए।
देश न होने पर आखिरकार किसका क्या बचता? नेपाली की आँखों में देश का खिलना ही चाहिए। इसलिए नेपाली के हृदय में देश का दुख होना अनिवार्य है। नेपाल सभी का फूलों की माला जैसा बनना चाहिए। हम सभी इसके माली बनना चाहिए। देश न होने पर कोई सत्ता और सुविधाओं का कोई अर्थ नहीं रहता। इसलिए सबके हाथ में देश का उठना ही चाहिए। देश निर्माण के लिए नेपाली के मन में देश का दर्द होना अत्यंत आवश्यक है।





